सामग्री पर जाएँ
मुख्य मेन्यू
मुख्य मेन्यू
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
मार्गदर्शन
मुखपृष्ठ
हाल में हुए बदलाव
बेतरतीब पृष्ठ
मीडियाविकि के बारे में सहायता
भारतपीडिया
खोजें
खोजें
दिखावट
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
व्यक्तिगत उपकरण
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
लॉग-आउट किए गए संपादकों के लिए पृष्ठ
अधिक जानें
योगदान
वार्ता
"
भूभौतिकी
" (अनुभाग) सम्पादित करें
पृष्ठ
चर्चा
हिन्दी
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
उपकरण
उपकरण
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
क्रियाएँ
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
सामान्य
कड़ियाँ
पृष्ठ से जुड़े बदलाव
विशेष पृष्ठ
पृष्ठ की जानकारी
दिखावट
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
चेतावनी:
आपने लॉग-इन नहीं किया हुआ है। अगर आप सम्पादन करते हैं तो इस पृष्ठ के सम्पादन इतिहास में आपका IP पता दृश्य होगा। अगर आप
लॉग-इन
करते हैं या
खाता बनाते हैं
तो दूसरी सुविधाओं के साथ-साथ आपके सम्पादनों का श्रेय आपके सदस्यनाम पर दिया जाएगा।
ऐन्टी-स्पैम जाँच। इसे
नहीं
भरें!
=== विवर्तनिक भौतिकी === '''{{मुख्य|विवर्तनिकी}}''' विवर्तनिकी (tectonics) भूवैज्ञानिक रचनाओं के निर्माण में संलग्न भौतिक प्रक्रियाओं का विज्ञान है। इसमें पृथ्वी के विस्तृत रचनात्मक लक्षणों और उनके कारणों, जैसे पर्वतरचना, शैलयांत्रिकी एवं शैल का सामर्थ्य तथा उससे संबद्ध भौतिक गुणों, का मापन तथा अध्ययन किया जाता है भूवैज्ञानिक समस्याओं में भौतिकी के अनुप्रयोग से विवर्तनिक भौतिकीविद् को पृथ्वी के संबंध में अनेक गूढ़ जानकारियाँ प्राप्त करने का सुयोग मिला है। अब भूपटल और उच्च प्रावार (upper mantle) के अध:स्तर एवं स्थल सतह के अनेक उपविभाग करना संभव हो गया है। मध्य महासागरीय एवं महाद्वीपी विभंग (fracture) पद्धति के भूवैज्ञानिक और भूभौतिक लक्षणों से प्रकट है कि यह दो प्रकार के अवयवों से जिन्हें प्राथमिक और गौण चाप कहते हैं, बना है और विकास की भिन्न भिन्न अवस्थाओं में इनकी अनेक पुनरावृत्तियाँ हो चुकी हैं। भूपटल और ऊपरी प्रावार में भूवैज्ञानिक युटिजनक बल और उनके पैटर्नी महाद्वीपीय च्युति और ध्रुवीय परिभ्रमण के लिये अप्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी हो सकते हैं। भ्रशन और वलन की गतिकी और पृथ्वी के पदार्थों के यांत्रिक व्यवहार पर मॉडलों की सहायता से अनेक महत्वपूर्ण प्रयोग किए गए हैं। विवर्तनिक विकृति की दर प्रतिबलों और उनकी अवधि पर निर्भर करती है। ए. ई. शाइडेगर (A.E. Scheidegger) ने प्रतिबलों को छोटी, बड़ी और मध्य अवधि के आधार पर वर्गीकृत किया है। छोटी अवधि लगभग चार घंटे की, मध्य अवधि चार घंटे से 15,000 वर्षों तक की और लंबी अवधि 15,000 वर्षों से करोड़ों वर्षों तक की होती है।
सारांश:
भारतपीडिया पर किया कोई भी योगदान अन्य सदस्यों द्वारा बदला जा सकता है और हटाया भी जा सकता है। अगर आपको अपने लिखे हुए पाठ में संपादन होना नामंजूर है तो यहाँ पर न लिखें।
आप हमें यह भी वचन देतें हैं कि यह आपने स्वयं लिखा है अथवा सार्वजनिक क्षेत्र या किसी समान मुक्त स्रोत से प्रतिलिपित किया है (अधिक जानकारी के लिये
भारतपीडिया:कॉपीराइट
देखें)।
कॉपीराइट सुरक्षित कार्यों को बिना अनुमति के यहाँ न डालें!
रद्द करें
सम्पादन सहायता
(नए विंडो में खुलता है)