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=== प्रयोगशाला परीक्षण === डेंगू बुखार का निदान [[सूक्ष्मजैविकी|माइक्रोबायलोजी संबंधी]] प्रयोगशाला परीक्षण द्वारा किया जा सकता है।<ref name=WHOp10/>कुछ भिन्न परीक्षण भी किये जा सकते हैं। कोशिकाओं के कल्चर (या नमूनों में) में एक परीक्षण (वायरस आइसोलेशन) डेंगू वायरस को पृथक करता है। एक अन्य परीक्षण (न्यूक्लिक अम्ल पहचान) वायरस से [[न्यूक्लिक अम्लों]] की पहचान करता है, जिसमें [[पॉलिमरेज शृंखला अभिक्रिया|पॉलीमरेस चेन रिएक्शन]] (PCR) कही जाने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। एक तीसरा परीक्षण (एंटीजन पहचान) वायरस के [[एंटीजन]] की पहचान करता है। एक अन्य परीक्षण रक्त में उन[[प्रतिरक्षी|प्रतिरक्षियों]] की पहचान करता है जो डेंगू वायरस से शरीर को लड़ने की क्षमता देते हैं।<ref name=Guzman10/><ref name=WHOp90>WHO (2009), pp. 90–95.</ref> वायरस आइसोलेशन तथा न्यूक्लिक अम्ल पहचान परीक्षण, एंटीजन पहचान से बेहतर काम के होते हैं। हलांकि इन परीक्षणों की लागत अधिक होती है, इसलिये ये अधिक स्थानों पर उपलब्ध नहीं हैं।<ref name=WHOp90/> जब डेंगू रोग अपने प्रारंभिक चरणों में होता है तो यह सारे परीक्षण नकारात्मक हो सकते हैं (अर्थात ये नहीं दर्शाते है कि व्यक्ति को बीमारी है)<ref name=Peads10/><ref name=Guzman10/> प्रतिरक्षी परीक्षण के अलावा ये प्रयोगशाला परीक्षण केवल बीमारी के गंभीर (आरंभिक) चरण के दौरान डेंगू बुखार के निदान में सहायक हो सकते हैं। हलांकि, प्रतिरक्षी परीक्षण इस बात की पुष्टि कर सकते हैं के व्यक्ति को डेंगू, संक्रमण की बाद की अवस्था का है। शरीर प्रतिरक्षियों का निर्माण करता है जो विशिष्ट रूप से 5 से 7 दिनों बाद डेंगू वायरस से लड़ते हैं।<ref name=Chen/><ref name=Guzman10/><ref name=Gubler10>Gubler (2010), p. 380.</ref>
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