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==कुछ महत्वपूर्ण तथ्य== इतिहासकार [[विजय नाहर]] की पुस्तक हिन्दुवा सूर्य महाराणा प्रताप के अनुसार कुछ तथ्य उजागर हुए।<ref>{{Cite book|author=विजय नाहर|title=हिन्दुवा सूर्य महाराणा प्रताप|publisher=पिंकसिटी पब्लिशर्स| isbn=978-93-80522-45-6|year=2011|page= 270}}</ref> 1 .महाराणा उदय सिंह ने युद्ध की नयी पद्धति - [[छापामार युद्ध|छापामार युद्धप्रणाली]] इजाद की। वे स्वयं तो इसका प्रयोग नहीं कर सके परन्तु महाराणा प्रताप, महाराणा राज सिंह एवं [[छत्रपति शिवाजी]] महाराज ने इसका सफल प्रयोग करते हुए मुगलों पर सफलता प्राप्त की ।<ref>{{cite web|title=महाराणा प्रताप के विषय में भारतीय इतिहास में लिखी भ्रांतियों को दूर करती विजय नाहर की पुस्तक "हिंदुवा सूर्य महाराणा प्रताप" की समीक्षा|url=https://udaipurkiran.in/hindi/1208578/|website=www.udaipurkiran.in|accessdate=9 May 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190509155336/https://udaipurkiran.in/hindi/1208578/|archive-date=9 मई 2019|url-status=dead}}</ref> 2. महाराणा प्रताप मुग़ल सम्राट अकबर से नहीं हारे। उसे एवं उसके सेनापतियो को धुल चटाई । हल्दीघाटी के युद्ध में प्रताप जीते। महाराणा प्रताप के विरुद्ध हल्दीघाटी में पराजित होने के बाद स्वयं अकबर ने जून से दिसम्बर 1576 तक तीन बार विशाल सेना के साथ महाराणा पर आक्रमण किए, परंतु महाराणा को खोज नहीं पाए, बल्कि महाराणा के जाल में फँसकर पानी भोजन के अभाव में सेना का विनाश करवा बैठे। थक हारकर अकबर बांसवाड़ा होकर मालवा चला गया। पूरे सात माह मेवाड़ में रहने के बाद भी हाथ मलता अरब चला गया। शाहबाज खान के नेतृत्व में महाराणा के विरुद्ध तीन बार सेना भेजी गई परन्तु असफल रहा। उसके बाद अब्दुल रहीम खान-खाना के नेतृत्व में महाराणा के विरुद्ध सेना भिजवाई गई और पीट-पीटाकर लौट गया। 9 वर्ष तक निरन्तर अकबर पूरी शक्ति से महाराणा के विरुद्ध आक्रमण करता रहा। नुकसान उठाता रहा अन्त में थक हार कर उसने मेवाड़ की और देखना ही छोड़ दिया।<ref>{{cite web|title="हिंदुवा सूर्य महाराणा प्रताप" की समीक्षा|url=https://m.dailyhunt.in/news/india/hindi/udaipur+kiran+hindi-epaper-udaihin/maharana+pratap+ke+vishay+me+bharatiy+itihas+me+likhi+bhrantiyo+ko+dur+karati+vijay+nahar+ki+pustak+hinduva+sury+maharana+pratap+ki+samiksha-newsid-115840604?listname=topicsList&index=0&topicIndex=0&mode=pwa|website=www.m.dailyhunt.in|accessdate=9 May 2019}}</ref> 3. ऐसा कुअवसर प्रताप के जीवन में कभी नहीं आया कि उन्हें घास की रोटी खानी पड़ी अकबर को सन्धि के लिए पत्र लिखना पड़ा हो। इन्हीं दिनों महाराणा प्रताप ने सुंगा पहाड़ पर एक बावड़ी का निर्माण करवाया और सुन्दर बगीचा लगवाया| महाराणा की सेना में एक राजा, तीन राव, सात रावत, 15000 अश्वरोही, 100 हाथी, 20000 पैदल और 100 वाजित्र थे। इतनी बड़ी सेना को खाद्य सहित सभी व्यवस्थाएँ महाराणा प्रताप करते थे। फिर ऐसी घटना कैसे हो सकती है कि महाराणा के परिवार को घास की रोटी खानी पड़ी। अपने उतरार्ध के बारह वर्ष सम्पूर्ण मेवाड़ पर शुशाशन स्थापित करते हुए उन्नत जीवन दिया ।<ref>{{cite web|title=महाराणा प्रताप के विषय में भारतीय इतिहास में लिखी भ्रांतियों को दूर करती विजय नाहर की पुस्तक "हिंदुवा सूर्य महाराणा प्रताप" की समीक्षा|url=https://hindi.dailykiran.com/1103917/|website=www.hindi.dailykiran.com|access-date=9 May 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190510052152/https://hindi.dailykiran.com/1103917/|archive-date=10 मई 2019|url-status=dead}}</ref> 4. [[पृथ्वीराज राठौड़]], अकबर के दरबारी कवि होते हुए भी महाराणा प्रताप के महान प्रशंसक थे।
सारांश:
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