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=== प्रतिरक्षा (Immunity) === मनुष्य शरीर में जब कोई रोगोत्पादक जीवाणुओं का आक्रमण होता है, तो शरीर के अंदर प्रकृति उनका घोरतम प्रतिरोध करती है और इसी युद्ध में शरीर के बली कोष उन बाहरी जीवाणुओं का बल नष्ट करके शरीर को रोग से बचा लेते हैं। शरीर के अंदर से उत्पन्न इसी रोगनाशक शक्ति को प्रतिरक्षा (Immunity) कहते हैं। प्रतिरक्षा दो प्रकार की होती है : :*(1) स्वाभाविक प्रतिरक्षा (Natural Immunity) :*(2) अर्जित प्रतिरक्षा (Acquired Immunity) '''स्वाभाविक प्रतिरक्षा''' - किसी रोग के प्रतिरोध में शरीर के अंदर जो स्वाभाविक शक्ति उत्पन्न होती है उसे स्वाभाविक प्रतिरक्षा (Natural Immunity) कहते हैं। '''अर्जित प्रतिरक्षा''' (Acquired Immunity) - किसी व्यक्ति में किसी विशेष रोग के प्रतिरोध की शक्ति यदि नहीं है और पीछे से स्वयं या किसी अन्य उपायों द्वारा उसमें उस रोग के प्रतिरोध की शक्ति पैदा कर दी जाए, तो उसे अर्जित प्रतिरक्षा कह सकते हैं। उदाहरणार्थ, हैजा, चेचक, मोतीझरा, टिटेनस इत्यादि पैदा करनेवाले कुछ रोगाणु ऐसे छोटे हैं जो एक बार शरीर में प्रवेश करने पर रोग पैदा कर सकते हैं, परंतु थोड़ी मात्रा में प्रविष्ट करने पर रोग के प्रति प्रतिरक्षा शक्ति उत्पन्न करते हैं। इसका कारण यह है कि एक विष अधिक मात्रा में होने से शरीर में व्याधि उत्पन्न करता है, किंतु वही विष अत्यल्प मात्रा में रहने से प्रतिरक्षा पैदा करता है।
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