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== लेखन व साहित्य == स्वामी दयानन्द सरस्वती ने कई धार्मिक व सामाजिक पुस्तकें अपनी जीवन काल में लिखीं। प्रारम्भिक पुस्तकें संस्कृत में थीं, किन्तु समय के साथ उन्होंने कई पुस्तकों को आर्यभाषा ([[हिन्दी]]) में भी लिखा, क्योंकि आर्यभाषा की पहुँच [[संस्कृत]] से अधिक थी। हिन्दी को उन्होंने ''''आर्यभाषा'''' का नाम दिया था।<ref>[http://www.pravasiduniya.com/maharshi-dayanand-madhu-sandhu आर्य भाषा के उन्नायक महर्षि दयानन्द] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20161226054521/http://www.pravasiduniya.com/maharshi-dayanand-madhu-sandhu |date=26 दिसंबर 2016 }} – डॉ॰ मधु संधु</ref> उत्तम लेखन के लिए आर्यभाषा का प्रयोग करने वाले स्वामी दयानन्द अग्रणी व प्रारम्भिक व्यक्ति थे। यदि ऋषि दयानन्द सरस्वती के ग्रंथों व विचारों ( यद्यपि ये विचार ऋषि के स्वयं द्वारा निर्मित थे अपितु वेद द्वारा प्रदत्त थे ) पर चला जाये तो राष्ट्र पुनः विश्वगुरु गौरवशाली, वैभवशाली, शक्तिशाली, स्मम्पन्नशाली, सदाचारी और महान बन जाये। स्वामी दयानन्द सरस्वती की मुख्य कृतियाँ निम्नलिखित हैं- {| class="wikitable" |- | * [[सत्यार्थप्रकाश]] * [[ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका]] * ऋग्वेद भाष्य * यजुर्वेद भाष्य * चतुर्वेदविषयसूची | * संस्कारविधि * पंचमहायज्ञविधि * आर्याभिविनय * गोकरुणानिधि * आर्योद्देश्यरत्नमाला | * भ्रान्तिनिवारण * अष्टाध्यायीभाष्य * वेदांगप्रकाश * संस्कृतवाक्यप्रबोध * व्यवहारभानु |} === आर्योद्देश्यरत्नमाला === {{Main|आर्योद्देश्यरत्नमाला}} १८७३ में [[आर्योद्देश्यरत्नमाला]] नामक पुस्तक प्रकाशित हुई जिसमें स्वामी जी ने एक सौ शब्दों की परिभाषा वर्णित की है। इनमें से कई शब्द आम बोलचाल में आते हैं पर उनके अर्थ रूढ हो गए हैं, उदाहरण के लिए ईश्वर धर्म-कर्म आदि। इनको परिभाषित करके इनकी व्याख्या इस पुस्तक में है। इस लघु पुस्तिका में ८ पृष्ठ हैं। === गोकरुणानिधि === {{Main|गोकरुणानिधि}} १८८१ में स्वामी दयानन्द ने [[गोकरुणानिधि]] नामक पुस्तक प्रकाशित की जो कि [[गोरक्षा आन्दोलन]] को स्थापित करने में प्रमुख भूमिका निभाने का श्रेय भी लेती है। इस पुस्तक में उन्होंने सभी समुदाय के लोगों को अपने प्रतिनिधि सहित गोकृष्यादि रक्षा समिति की सदस्यता लेने को कहा है जिसका उद्देश्य पशु व कृषि की रक्षा है। आधुनिक पर्यावरणवादियों के समान यहाँ विचार व्यक्ति किए गए हैं। इस पुस्तक में समीक्षा, नियम व उपनियम हैं, तथा प्रमुखतः पशुओं को न मार कर उनका पालन करने में होने वाले लाभ वर्णित किए गए हैं। === व्यवहारभानु === {{Main|व्यवहारभानु}} वैदिक यन्त्रालय, बनारस द्वारा १८८० में [[व्यवहारभानु]] पुस्तक प्रकाशित की गई थी। इसमें धर्मोक्त और उचित व्यवहार के बारे में वर्णन है। === स्वीकारपत्र === {{Main|स्वीकारपत्र}} २७ फ़रवरी १८८३ को [[उदयपुर]] में स्वामी दयानन्द सरस्वती ने एक [[स्वीकारपत्र]] प्रकाशित किया था जिसमें उन्होंने अपनी मृत्योपरान्त २३ व्यक्तियों को [[परोपकारिणी सभा]] की जिम्मेदारी सौंपी थी जो कि उनके बाद उनका काम आगे बढ़ा सकें। इनमें [[महादेव गोविन्द रानडे]] का भी नाम है<ref>[http://wikisource.org/wiki/स्वीकारपत्र/२ स्वीकारपत्र] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120628030744/http://wikisource.org/wiki/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0/%E0%A5%A8 |date=28 जून 2012 }} पृष्ठ २</ref>। इस स्वीकारपत्र पर १३ गणमान्य व्यक्तियों के साक्षी के रूप में हस्ताक्षर हैं। इसके प्रकाशन के कुछ छः माह पश्चात ही उनका देहान्त हो गया था। === संस्कृतवाक्यप्रबोधः === यह [[संस्कृत]] सिखाने वाली लघु वार्तालाप पुस्तिका है। विभिन्न विषयों पर लघु वाक्य संस्कृत में दिये गये हैं। उनके अर्थ भी [[हिन्दी]] में दिए हैं।
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