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मैरी १ (स्कॉटलैंड की रानी)
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==मृत्यु== === सुनवाई=== [[File:Trial of Mary, Queen of Scots - Documents relating to Mary, Queen of Scots (1586), f.569* - BL Add MS 48027.jpg|thumb|मैरी पर मुकदमें का चित्रांकन, 14–15 अक्टूबर 1586]] ११ अगस्त १५८६ को [[बेबिंग्टन षडयंत्र]] में दोषी पाए जाने पर मैरी को गिरफ्तार कर के टिक्सियाल के सरकारी भवन ले जाया गया।<ref>{{Harvnb|Guy|2004|pp=484–485}}; {{Harvnb|Fraser|1994|p=493}}</ref>मैरी को दोषी साबित करने के एक सफल प्रयास के तहत वैल्सिंघम ने जानबूझ कर ऐसी व्यवस्था करवाई की मैरी की चिठ्ठियाँ चार्टली के उनके आवास से बाहर निकाली जा सकें। मैरी को बताया गया कि उनकी चिठ्ठियाँ सुरक्षित हाथों में हैं लेकिन वास्तविकता में वैलसिंघम ने उनका कूट खोज लिया था और वह उन्हें पढ लेता था।<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|pp=482–483}}; {{Harvnb|Guy|2004|pp=477–480}}; {{Harvnb|Weir|2008|p=507}}</ref> इन चिठ्ठियों से यह स्पष्ट था कि मैरी ने एलिज़ाबेथ कीहत्या की योजना को मंजूरी दी थी।<ref>{{Harvnb|Guy|2004|pp=483–485}}; {{Harvnb|Weir|2008|p=507}}; {{Harvnb|Wormald|1988|p=185}}</ref> उन्हें चार दिनों की यात्रा पर [[फोथरिंघे किला]] ले जाया गया और अक्टूबर में उनपर रानी सुरक्षा कानून के तहत ३६ न्यायधीशों के सामने, जिनमें से एक वैलसिंघम खुद था, देशद्रोह का मुकदमा चलाया गया।<ref>{{Harvnb|Weir|2008|p=508}}</ref><ref>{{Harvnb|Fraser|1994|p=509}}</ref><ref>दो जाँचकर्ता कैथोलिक भी थे। ({{Harvnb|Lewis|1999|p=22}})</ref> अपने बचाव में मैरी ने इन आरोपों को नकार दिया। <ref>{{Harvnb|Boyd|1915|pp=59–65, 143–145, 309–314}}; {{Harvnb|Fraser|1994|pp=506–512}}; {{Harvnb|Guy|2004|pp=488–489, 492}}; {{Harvnb|Weir|2008|p=508}}</ref> उन्होंने अपने विरोधियों को कहा {{quote|"अपनी आत्मा में झाँक कर देखें और याद रखें कि इस दुनिया का रंगमंच, इंग्लैंड के साम्राज्य से कहीं अधिक बडा है।"}}<ref>{{Harvnb|Guy|2004|p=488}}</ref> उन्होंने न्यायधीशों को ध्यान दिलाया कि उन्हें उनके खिलाफ पेश किये गये सबूतों को जाँचने भी नहीं दिया गया, उन्हें वकील करने की आजादी नहीं दी गई और एक विदेशी रानी होने के नाते उनपर कभी भी इंग्लैंड की न्याय व्यवस्था के अंतर्गत देशद्रोह का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता था।<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|pp=506–512}}; {{Harvnb|Guy|2004|pp=489–493}}</ref> २५ अक्टूबर को मैरी को गुनाहगार मानते हुए १ को छोड सभी न्यायधीशों ने उन्हें मौत की सजा सुनाई। <ref>{{Harvnb|Fraser|1994|p=517}}</ref> इसके बावजूद एलिज़ाबेथ उन्हें मौत की सजा देने से हिचक रही थीं। अंग्रेजी संसद के दबाव के बावजूद वो इस बात से चिंतित थीं कि किसी रानी को मौत की सजा देने से एक गलत परंपरा की शुरुआत हो सकती है, और इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं, खासकर तबजब मैरी का बेटा और स्कॉटलैंड का राजा जेम्स ६ कैथोलिक समूहों के साथ गठजोड कर के इंग्लैंड पर आक्रमण कर दे।<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|pp=521–522}}; {{Harvnb|Weir|2008|p=508}}</ref> एलिज़ाबेथ ने मैरी के अंतिम रक्षक पौलेट से पूछा कि क्या वो मैरी को मृत्युदंड देने की बजाए उनकी उम्र कम करने का कोई और अवैध तरीका ढूंढ सकते हैं, जिसे उसने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि उसकी अंतरात्मा ऐसा करने की इज़ाजत नहीं देती और ऐसा कर के वो अपने वंशजों के नाम पर काला धब्बा नहीं छोडना चाहता।<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|p=529}}</ref> १ फरवरी १५८७ को एलिज़ाबेथ ने मृत्युडंड के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिये और अपने दरबारी विलियम डेविसन के सुपुर्द कर दिये।<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|p=528}}</ref> ३ फरवरी को <ref>{{Harvnb|Guy|2004|p=519}}</ref> इंग्लैंड के दरबार के १० सदस्यों को सेसिल ने बिना एलिज़ाबेथ की जानकारी के बुलावा भेजा और तुरंत सजा का अनुकरण करने का फैसला लिया।<ref>{{Harvnb|Guy|2004|p=496}}</ref> {{clear}} === मृत्युदंड=== [[फोथरिंघे]] में ७ फरवरी १५८७ की शाम को मैरी को उन्हें अगली सुबह मृत्युदंड दिए जाने की सूचना दे दी गई।<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|p=531}}; {{Harvnb|Guy|2004|p=498}}; {{Harvnb|Weir|2008|p=508}}</ref>उन्होंने अपने जीवन के अंतिम घंटे प्रार्थना करते हुए, अपने व्यक्तिगत सामानों को लोगों में बाँटते हुए और फ्रांस के राजा को संबोधित अपनी आखिरी इच्छा व पत्र लिखते हुए बिताये।<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|pp=533–534}}; {{Harvnb|Guy|2004|p=500}}</ref> फाँसी का तख्ते को ग्रेट हॉल में बनाया गया, यह २ फीट उँचा काले रंग में रंगा हुआ चबूतरा था। वहाँ ३ स्टूल रखे थे, एक मैरी, और बाकी दो श्र्युशबेरी व केंट के अर्लों के लिये जो सजा होते देखने के लिये बैठने वाले थे। चबूतरे पर एक तकिया था जिसपर मैरी को झुक कर बैठना था और सिर लकडी के साँचे में फंसाना था। <ref>{{Harvnb|Fraser|1994|p=537}}; {{Harvnb|Guy|2004|p=4}}</ref> जल्लादों ने मैरी को झुक कर प्रणाम किया और क्षमा माँगी। मैरी ने जवाब दिया ''मैं तुम्हें पूरे दिल से क्षमा करती हूँ, मैं उम्मीद करती हूँ कि अब तुम मेरे सारे दुखों का अंत कर दोगे।'' <ref>{{Harvnb|Guy|2004|p=7}}; {{Harvnb|Lewis|1999|p=118}}</ref> उनके सेवकों जेन केनेडी, एलिज़ाबेथ कर्ल और जल्लादों ने मैरी को शाही कपडे, जेवर व अन्य राजसी निशानियों को उतारने में मदद की। मैरी अब कैथोलिकों के शहादत के रंग, कत्थई-गाढे भूरे रंग के आस्तीन व मखमली पेटीकोट में थीं। <ref>{{Harvnb|Fraser|1994|p=538}}; {{Harvnb|Guy|2004|p=7}}; {{Harvnb|Weir|2008|p=209}}; {{Harvnb|Wormald|1988|p=187}}</ref><ref>{{cite book|author=जॉन मोरिस|year=1874|url=https://archive.org/details/letterbooksofsir00poulrich|title=''Letter Book of Amias Paulet''|trans-title=एमियास पौलेट के पत्राचार|page=368–369|access-date=4 अगस्त 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150930142232/https://archive.org/details/letterbooksofsir00poulrich|archive-date=30 सितंबर 2015|url-status=live}}</ref>केनेडी ने उनकी आँखों पर पट्टी बाँध दी और स्वर्ण जडित एक सफेद शॉल खाँचे के सामने रखे तकिये पर चढा दिये गये। साँचे पर अपना सिर रखते हुए मैरी ने अपनी भुजाएँ फैलायीं और अपना अंतिम वाक्य कहा कि ''हे भगवान! मैं अपनी आत्मा आपके हाथों में देती हूँ''। ("''In manus tuas, Domine, commendo spiritum meum''")<ref>{{Harvnb|Guy|2004|pp=7–8}}</ref> [[File:Queen Mary death mask copy, Falkland Palace.JPG|thumb|upright|मृत्युदंड के वक्त मैरी को पहनाया गया मुखौटे की एक नकल, [[फॉकलैंड महल]] में रख हई।]] मैरी का सिर एक ही झटके में धड से अलग नहीं हुआ और दूसरे वार में ही जल्लाद उनका सिर अलग कर सका। कटे हुए सिर को उठाते हुए चिल्लाया ''गॉड सेव द क्वीन'' यानी "ईश्वर रानी की रक्षा करें"। इस वक्त मैरी का सिर नीचे गिर गया और जल्लाद के हाथ में [[बाल|विग]] रह गया जो यह बताता है कि अपने अंतिम वर्षों में मैरी के बाल बहुत छोटे और भूरे रंग के थे। <ref>{{Harvnb|Fraser|1994|p=539}}; {{Harvnb|Guy|2004|p=8}}</ref> कहा जाता है कि मैरी का पालतू कुत्ता उनके पास ही खडा था और खून में भीगने के बाद उसने वहाँ से जाने से इंकार कर दिया व अपने मालिक के मृत शरीर के पास हि बैठा रहा। <ref name="Fraser540">{{Harvnb|Fraser|1994|p=540}}; {{Harvnb|Guy|2004|p=9}}</ref>अंतिम समय में मैरी के द्वारा पहने हुए गहनों, कपडों व उनसे सम्बंधित अन्य वस्तुओं जिनपर उनके खून के छींटे पडे थे को ग्रेट हॉल की चिमनी में जला दिया गया ताकि भविष्य में अवशेष खोजी दल उन्हें ढूंढकर उसकी यादगार ना बना सकें। <ref>{{Harvnb|Fraser|1994|p=540}}</ref><ref name="Fraser540" /> === विरासत === [[File:Mary Stuart tomb.jpg|thumb|left|[[वेस्टमिंस्टर एबी]] में मैरी की कब्र [[:en:Cornelius Cure|Cornelius and William Cure]] द्वारा चित्रित]] [[File:Tomb effigy of Mary, Queen of Scots (copy).jpg|thumb|left|वेस्टमिंस्टर में रखे पुतले की नकल, उपर से।]] जब यह सूचना एलिज़ाबेथ के पास पहुँची तो वो बेहद क्रुद्ध हो गयीं और कहा कि डेविडसन ने वारंट दरबारियों को दिखाकर उनके आदेश की अवहेलना की है और दरबारियों (प्राइवी काउंसिल) ने बिना उनकी मर्ज़ी के यह कार्यवाई की है। <ref>{{Harvnb|Fraser|1994|p=541}}</ref> हालाँकि एलिज़ाबेथ की अनिश्चितता, इधर-उधर की बातों व अस्पष्ट निर्देशों से वह मैरी के कत्ल के इल्ज़ाम से कुछ हद तक ही बच पायीं।<ref>{{Harvnb|Guy|2004|p=497}}</ref> डेविसन को गिरफ्तार करे के [[लंदन टावर] में डाल दिया गया। सेसिल व वैलसिंघम ने उसकी पैरवी की व आरोपी ना पाए जाने पर उसे १९ महीनों बाद जेल से आजाद कर दिया गया।<ref>{{cite book|last=हचिन्सन|first=रॉबर्ट|year=2006|title=Elizabeth's Spy Master: Francis Walsingham and the secret war that saved England|url=https://archive.org/details/elizabethsspymas0000hutc_y0y7|publisher=वेडेनफ्लेड व निकोल्सन|location=लंदन|isbn=978-0-297-84613-0|pages=[https://archive.org/details/elizabethsspymas0000hutc_y0y7/page/196 196]–201}}</ref> फ्रांस में दफनाए जाने के मैरी की चाहत को एलिज़ाबेथ ने ठुकरा दिया।<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|p=532}}</ref> उनके शव को [[शव संलेपन|संलेपित]] करके एक सुरक्षित शीशे के कॉफिन में तब तक रखा गया जब जुलाई १५८७ में [[प्रोटेस्टैंट]] रिवाजों के तहत [[पीटरबोरो कैथेड्रल]] में उसका अंतिम संस्कार ना कर दिया गया।<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|pp=542, 546–547}}; {{Harvnb|Weir|2008|p=509}}</ref> संलेपन प्रकिया के तहत निकाली गई उसकी अंतडियों व अंदरूनी हिस्सों को [[फोथरिंघे किला|फोथरिंघे महल]] में चोरी छुपे दफना दिया गया।<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|p=541}}; {{Harvnb|Guy|2004|p=9}}</ref> उनका शरीर १६१२ में उनके पुत्र व इंग्लैंड के नए राजा [[जेम्स ६|जेम्स १]] के आदेश पर खोद कर निकाला गया व वेस्टमिंस्टर ऐबी में [[एलिज़ाबेथ प्रथम]] की कब्र के सामने ससम्मान दफनाया गया। <ref>{{Harvnb|Guy|2004|p=504}}; {{Harvnb|Weir|2008|p=509}}</ref> लगभग ढाई सौ सालों बाद 1867 में उनके मकबरे को इस उम्मीद में दुबारा खोला गया ताकि उनके पुत्र जेम्स प्रथम की कब्र का पता लगाया जा सके जो बाद में हेनरी सप्तम की कब्र के पास मिली। लेकिन उनके तमाम अन्य वंशज जिसमें [[बोहेमिया की एलिज़ाबेथ]] व ऱाइन का राजकुमार रूपर्ट व महारानी [[ऐने, ग्रेट ब्रिटेन की महारानी|ऐने]] के बच्चों की कब्र मैरी के शव-कक्ष (मेहराब) में मिली।<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|p=554}}</ref> Assessments of Mary in the sixteenth century divided between Protestant reformers such as [[George Buchanan]] and [[John Knox]], who vilified her mercilessly, and Catholic apologists such as [[Adam Blackwood]], who praised, defended and eulogised her.<ref>{{Harvnb|Guy|2004|pp=505–506}}; {{Harvnb|Wormald|1988|pp=13–14, 192}}</ref> After the accession of James I in England, historian [[William Camden]] wrote an officially sanctioned biography that drew from original documents. It condemned Buchanan's work as an invention,<ref>{{Harvnb|Guy|2004|p=505}}</ref> and "emphasized Mary's evil fortunes rather than her evil character".<ref>{{Harvnb|Wormald|1988|p=14}}</ref> Differing interpretations persisted into the eighteenth century: [[William Robertson (historian)|William Robertson]] and [[David Hume]] argued that the casket letters were genuine and that Mary was guilty of adultery and murder, while [[William Tytler]] argued the reverse.<ref>{{Harvnb|Wormald|1988|p=15}}</ref> In the later half of the twentieth century, the work of [[Antonia Fraser]] was acclaimed as "more objective ... free from the excesses of adulation or attack" that had characterised older biographies,<ref>{{Harvnb|Wormald|1988|p=16}}</ref> and her contemporaries [[Gordon Donaldson]] and Ian B. Cowan also produced more balanced works.<ref>{{Harvnb|Wormald|1988|pp=17, 192–193}}</ref> Historian [[Jenny Wormald]] concluded that Mary was a tragic failure, who was unable to cope with the demands placed on her,<ref>{{Harvnb|Wormald|1988|pp=188–189}}</ref> but hers was a rare dissenting view in a post-Fraser tradition that Mary was a pawn in the hands of scheming noblemen.<ref>{{Harvnb|Weir|2008|p=4}}</ref> There is no concrete proof of her complicity in Darnley's murder or of a conspiracy with Bothwell. Such accusations rest on assumptions,<ref>{{Harvnb|Fraser|1994|pp=269–270}}; {{Harvnb|Guy|2004|p=313}}: {{Harvnb|Weir|2008|p=510}}</ref> and Buchanan's biography is today discredited as "almost complete fantasy".<ref>{{Harvnb|Guy|2004|p=391}}; see also {{Harvnb|Fraser|1994|p=269}}</ref> Mary's courage at her execution helped establish her popular image as the heroic victim in a dramatic tragedy.<ref>{{Harvnb|Guy|2004|p=502}}; {{Harvnb|Weir|2008|pp=3–4, 509}}</ref> {{clear}}
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