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=== संविधान की सर्वोच्चता === संविधान के उपबंध संघ तथा राज्य सरकारों पर समान रूप से बाध्यकारी होते हैं। केन्द्र तथा राज्य शक्ति विभाजित करने वाले अनुच्छेद निम्न दिए गए हैं: # अनुच्छेद 54,55,73,162,241। # भाग -5 [[सर्वोच्च न्यायालय]], [[उच्च न्यायालय]] राज्य तथा केन्द्र के मध्य वैधानिक संबंध। # अनुच्छेद 7 के अंतर्गत कोई भी सूची। # राज्यो का संसद में प्रतिनिधित्व। # संविधान में संशोधन की शक्ति अनु 368इन सभी अनुच्छेदो में संसद अकेले संशोधन नहीं ला सकती है उसे राज्यों की सहमति भी चाहिए। अन्य अनुच्छेद शक्ति विभाजन से सम्बन्धित नहीं हैं: # लिखित संविधान अनिवार्य रूप से लिखित रूप में होगा क्योंकि उसमें शक्ति विभाजन का स्पष्ट वर्णन आवश्यक है। अतः संघ में लिखित संविधान अवश्य होगा। # '''संविधान की कठोरता''' इसका अर्थ है संविधान संशोधन में राज्य केन्द्र दोनो भाग लेंगे। # '''न्यायालयों की अधिकारिता'''- इसका अर्थ है कि केन्द्र-राज्य कानून की व्याख्या हेतु एक निष्पक्ष तथा स्वतंत्र सत्ता पर निर्भर करेंगे। विधि द्वारा स्थापित: # न्यायालय ही संघ-राज्य शक्तियो के विभाजन का पर्यवेक्षण करेंगे। # न्यायालय संविधान के अंतिम व्याख्याकर्ता होंगे भारत में यह सत्ता सर्वोच्च न्यायालय के पास है। ये पांच शर्ते किसी संविधान को संघात्मक बनाने हेतु अनिवार्य हैं। भारत में ये पांचों लक्षण संविधान में मौजूद हैं अतः यह संघात्मक है। परंतु भारतीय संविधान में कुछ विभेदकारी विशेषताएँ भी हैं:
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