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== नजरबन्दी से पलायन == [[File:Netaji house kolkatta.jpg|thumb|कलकत्ता (वर्तमान [[कोलकाता]]) स्थित '''नेताजी भवन''' जहाँ से सुभाष चन्द्र बोस वेश बदल कर फरार हुए थे। इस घर में अब नेताजी रिसर्च ब्यूरो स्थापित कर दिया गया है। भवन के बाहर लगे होर्डिंग पर सैनिक कमाण्डर वेष में नेताजी का [[फोटो|चित्र]] साफ दिख रहा है।]] नजरबन्दी से निकलने के लिये सुभाष ने एक योजना बनायी। 16 जनवरी 1941 को वे पुलिस को चकमा देते हुए एक पठान मोहम्मद ज़ियाउद्दीन के वेश में अपने घर से निकले। शरदबाबू के बड़े बेटे शिशिर ने उन्हे अपनी गाड़ी से कोलकाता से दूर गोमोह तक पहुँचाया। गोमोह रेलवे स्टेशन से फ्रण्टियर मेल पकड़कर वे [[पेशावर]] पहुँचे। पेशावर में उन्हें फॉरवर्ड ब्लॉक के एक सहकारी, मियाँ अकबर शाह मिले। मियाँ अकबर शाह ने उनकी मुलाकात, किर्ती किसान पार्टी के भगतराम तलवार से करा दी। भगतराम तलवार के साथ सुभाष पेशावर से [[अफगानिस्तान]] की राजधानी [[काबुल]] की ओर निकल पड़े। इस सफर में भगतराम तलवार रहमत खान नाम के पठान और सुभाष उनके गूँगे-बहरे चाचा बने थे। पहाड़ियों में पैदल चलते हुए उन्होंने यह सफर पूरा किया। काबुल में सुभाष दो महीनों तक उत्तमचन्द मल्होत्रा नामक एक [[भारत|भारतीय]] व्यापारी के घर में रहे। वहाँ उन्होने पहले [[रूस|रूसी]] दूतावास में प्रवेश पाना चाहा। इसमें नाकामयाब रहने पर उन्होने [[जर्मनी|जर्मन]] और [[इटली|इटालियन]] दूतावासों में प्रवेश पाने की कोशिश की। इटालियन दूतावास में उनकी कोशिश सफल रही। जर्मन और इटालियन दूतावासों ने उनकी सहायता की। आखिर में आरलैण्डो मैजोन्टा नामक इटालियन व्यक्ति बनकर सुभाष काबुल से निकलकर रूस की राजधानी [[मास्को]] होते हुए जर्मनी की राजधानी [[बर्लिन]] पहुँचे। [[चित्र:The Car.JPG|thumb|left|200px|[[कोलकाता]] स्थित '''नेताजी भवन''' में रखी [[कार]] जिसमें बैठकर सुभाष चन्द्र बोस घर से फरार हुए]]
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