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== समुद्री जीवविज्ञान के अध्ययन के तरीके == किसी भी क्षेत्र के समुद्री जीवों की खोज की प्रारंभिक प्रक्रिया वर्णनात्मक होती है। इसमें उस क्षेत्र के पादप तथा प्राणियों की पहचान, उनका आकार तथा उनकी स्थिति आदि का उल्लेख किया जाता है। यह कार्य किसी नए क्षेत्र के लिए अत्यंत कठिन होता है। इसके लिए जीवविज्ञान की भिन्न भिन्न शाखाओं के विशेषज्ञों की आवश्यकता पड़ती है। इन विशेषज्ञों द्वारा प्रकाशित सूचना में प्रत्येक स्पीशीज़ का वर्णन संगृहीत रहता है। ये सूचनाएँ बाद के विश्लेषणात्मक अध्ययन करने वाले खोजकर्ताओं के लिए लाभप्रद होती हैं। जीवों के संग्रह और विश्लेषण करने के तरीके तथा संगृहीत करने के बाद इनका अध्ययन खोजकर्ता के उद्देश्य पर निर्भर करता है। ये उद्देश्य वर्गिकी (Taxonomy), पारिस्थितिकी (Ecology), भ्रूण विज्ञान आदि से संबंधित हो सकते हैं। इन उद्देश्यों के साथ साथ जीवों के प्रकार तथा उनके वातावरण का भी अध्ययन किया जाता है। "चैलेंजर' में डार्विन की प्रसिद्ध खोज यात्रा के बाद से अजैव कारकों के खोज में प्रयुक्त होनेवाले उपस्करों (equipments) तथा प्रक्रियाओं में काफी उन्नति हो गई है। समुद्र में किसी भी गहराई का ताप जानने के लिए प्रतिवर्ती तापमापी का, उपयोग किया जाता है। वैथी तापलेखी (Bathy thermograph) द्वारा समुद्र की सतह से लेकर तल तक के ताप का निरंतर अभिलेख प्राप्त हो जाता है। प्रकाश की तीव्रता प्रकाश-वैद्युत-यंत्र (photoelectric apparatus) से मापी जाती है। रासायनिक प्रक्रिया के अंतर्गत ऑक्सीजन का मानांकन, लवणता तथा अन्य मुख्य पादप पोषक लवणों का अध्ययन किया जाता है। पारिस्थितिक जानकारी के लिए किसी क्षेत्र के एक इकाई अवकाश (unit space) में पाए जानेवाले किसी स्पीशीज़ के व्यष्टियों की संख्या का निर्धारण एवं बाह्य वातावरण से संबंधों का अध्ययन किया जाता है। समुदाय के अन्य पादपों एवं प्राणियों से इनके पोषण संबंध का अध्ययन भी पारिस्थितिकी के अंतर्गत ही आता है। भ्रूण विज्ञान के अध्ययन के लिए जीवित नमूने प्रयोगशाला में लाए जाते हैं, जहाँ इनके जीवनवृत्त की प्रत्येक अवस्थाओं का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। विभिन्न प्रकार के पौधे तथा उनके बीजाणु भी अध्ययन हेतु लाए जाते हैं। अन्य प्रकार के अध्ययन भरी, जैसे परासरणी संतुलन (osmotic balance), ऑक्सीजन की खपत, प्रकाशीय प्रभाव आदि, किए जाते हैं। ज्वारांतर प्रदेश के नितलस्थ संग्रह में साधारण खुदाई करनेवाले उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। गहरे जल में निकर्षण (dredge) करने के लिए शक्तिचालित अथवा पाल नौकाओं का उपयोग किया जाता है। सूक्ष्म पादप प्लवकों को अधिक मात्रा में एकत्रित करने के लिए, रेशम के बने जालों का उपयोग होता है। परंतु गुण विषयक अध्ययन के लिए "जल बोतल' (शीशे का १ ली। क्षमतावाले बेलनाकार बर्तन), जिनको किसी भी ऐच्छिक गहराई पर बंद किया जा सकता है, प्रयुक्त होते हैं। प्राणिप्लवकों का वितरण अनियमित होने के कारण बड़े बड़े जालों का उपयोग किया जाता है। व्यापारिक दृष्टिकोण से मछलियों का पकड़ना एवं उनका अध्ययन भी इसी विज्ञान का एक अंग है। इसके लिए विभिन्न प्रकार के उपकरण परिस्थिति विशेष में प्रयुक्त होते हैं। संसार के प्राय: सभी देशों में विशेष समुद्री जैवकेंद्र स्थापित किए गए है। इनमें से कुछ विश्वविद्यालयों एवं शेष सरकार के अधीन हैं। इन केंद्रों पर बड़ी बड़ी प्रयोगशालाएँ होती हैं, जिनमें भिन्न भिन्न विषयों के विशेषज्ञों द्वारा पादपों तथा प्राणियों के संबंध में शोध किए जाते हैं।
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