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===भूगोल का भौतिक विज्ञानों से संबंध === ====भूगोल और गणित==== भूगोल की प्रायः सभी शाखाओं विशेष रूप से भौतिक भूगोल की शाखाओं में तथ्यों के विश्लेषण में गणितीय विधियों का प्रयोग किया जाता है। ====भूगोल औ र खगो ल विज्ञान (Geography and Astronomy)==== खगोल विज्ञान में आकाशीय पिण्डों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। भूतल की घटनाओं और तत्वों पर आकाशीय पिण्डों - सूर्य, चंद्रमा, धूमकेतुओं आदि का प्रत्यक्ष प्रभाव होता है। इसीलिए भूगोल में सौरमंडल, सूर्य का अपने आभासी पथ पर गमन, पृथ्वी की दैनिक और वार्षि गतियों तथा उनके परिणामस्वरूप होने वाले परिवर्तनों - दिन-रात और ऋतु परिवर्तन, चन्द्र कलाओं, सूर्य ग्रहण, चन्द्रगहण आदि का अध्ययन किया जाता है। इन तत्वों और घटनाओं का मौलिक अध्ययन खगोल विज्ञान में किया जाता है। इस प्रकार भूगोल का खगोल विज्ञान से घनिष्ट संबंध परिलक्षित होता है। ====भूगोल और भूविज्ञान (Geography and Geology)==== [[भू-विज्ञान]] पृथ्वी के संगठन, संरचना तथा इतिहास के वैज्ञानिक अध्ययन सं संबंधित है। इसके अंतर्गत पृथ्वी के संघठक पदार्थों, भूतल पर क्रियाशील शक्तियों तथा उनसे उत्पन्न संरचनाओं, भूपटल की शैलें की संरचना एवं वितरण, पृथ्वी के भू-वैज्ञानिक कालों आदि का अध्ययन सम्मिलित होता है। भूगोल में स्थलरूपों के विश्लेषण में भूविज्ञान के सिद्धान्तों तथा साक्ष्यों का सहारा लिया जाता है। इस प्रकार भौतिक भूगोल विशेषतः [[भू-आकृति विज्ञान]] (Geomorphology) का भू-विज्ञान से अत्यंत घनिष्ट संबंध है। ====भूगोल और मौसम विज्ञान==== [[भूतल]] को प्रभावित करने वाले भौगोलिक कारकों में जलवायु सर्वाधिक प्रभावशाली और महत्वपूर्ण कारक है। मौसम विज्ञान वायुमण्डल विशेषतः उसमें घटित होने वाले भौतिक प्रक्रमों तथा उससे सम्बद्ध स्थलमंडल और जलमंडल के विविध प्रक्रमों का अध्ययन करता है। इसके अंतर्गत वायुदाब, तापमान, पवन, आर्द्रता, वर्षण, मेघाच्छादन, सूर्य प्रकाश आदि का अध्ययन किया जाता है। [[मौसम विज्ञान]] के इन तत्वों का विश्लेषण भूगोल में भी किया जाता है। ====भूगोल और जल विज्ञान (Geography and Hydrology)==== [[जलविज्ञान|जल विज्ञान]] पृथ्वी पर स्थित जल के अध्ययन से संबंधित है। इसके साथ ही इसमें जल के अन्वेषण, प्रयोग, नियंत्रण और संरक्षण का अध्यन भी समाहित होता है। महासारीय तत्वों के स्थानिक वितरण का अध्ययन भूगोल की एक शखा [[समुद्र विज्ञन]] (Oceanography) में किया जाता है। समद्र विज्ञान में महसागयी जल केकर पशुओं के पीने, फसलों की सिंचई करने, काखानों में जलापूर्ति, जशक्ति, जल रिवहन, मत्स्यखेट आदि विभिन्न रूपों में जल आवश्यक ही नहीं अनवर्य होता है। इस प्रकार हम पाते हैं कि भूगोल और जल विज्ञान में अत्यंत निकट का और घनिष्ट संबंध है। ====भूगोल और मृदा विज्ञान (Geography and Pedology)==== [[मृदा विज्ञान]] (Pedology or soil science) मिट्टी के निर्माण, संरचना और विशेषता का वैज्ञानिक अध्ययन करता है। भूतल पर मिट्टियों के वितरण का अध्ययन मृदा भूगोल (Pedogeogaphy or Soil Geography) के अंतर्गत किया जाता है। मिट्टी का अध्ययन कृषि भूगोल का भी महत्वपूर्ण विषय है। इस प्रकार भूगोल की घनिष्टता मृदा विज्ञान से भी पायी जाती है। ====भूगोल और वनस्पति विज्ञान==== पेड़-पौधों का मानव जीवन से गहरा संबंध है। [[वनस्पति विज्ञान]] पादप जीवन (Plant life) और उसके संपूर्ण विश्व रूपों का वैज्ञानिक अध्यय करता है। प्राकृतिक वनस्पतियों के स्थानिक वितरण और विशेषताओं का विश्लेषण [[भौतिक भूगोल]] की शाखा [[जैव भूगोल]] (Biogeography) और उपशाखा वनस्पति या पादप भूगोल (Plant Geography) में की जाती है। ====भूगोल और जन्तु विज्ञान==== जन्तु विज्ञान या प्राणि समस्त प्रकार के प्राणि जीवन की संरचना, वर्गीकरण तथा कार्यों का वैज्ञानिक अध्ययन है। मनुष्य के लिए जन्तु जगत् और पशु संसाधन (Animal resource) का अत्यधिक महत्व है। पशु मनुष्य के लिए बहु-उपयोगी हैं। मनुष्य को पशुओं से अनेक उपयोगी पदार्थ यथा दूध, मांस, ऊन, चमड़ा आदि प्राप्त होते हैं और कुछ पशुओं का प्रयोग सामान ढोने और परिवहन या सवारी करने के लिए भी किया जाता है। जैव भूगोल की एक उप-शाखा है [[जंतु भूगोल]] (Animal Geography) जिसमें विभिन्न प्राणियों के स्थानिक वितरण और विशेषताओं का विश्लेषण किया जाता है। मानव जीवन के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक सभी क्षेत्रों में पशु जगत का महत्वपूर्ण स्थान होने के कारण इसको भौगोलिक अध्ययनों में भी विशिष्ट स्थान प्राप्त है। अतः भूगोल का जन्तु विज्ञान से भी घनिष्ट संबंध प्रमाणित होता है।
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