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== सैन्य विज्ञान की उपयोगिता== प्राचीन युद्ध सीमित होते थे जिनका सम्बन्ध केवल सेनाओं एवं सेनापतियों तक होता था, आम जनता की युद्धों के प्रति कोई विशेष रुचि नहीं होती थी। जैसे-जैसे सभ्यता का विकास होता गया युद्धों के स्वरूपों में भी परिवर्तन आया और आज युद्ध सम्पूर्ण युद्ध का स्वरूप धारण कर चुका है। आधुनिक युद्ध सम्पूर्ण राष्ट्र की परीक्षा है।[18] सैन्य विज्ञान विषय की उपयोगिता को निम्नानुसार रेखांकित किया जा सकता है- *'''(1) राष्ट्रीय भावना जाग्रत करना ''' - सैन्य विज्ञान के द्वारा देश के प्रति हमारे क्या कर्त्तव्य हैं तथा समाज में रहकर मातृभूमि की रक्षा किस प्रकार करनी चाहिए तथा स्वयं को एक आदर्श सैनिक के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त करते हैं। आज का विद्यार्थी कल का जिम्मेदार नागरिक अथवा सैनिक बनकर सुरक्षा हित के मुद्दों को गहराई से समझ सकता है। *'''(2) कुशल नेतृत्व क्षमता प्रदान करना''' - युद्ध संचालन की पद्धति और प्रक्रिया अब राजनीतिज्ञों का मुख्य विषय बन गया है, क्योंकि सबसे बड़े अस्त्र अर्थात् आणविक हथियारों का नियन्त्रण एवं प्रयोग राजनीतिज्ञों के हाथ में है न कि सेनानायकों के। सैन्य विज्ञान का विद्यार्थी को सैनिक मामलों में पूर्व से पर्याप्त ज्ञान होने के कारण एक कुशल नेतृत्व क्षमता का परिचय दे सकता है। क्योंकि आज कि सबसे बड़ी विडम्बना राजनीतिज्ञों का सैन्य ज्ञान की समझ का अभाव है। *'''(3) सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी प्राप्त करना''' - कैप्टन बी.एन. मालीवाल ने लिखा है कि हम युद्ध को तब तक नियन्त्रित, सीमित अथवा व्यवस्थित नहीं कर सकते, जब तक कि हम युद्ध के स्वभाव और लक्षणों को न समझ सकतें हों। सुरक्षा अथवा युद्ध ऐसा विषय है जिसे सिर्फ सैनिकों के सहारा नहीं छोड़ा जा सकता। देश की उच्चत्तर रक्षा संगठन ढांचे की जानकारी आवश्यक है। *'''(4) राष्ट्रीय मनोबल हेतु''' - आज राष्ट्रीय सुरक्षा एवं राष्ट्रीय मनोबल के संदर्भ में [[इज़राइल|इजराइल]] का उदाहरण दुनिया के सामने है। तीन ओर से शत्रु मुल्कों से घिरे होने के बावजूद इजराइल की आन्तरिक सुरक्षा एवं बाह्य सुरक्षा व्यवस्था दुनिया के सामने मिसाल है। इसका मुख्य कारण सैनिक व्यवस्था के अलावा वहां के नागरिकों में राष्ट्रीय सुरक्षा जागरुकता एवं उच्च मनोबल है। असैन्य मोर्चे पर देश के नागरिको के द्वारा लगातार मिल रहे सहयोग से सेना का मानसिक स्तर भी उच्च रहता है। *'''(5) शान्ति एवं सुरक्षा की स्थापना''' - नक्सलवाद, आतंकवाद, उग्रवाद, भाषावाद, साम्प्रदायिकता, प्रादेशिकता, जन-जातिय विद्रोह जैसे समस्याओं का हल सैनिक माध्यम से नहीं निकाला जा सकता न ही इससे ये सभी समस्यायें समाप्त होने वाली हैं और न ही शान्ति एवं सुरक्षा की स्थापना की जा सकती है। इसके लिए जरूरी है एक विश्वास का वातावरण पैदा करने की। उपर्युक्त समस्याओं की तह तक जाकर मूल कारणों के तार्किक एवं व्यावहारिक उपाय ढूंढने से होगा। सैन्य विज्ञान आन्तरिक व बाह्य सुरक्षा समस्याओं के कारण, प्रभाव एवं उपाय पर विस्तृत प्रकाश डालता है। जिसके वर्तमान संदर्भ में अध्ययन की नितान्त आवश्यकता है। *'''(6) युद्ध के रोकथाम में''' - प्रसिद्ध सैन्य विचारक लिडिल हार्ट ने कहा है कि- यदि शान्ति चाहते हो तो युद्ध को समझो।[19] विश्व में युद्ध के रोकथाम के लिए सबसे आवश्यक है युद्ध के कारण, प्रभाव एवं परिणाम पर गहन चिन्तन, मनन एवं चर्चा करने की। इस विषय के अध्ययन से विश्व विनाश को रोकने में भी सक्रिय सहयोग मिलता है। आज विश्व के पास इतने घातक एवं विनाशक हथियार हैं कि समस्त पृथ्वी को हजारो बार नष्ट किया जा सकता है। *'''(7) शक्ति संतुलन बनाये रखने के लिए''' - युद्ध का एक बड़ा कारण शक्ति शून्यता है। इतिहास हमें बताता है कि निर्बल पर हमेशा शक्तिशाली ने आधिपत्य अथवा राज करने के लिए अत्याचार किया है। सैन्य विज्ञान हमें सिखलाती है कि न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता बनाये रखने के लिए शक्ति संतुलन आवश्यक है। यौद्धिक तैयारी एवं शक्ति संतुलन के लिए ही भारत ने 1998 में परमाणु परीक्षण किया था। *'''(8) असैन्य मोर्चे की तैयारी''' - आधुनिक युद्ध सम्पूर्ण युद्ध होते हैं एवं जिसमें अपरम्परागत युद्ध शैली के अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग किया जा सकता है तथा युद्ध के केन्द्र सैन्य एवं नागरिक ठिकानें दोनों हो सकते है। रणक्षेत्र में मोर्चा सम्हाल रहे सैनिकों के लिए सम्भव नहीं कि इतनी बड़ी आबादी की हर जगह मदद की जा सके। अतः नागरिक सुरक्षा के उपायों की विस्तृत जानकारी सैन्य विज्ञान के माध्यम से लिया जा सकता है। *'''(9) यौद्धिक आवश्यकता की पूर्ति''' - आधुनिक युद्ध अत्यन्त महंगे एवं खर्चीले हो गये हैं। 52 दिनों तक चले [[करगिल संघर्ष]] में भारत 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किया। किसी भी राज्य के लिए युद्ध की वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति करना बेहद कठिन कार्य है। इसलिए सरकार युद्धकाल में दान या चंदे, ऋण जैसी सहायता जनता से लेती है। सैन्य विज्ञान युद्ध पर सम्पूर्ण प्रकाश डालता है एवं विद्यार्थी को इसकी गहरी समझ प्रदान कर जिम्मेदार नागरिक बना सकता हैं।
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