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==लैंसडौन विधानसभा से [[विधायक]] के रूप में जनता की सेवा== लैंसडौन विधान सभा क्षेत्र से अपने दो कार्यकालों में कप्तान नौटियाल ने ‘सड़क मार्गों ’, ‘पेयजल योजनाओं ’ व ‘सहकारी वित्तीय संस्थाओं ’ को प्राथमिकता दी।गढ़वाल व कुमायूं को देश की मुख्यधारा से पूर्ण रूप से जोड़ने का महत्व व चीन बॉर्डर से जुड़ा हुआ क्षेत्र होने के कारण इसके रणनीतिक तौर से महत्वपूर्ण स्थान होने का आभास उन्हें पहले से ही था, अतः उनकी पहली प्राथमिकता एक व्यापक सड़क जाल बिछाने की थी. इनमे से प्रमुख हैं- '''राम नगर - मरचूला - बीरोंखाल - थलीसैण मोटर मार्ग''' और '''डेरियाखाल - रिखणीखाल – बीरोंखाल मोटर मार्ग''' :- राम नगर-बीरोंखाल मोटर मार्ग को उन्होंने जनता के [[सहयोग]] से व श्रम दान द्वारा पूरा करवाया। सड़क [[मार्ग]] तैयार होने के बाद सबसे बड़ी समस्या यह थी की उनके पास कोई गाड़ियां यही थी , इसके लिए उन्होंने जगह-जगह जाकर बैठकें की, कोआपरेटिव सोसाइटीज़ का गठन करके जनता से शेयर्स के रूप में धन इकटठा करवाया व तब जाकर दो सेकंड हैण्ड बस ख़रीदी . आज उनके द्वारा स्वीकृत कराये गए सड़क मार्गों का बड़ा हिस्सा “राष्ट्रीय राज मार्गों ” से जुड़ा हुआ है. 1956 में इन्होंने '''‘यूजर्स ट्रांसपोर्ट सोसाइटी लिमिटेड’''' की नींव रखी व अपने दूसरे कार्यकाल के आरम्भ में ही इसकी स्थापना कर दी। कप्तान नौटियाल जब तक ‘यूजर्स ट्रांसपोर्ट’ के अध्यक्ष रहे तब तक [[कंपनी]] के पास 24 बसें हो गयी थी जिन्हें गढ़वाल व कुमाऊं के विभिन्न रुट्स पर चलाया जाता था. ;पेयजल योजनाएं:- [[हिमालय]] के निचले क्षेत्रों में बसे गांवों में पीने के पानी की बड़ी भयंकर समस्या होती है, जल सम्पन्न प्रदेश होने के बाबजूद भी आज भी कई गांवों में पीने का पानी उपलब्ध नहीं है. राम प्रसाद जी ने इस [[समस्या]] को समझा व कई पेयजल योजनाएं मंजूर करवाईं. इनमे से एक महत्वपूर्ण व प्रसिद्द योजना '''‘डालागांव पेयजल परियोजना’''' के नाम से जानी जाती है. इस परियोजना के तहत एक ही बार में करीब एक दर्जन से भी ज्यादा गांवों को पीने का स्वच्छ पानी पाइप लाइन्स के जरिये पहुँचाया गया. ;कोआपरेटिव बैंक्स की स्थापना:- राम प्रसाद जी न केवल एक निर्भीक [[क्रांतिकारी]] थे बल्कि एक [[दूरदर्शी]] [[नायक]] भी थे उन्होंने 1950 के दौर में ही ‘वित्तीय समावेश’ के महत्व को समझ लिया था, इसके लिए उन्होंने गढ़वाल व कुमाऊं में कई '''कोआपरेटिव बैंक्स''' खुलवाए. इनमे गढ़वाल क्षेत्र के लैंसडौन, बीरोंखाल व नौगांवखाल में स्थापित कोआपरेटिव बैंक्स प्रमुख है. कई कोआपरेटिव सोसाइटीज की स्थापना व इनके सुचारू संचालन के लिए इन्होंने जनता के बीच जाकर वित्तीय जागरूकता उत्पन्न की व छोटी-छोटी कीमत के शेयर्स चलाये, सबसे पहले खुद शेयर खरीदे व जनता को हिस्सेदार बनाकर क्षेत्र के वित्तीय [[सशक्तिकरण]] का दूरदर्शी कार्य करने का प्रयास किया.
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