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== प्रकृतिवाद तथा अनुशासन== प्रकृतिवादी विचारक शिक्षा में अनुशासन को महत्व नहीं देते है। वे ‘कारण एवं परिणाम’ के नियम में विश्वास करते हैं। उनके अनुसार प्रत्येक व्यक्ति जो कर्म करता है,उसका परिणाम वह अवश्य भोगता है। ये परिणाम सुखकर एवं दुखकर दोनों ही होते हैं। इस आधार पर अनुशासन स्थापित करने के दो उपनियम दिखाई देते हैं - :(१) रूसो द्वारा प्रतिपादित प्राकृतिक परिणामों का सिद्धान्त :(२) स्पेन्सर द्वारा प्रतिपादित सुख दुख का सिद्धान्त। रूसो के सिद्धान्त के अनुसार बालक के बुरे कार्यों का दण्ड प्रकृति अवश्य देती है। इसलिए उसे किसी प्रकार का दण्ड न देकर प्राकृतिक दण्ड द्वारा अनुशासित होने दिया जाना चाहिये, जबकि स्पेन्सर के सिद्धान्त के अनुसार बालक सुखदायी कार्यों को बार बार दुहराना चाहता है। क्योंकि उससे उसे सुख की अनुभूति होती है जबकि वह दुखद कार्यों को छोड़ देता है, क्योंकि उससे उसे कष्ट होता है। इस प्रकार बालक अनुशासित ढंग से व्यवहार करने लगता है और उसमें स्वानुशासन की भावना विकसित होने लगती है। कुछ प्रकृतिवादी विचारक शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन की स्थापना हेतु किसी भी प्रकार के ‘दमनात्मक सिद्धान्त’ का विरोध करते हैं। उनका विचार है कि बालकों पर शिक्षकों का प्रभाव विशेष रूप से पड़ता है। इसलिए बालकों में अनुशासन की भावना विकसित करने हेतु ‘प्रभावात्मक सिद्धान्त का सहारा लेना चाहिए, जबकि अनेक प्रकृतिवादी विचारक यह मानते हैं कि अनुशासन की स्थापना प्राकृतिक नियमों के अनुसार हो तो ज्यादा अच्छा होता है। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि प्रकृतिवादी बालकों में स्वानुशासन की भावना के विकास के लिए ‘मुक्तात्मक सिद्धान्त’ पर विशेष बल देते हैं।
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