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===अखिल भारतीय शब्दावली=== बहुत सारे शिक्षाविदों, भाषा-विज्ञानियों एवं विद्वानों की यह धारणा है कि [[भारत की भाषाएँ|भारतीय भाषाओं]] की तकनीकी शब्दावली ऐसी होनी चाहिए जिसमें सभी भाषाओं में परस्पर समरूपता हो ताकि उच्च शिक्षा अनुसन्धान तथा सभी क्षेत्रों में वैज्ञानिक ज्ञान के आदान-प्रदान एवं अन्तर-भाषायी सम्प्रेषण में सुविधा रहे। इस प्रयोजन के लिए भारतीय भाषाओं में एक सर्वनिष्ठ एवं समरूप शब्द भण्डार होना आवश्यक है। चूँकि देश के विभिन्न राज्यों की भाषाओं में तकनीकी शब्दों के मूलरूप प्रायः एक समान हैं, अतः अनेक शब्दों में आपस में समानता दृष्टिगत होती है। समय की इस माँग को ध्यान में रखते हुए आयोग ने विज्ञान तथा तकनीकी से सम्बन्धित आधारभूत शब्दों के अखिल भारतीय पर्यायों की पहचान करने अथवा पर्याय निर्धारित करने की योजना पर काम करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए 1979 में [[बंगलौर विश्वविद्यालय]] में अखिल भारतीय शब्दावली (Pan Indian Terminology) विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित की। इस संगोष्ठी में अखिल भारतीय शब्दावली विषय पर चर्चा हुई और इससे सम्बन्धित आवश्यक दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए। ====अखिल भारतीय शब्दावली पहचान के सामान्य पक्ष==== वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग द्वारा आयोजित अखिल भारतीय संगोष्ठियों में विचार-विमर्श के दौरान कुछ सामान्य पक्ष भी उभर कर सामने आए। ये पक्ष थे, जिन्हें आधार रूप में स्वीकार करने पर अखिल भारतीय शब्दावली निर्धारण में मदद मिलती है। आयोग ने इन्हीं पक्षों के आलोक में अखिल भारतीय शब्दावली सम्बन्धी कार्य को आगे बढ़ाया। आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. मलिक मोहम्मद ने भौतिकी की अखिल भारतीय शब्दावली की प्रस्तावना में इन पक्षों को उजागर किया है। उनके अनुसार ये पक्ष हैं *(१) अन्तरराष्ट्रीय शब्द सभी को मान्य हैं। *(२) अधिकांश ऐसे संस्कृत शब्द जो विभिन्न भारतीय भाषाओं में बहुत अलग-अलग अर्थ नहीं देते, अखिल भारतीय स्तर पर प्रयोग के लिए स्वीकृत कर लिए जाते हैं। *(३) फारसी-अरबी से उद्धृत शब्द जो पहले से ही प्रचलित हैं, अधिकांश भारतीय भाषाओं द्वारा मान्य हैं। *(४) यदि कोई शब्द किसी एक भी भाषा में अनादरसूचक अर्थ का बोधक है तो वह एकदम अस्वीकृत कर दिया जाता है। *(५) यदि किसी भाषा को कोई विशेष शब्द इसलिए मान्य नहीं होता क्योंकि उसके स्थान पर पहले से कोई क्षेत्रीय शब्द इतना प्रचलित है कि उसे बदलना असम्भव है तो ऐसी स्थिति में अपवादस्वरूप उस भाषा को अपने पूर्व-प्रचलित शब्द का प्रयोग करते रहने की छूट दे दी जाती है। ====अखिल भारतीय शब्दावली की निर्माणपद्धति==== अखिल भारतीय शब्दावली निर्माण के लिए जिस पद्धति को अपनाया गया, उसमें सबसे पहले प्रयास यह किया गया कि वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग विषय-विशेष की आधारभूत शब्दावली की सूची को अंग्रेजी में तैयार करता। यह सूची उन शब्दों का संकलन होती, जिन्हें अखिल भारतीय प्रयोग के लिए स्वीकार किया जा सकता था। उसके बाद तैयार सूची की प्रतियाँ देश के सभी राज्य पाठ्य पुस्तक मण्डलों को इस अनुरोध के साथ भेजी जातीं कि वे इस सूची को अपने भाषायी क्षेत्र में किसी ऐसे विद्वान के पास भेजें जो विषय-विशेष का विशेषज्ञ तो हो ही, साथ ही वह अपनी भाषा में उस विषय विशेष में व्यवहत/प्रयुक्त होने वाले वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दों से भली प्रकार से परिचित भी हों। वह विशेषज्ञ उसी सूची में शामिल अंग्रेजी में लिखित तकनीकी शब्दों के पर्याय अपनी भाषा में से संकलित करता और फिर उन्हें आयोग के पास भेज देता। भाषायी क्षेत्र की दृष्टि से ये स्वयं में मानक पर्याय होते। लेकिन इतना कार्य करके वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग द्वारा अखिल भारतीय शब्दावली के पर्याय निश्चित निर्धारित नहीं कर लिए जाते। सभी राज्य पाठ्य पुस्तक मण्डलों से प्राप्त सूचियों में शामिल अंग्रेजी शब्दों के मानक पर्यायों को सारणीबद्ध करके उन्हें अखिल भारतीय संगोष्ठियों में भी प्रस्तुत किया जाता था। इन सूचियों में आयोग द्वारा उन शब्दों के लिए अनुमोदित पर्याय भी दिए रहते थे। इन संगोष्ठियों में राज्य पाठ्य पुस्तक मण्डलों द्वारा नामित विद्वान और कुछ भाषाविद आमन्त्रित किए जाते थे। ये संगोष्ठियाँ देश के विभिन्न स्थलों पर आयोजित की जाती थीं। संगोष्ठियों में आमन्त्रित विद्वान सारणीबद्ध पर्यायों में से उस शब्द को चुनने की कोशिश करते जो देश की सभी अथवा अधिकांश भाषाओं में स्वीकार्य हो। इसके अलावा, ऐसा भी होता कि यदि उपलब्ध पर्यायों में से कोई पर्याय कसौटी पर खरा नहीं उतरता तो संगोष्ठियों में आमन्त्रित भाषाविद ऐसा नया पर्याय 'गढ़ने में मदद करते जो अखिल भारतीय स्तर पर व्यवहार में लाया जा सके। इस तरह अखिल भारतीय शब्दावली के पर्याय निर्धारित किए जाते। उक्त प्रक्रिया को अपनाकर आयोग ने संगोष्ठियों, प्रमुख विषय विशेषज्ञों और भाषा विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में अखिल भारतीय शब्दावलियाँ निर्मित करने की दिशा में कार्य आरम्भ किया। इस प्रकार संकलित विभिन्न विषयों के शब्द 'अखिल भारतीय शब्दावली' कहलाते हैं। आयोग ने सबसे पहले 1985 में 'अखिल भारतीय शब्दावली-खगोलिकी' प्रकाशित की। इसके पश्चात अर्थशास्त्र और वाणिज्य, भूगोल, गणित, समाजविज्ञान एवं सांस्कृतिक विज्ञान (सभी 1986 में), भौतिकी (1987), जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, रसायन विज्ञान, भाषा विषान, समुद्रविज्ञान, और भूविज्ञान, (1990), शिक्षा, मनोविज्ञान तथा मनोरोगविज्ञान, सांख्यिकी (1991), प्रायोगिक भूगोल (1992), सिविल इंजीनियरी, मानव भूगोल (1993), भूविज्ञान (1995) आयुर्विज्ञान (1996) आदि विषयों की अखिल भारतीय शब्दावलियां प्रकाशित की गई। आयोग इन शब्दावलियों को देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के विभिन्न विषयों के प्राध्यापकों, भाषाविदों, लेखकों, अनुवादकों, कोशकारों, पत्रकारों एवं राज्य के पाठ्य-पुस्तक निर्माण मण्डलों को निःशुल्क वितरित करता है। इसके अलावा, आयोग ने उक्त सभी अखिल भारतीय शब्दावलियों को एक ग्रन्थ में उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया। आयोग ने इसे 'समेकित अखिल भारतीय शब्द संग्रह' (Comprehensive Glossary of Pan-indian Terms) नाम से वर्ष 2002 में हरियाणा साहित्य अकादमी के तत्वावधान में प्रकाशित किया। वह अंग्रेजी-रोमन-हिन्दी में तैयार किया गया शब्द-संग्रह है।
सारांश:
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