सामग्री पर जाएँ
मुख्य मेन्यू
मुख्य मेन्यू
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
मार्गदर्शन
मुखपृष्ठ
हाल में हुए बदलाव
बेतरतीब पृष्ठ
मीडियाविकि के बारे में सहायता
भारतपीडिया
खोजें
खोजें
दिखावट
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
व्यक्तिगत उपकरण
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
लॉग-आउट किए गए संपादकों के लिए पृष्ठ
अधिक जानें
योगदान
वार्ता
"
क्रिस्टलकी
" (अनुभाग) सम्पादित करें
पृष्ठ
चर्चा
हिन्दी
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
उपकरण
उपकरण
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
क्रियाएँ
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
सामान्य
कड़ियाँ
पृष्ठ से जुड़े बदलाव
विशेष पृष्ठ
पृष्ठ की जानकारी
दिखावट
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
चेतावनी:
आपने लॉग-इन नहीं किया हुआ है। अगर आप सम्पादन करते हैं तो इस पृष्ठ के सम्पादन इतिहास में आपका IP पता दृश्य होगा। अगर आप
लॉग-इन
करते हैं या
खाता बनाते हैं
तो दूसरी सुविधाओं के साथ-साथ आपके सम्पादनों का श्रेय आपके सदस्यनाम पर दिया जाएगा।
ऐन्टी-स्पैम जाँच। इसे
नहीं
भरें!
== क्रिस्टल समुच्चय == क्रिस्टल प्रकृति में सामान्यत: नहीं दिखाई पड़ते हैं और न प्रयोगशाला में ही उनका बनाना सरल है। अधिकतर वे समुच्चय में मिलते हैं, जो समांगी होते हैं (अर्थात् एक ही पदार्थ के बने होते हैं तथा समांतर रेखाओं में इनकी अणुव्यवस्था भी समान होती है), या विषमांगी होते हैं, जिसमें भिन्न भिन्न क्रिस्टलों का योग भिन्न भिन्न होता है। समांगी समुच्चय में बहुधा क्रिस्टलों का समांतर विकास दिखलाई पड़ता है, जैसे फिटकरी (alum), ताँबा, हेमाटाइट और हिम में। कभी कभी समांतरण आंशिक होता है, जैसे कि यमल क्रिस्टलों (twin crystals) में। बहुतेरों में तो समांतरण बिल्कुल ही नहीं दिखाई देता। इनमें क्रिस्टलीय इकाइयाँ अव्यवस्थित रूप से जुड़ी रहती हैं और इस प्रकार एक "अनियमित समुच्चय" की रचना होती है। इसी प्रकार "विषमांगी समुच्चय" में भी लगभग पूर्ण समांतरण हो सकता है झ्र्जैसा समाकृतिक वृद्धि (somoriphous growth) मेंट या आंशिक समांतरण हो सकता है, या समांतरण का पूर्ण अभाव हो सकता है। यमल क्रिस्टल में दो या अधिक क्रिस्टल इस प्रकार आकार में जुड़े रहते हैं कि एक भाग संलग्न भाग के परावर्तन से बना दिखलाई पड़ता है। ऐसा प्रतीत होता है कि यमल क्रिस्टल का एक भाग अपनी मौलिक स्थिति से अक्ष के ऊपर 180रू घुमाया गया है। ऊपर कथित परावर्तन समतल यमल क्रिस्टल के दोनों भागों से समान रूप से संबंधित रहता है, पर यह समतल उन दोनों भागों में से किसी का भी सममिति समतल नहीं होता है। यही कल्पित समतल यमल समतल और अक्ष यमल अक्ष कहलाता है। यह दोनों एक दूसरे पर समकोण बनाते हैं। वह समतल जहाँ पर दो संलग्न भाग आपस में मिले रहते हैं संमिलन तल (composition plane) कहलाता है। अधिकतर दशाओं में यह यमल समतल ही होता है। संस्पर्श यमलों में एक स्पष्ट संमिलन तल होता है, जैसे आर्थोक्लेज़ स्पिनेल और केसिटेराइट में। पर अंतर्वेशी यमल (penetration twins), जैसे स्टॉरोलाइट, फ्लोराइट तथा पाइराइट में ऐसा कोई समतल नहीं दिखलाई पड़ता। पिछले उदाहरण में क्रिस्टल परस्पर अंतर्वेंशी होते हैं। आवर्ती यमल (repeated twins) तीन या अधिक क्रिस्टलों से बनते हैं। इसी के अंतर्गत आते हैं, बहुसंश्लेषी यमल (polysynthetic twins) तथा चक्रीय युग्म। बहुसंश्लेषी यमल में क्रमागत संमिलन तल (composition planes) समांतर होते हैं, जैसे ऐल्बाइट में, तथा चक्रीय युग्म (cycle twins) में ये तल समांतर नहीं होते, जैसे रूटाइल में। चक्रीय यमल के द्वारा नीची श्रेणी की सममिति के क्रिस्टल कभी कभी अपेक्षाकृत ऊँची श्रेणी की सममिति के क्रिस्टलों का अनुकरण करते हैं। क्रिस्टलों में यमलन का कारण अणुओं में पूर्ण समांतरण की कमी मानी जाती है, जो क्रिस्टलन के प्रक्रम में अणुबलों को यथोचित समय न मिलने के कारण होती है। चक्रीय यमलों में यमलन क्रिस्टलों की उच्च सममिति प्राप्त करने का असफल प्रयास ही प्रतीत होता है।
सारांश:
भारतपीडिया पर किया कोई भी योगदान अन्य सदस्यों द्वारा बदला जा सकता है और हटाया भी जा सकता है। अगर आपको अपने लिखे हुए पाठ में संपादन होना नामंजूर है तो यहाँ पर न लिखें।
आप हमें यह भी वचन देतें हैं कि यह आपने स्वयं लिखा है अथवा सार्वजनिक क्षेत्र या किसी समान मुक्त स्रोत से प्रतिलिपित किया है (अधिक जानकारी के लिये
भारतपीडिया:कॉपीराइट
देखें)।
कॉपीराइट सुरक्षित कार्यों को बिना अनुमति के यहाँ न डालें!
रद्द करें
सम्पादन सहायता
(नए विंडो में खुलता है)