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===मुद्रा के परिमाण सिद्धान्त का समीकरण=== मुद्रा के परिमाण सिद्धान्त के दो समीकरण हैः 1. फिशर का समीकरण 2. कैम्ब्रिज समीकरण ==== फिशर का समीकरण==== इरंविग फिशर ने अपने नकद व्यवसाय दृष्टिकोण का प्रतिपादन सन् 1911 में प्रकाशित अपनी पुस्तक 'The Purchasing Power fo Money' में किया। फिशर के नकद व्यवसाय दृष्टिकोण के अनुसार व्यापार की मात्रा तथा चलन वेग के स्थिर रहने पर मुद्रा की पूर्ति तथा कीमत स्तर में प्रत्यक्ष सम्बन्ध पाया जाता है। फिशर के अनुसार कीमत स्तर का निर्धारण वहाँ होता है जहाँ मुद्रा की मांग तथा मुद्रा की पूति एक दूसरे के बराबर हो। (मुद्रा की मांग = मुद्रा की पूर्ति) : '''PT=MV+M'V' ''' जहाँ, P = मुद्रा का मूल्य T = वस्तुओं ओर सेवाओं की कुल मात्रा जो मुद्रा के द्वारा खरीदी जायेगी M = करेन्सी की मात्रा M' = साख मुद्रा की मात्रा V = मुद्रा का चलन वेग V' = साख मुद्रा का चलन वेग ऊपर लिखे हुए समीकरण में बताया गया है कि ( MV + M'V' ) मुद्रा की कुल पूर्ति है तथा ( PT ) मुद्रा की मांग को प्रदर्षित करती है। ; मुद्रा की पूर्ति मुद्रा की पूर्ति में हम मुद्रा की मात्रा तथा मुद्रा के चलन वेग को शामिल करते है। मुद्रा की मात्रा में हम करेन्सी की मात्रा तथा साख मुद्रा की मात्रा को शामिल करते हैं। : M + M' = नोट + सिक्के + साख मुद्रा मुद्रा की चलन गति से अभिप्राय यह है कि मुद्रा की एक इकाई द्वारा एक वर्ष में कितनी बार वस्तुंए तथा सेवायें खरीदी जाती है। : चलन गति = कुल राष्ट्रीय उत्पाद/प्रचलन में मुद्रा ; मुद्रा की मांग मुद्रा द्वारा हम विभिन्न आवष्यकताओं की पूर्ति करते हैं इसलिए मुद्रा की मांग करते है। फिशर के विनिमय समीकरण में मुद्रा की मांग में व्यापारिक सौदे तथा कीमत स्तर को शामिल करते है। 1. व्यापारिक सौदों से अभिप्रायः एक वर्ष में बाजार मे ब्रिकी के लिए आने वाले सभी सेवाओं तथा वस्तुओं की कुल मात्रा से है। 2. कीमत स्तर से अभिप्राय एक निश्चित समय में व्यापारिक सौदों की प्रत्येक इकाई की औसत कीमत से है। फिशर का समीकरण बताता है कि अगर मुद्रा की पूर्ति में वृद्धि होती है तो कीमत स्तर भी बढ़़ जायेगा तथा मुद्रा की पूर्ति और मुद्रा के मूल्य में विपरीत संबंध होता है। =====फिशर के समीकरण की आलोचना ===== फिशर के समीकरण की निम्नलिखित आलोचनाएँ हैः ;1. अवास्तविक मान्यताएँ फिषर ने अपने समीकरण में कई अवास्तविक मान्यताओं को शामिल किया है। जैसे कीमत स्तर को निष्क्रिय तत्व तथा मुद्रा की पूर्ति को सक्रिय तत्व माना गया है और व्यापारिक सौदों तथा मुद्रा की चलन गति को स्थिर मान लिया गया है। ;2. मुद्रा की पूर्ति को अधिक महत्व इरविंग फिशर ने अपने सिद्धान्त में मुद्रा की मांग की अपेक्षा मुद्रा की पूर्ति को अधिक महत्व दिया है। फिशर ने बताया कि मुद्रा की पूर्ति में वृद्धि होने पर कीमत स्तर परिवर्तित होता है जबकि मुद्रा की माँग का कीमत स्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इस प्रकार फिशर केवल मुद्रा के पूर्ति पक्ष को अधिक महत्व देते है। ;3. कीमत स्तर को निष्क्रिय मानना इरविग फिशर ने कीमत स्तर की एक निष्क्रिय तत्व माना है बल्कि कीमत स्तर एक सक्रिय तत्व है। कीमत स्तर में परिवर्तन होने में अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्र प्रभावित होते है। कीमत स्तर में वृद्धि होने से उद्यमी के लाभ के स्तर पर भी वृद्धि होती है। इस प्रकार कीमत स्तर को निष्क्रिय तत्व मानना गलत बात है। ;4. पूर्ण रोजगार फिशर का परिमाण सिद्धान्त केवल पूर्ण रोजगार की अवस्था में लागू होता है। परन्तु प्रो. केन्ज के अनुसार पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में अपूर्ण रोजगार की अवस्था पाई जाती है और यह सिद्धान्त अपूर्ण रोजगार की अवस्था में लागू नहीं होगा। ;5. व्यापार चक्रों की व्याख्या करने में असफल फिशर का परिमाण सिद्धान्त व्यापार चक्रों की व्यख्या करने में असफल रहा है। यह मंदी तथा तेजी की स्थिति में मुद्रा की पूर्ति तथा कीमत स्तर की व्याख्या नहीं कर पाता है क्योंकि यह व्यापारिक सौदों का आकार तथा मुद्रा की चलन गति को स्थिर मान लेता है। ;6. ब्याज की दर के प्रभाव की अवहेलना इरविंग फिशर का सिद्धान्त कीमतों पर ब्याज की दर के प्रभाव की व्याख्या नहीं कर पाता है। सबसे पहले मुद्रा की पूर्ति बढ़ती है मुद्रा की पूर्ति में वृद्धि होने से ब्याज की दर कम होती है ब्याज की दर में कमी होने से निवेश बढ़ता है निवेश बढ़ने से आय तथा उत्पादन बढ़ता है आय तथा उत्पादन बढ़ने से कीमत स्तर बढ़ता है परन्तु फिशर ने मुद्रा की पूर्ति तथा कीमत स्तर में सीधा संबंध बताया है तथा ब्याज की दर के प्रभाव की अवहेलना की है। ;7. अमौद्रिक तत्वों के प्रभाव की अवहेलना कीमत स्तर को कई संस्थागत राजनैतिक, अन्तर्राष्ट्रीय, तकनीकी तथा मनोवैज्ञानिक तत्व प्रभावित करते हैं परन्तु फिशर ने इन सब तत्वों की अवहेलना की है। फिशर मानता है कि कीमत स्तर पर केवल मुद्रा की पूर्ति का ही प्रभाव पड़ता है।
सारांश:
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