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== साहित्य रचना == बिस्मिल एक लेखक थे और उन्होंने कई कविताएँ, ग़ज़लें एवं पुस्तकें लिखी थीं। कुछ प्रमुख कविताओं व ग़ज़लों के बारे में नीचे दिया जा रहा है। === कविताएँ एवं ग़ज़लें === * '''[[सरफरोशी की तमन्ना]]''': बिस्मिल की यह गज़ल क्रान्तिकारी जेल से पुलिस की लारी में अदालत में जाते हुए, अदालत में मजिस्ट्रेट को चिढ़ाते हुए व अदालत से लौटकर वापस जेल आते हुए कोरस के रूप में गाया करते थे। बिस्मिल के बलिदान के बाद तो यह रचना सभी क्रान्तिकारियों का मन्त्र बन गयी<ref name="आशारानी">{{cite book |last1=आशारानी |first1=व्होरा |authorlink1= |last2= |first2= |editor1-first= |editor1-last= |editor1-link= |others= |title=स्वाधीनता सेनानी लेखक पत्रकार |url=http://www.worldcat.org/title/swadhinata-senani-lekhaka-ptrakara/oclc/57285032&referer=brief_results |format= |accessdate=14 मई 2014 |edition=1 |series= |volume= |date= |year=२००४ |month= |origyear= |publisher=[[प्रतिभा प्रतिष्ठान]] |location=[[नई दिल्ली]] |isbn=9788188266234 |oclc=57285032 |doi= |id= |page=18 |pages=260 |chapter= |chapterurl= |quote= |ref= |bibcode= |laysummary= |laydate= |separator= |postscript= |lastauthoramp= |archive-url=https://web.archive.org/web/20140306221722/http://www.worldcat.org/title/swadhinata-senani-lekhaka-ptrakara/oclc/57285032%26referer%3Dbrief_results |archive-date=6 मार्च 2014 |url-status=live }}</ref>। * '''जज्वये-शहीद''' (बिस्मिल का मशहूर उर्दू [[मुखम्मस]]): बिस्मिल का यह यह [[उर्दू]] मुखम्मस भी उन दिनों सर्वाधिक लोकप्रिय हुआ करता था यह उनकी अद्भुत रचना है यह इतनी अधिक भावपूर्ण है कि लाहौर कान्स्पिरेसी केस के समय जब '''प्रेमदत्त''' नाम के एक कैदी ने अदालत में गाकर सुनायी थी तो श्रोता रो पड़े थे<ref>खलीक अंजुम मुज्तबा हुसैन ''जब्तशुदा नज्में'' पृष्ठ-१८ नूरनबी अब्बासी ''जब्तशुदा नज्में'' पृष्ठ-२९</ref>। जज अपना फैसला तत्काल बदलने को मजबूर हो गया और उसने प्रेमदत्त की सजा उसी समय कम कर दी थी। अदालत में घटित इस घटना का उदाहरण भी [[इतिहास]] में दर्ज़ हो गया। * '''जिन्दगी का राज''' (बिस्मिल की एक अन्य उर्दू गजल): बिस्मिल की इस गजल में जीवन का वास्तविक दर्शन निहित है शायद इसीलिये उन्होंने इसका नाम ''राजे मुज्मिर'' या ''जिन्दगी का राज मुजमिर''<ref>खलीक अंजुम मुज्तबा हुसैन ''जब्तशुदा नज्में'' पृष्ठ-१४ नूरनबी अब्बासी ''जब्तशुदा नज्में'' पृष्ठ-२५</ref> (कहीं-कहीं यह भी मिलता है) दिया था। वास्तव में अपने लिये जीने वाले मरने के बाद विस्मृत हो जाते हैं पर दूसरों के लिये जीने वाले हमेशा के लिये अमर हो जाते हैं। * '''बिस्मिल की तड़प''' (बिस्मिल की अन्तिम रचना<ref>[[मन्मथनाथ गुप्त]] ''भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन का इतिहास'' पृष्ठ २१५</ref>): [[गोरखपुर]] जेल से चोरी छुपे बाहर भिजवायी गयी इस गजल में प्रतीकों के माध्यम से अपने साथियों को यह सन्देशा भेजा था कि अगर कुछ कर सकते हो तो जल्द कर लो वरना पछतावे के अलावा कुछ भी हाथ न आयेगा। बिस्मिल की आत्मकथा के अनुसार इस बात का उन्हें मलाल ही रह गया कि उनकी पार्टी का कोई एक भी नवयुवक उनके पास उनका रिवाल्वर तक न पहुँचा सका। उनके अपने वतन [[शाहजहाँपुर]] के लोग भी इसमें भागदौड़ के अलावा कुछ न कर पाये। बाद में इतिहासकारों ने न जाने क्या-क्या मन गढन्त लिख दिया। वर्ष १९८५ में [[विज्ञान भवन, नई दिल्ली]] में आयोजित '''भारत और विश्व साहित्य पर अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी''' में एक भारतीय प्रतिनिधि<ref>{{cite book|author=डा. एके मौर्या|title= International Symposium On India & World Literature|year=1985|publisher=आधुनिक यूरोपीय भाष विभाग, [[दिल्लि विश्वविद्यालय]]|Page=81}} </ref> ने अपने लेख के साथ पण्डित रामप्रसाद बिस्मिल की कुछ लोकप्रिय कविताओं का द्विभाषिक काव्य रूपान्तर (हिन्दी-अंग्रेजी में) प्रस्तुत किया था जिसे उनकी पुस्तक<ref>{{cite book |last1=मदनलाल वर्मा |first1='क्रान्त' |authorlink1= |last2= |first2= |editor1-first= |editor1-last= |editor1-link= |others= |title=सरफ़रोशी की तमन्ना (रामप्रसाद बिस्मिल: व्यक्तित्व और कृतित्व) |url=http://www.worldcat.org/title/sarapharosi-ki-tamanna/oclc/222570896&referer=brief_results |format= |accessdate= |edition=2 |series= |volume= |date= |year=1998 |month= |origyear= |publisher=[[प्रवीण प्रकाशन]] |location=[[नई दिल्ली]] |isbn= |oclc=222570896 |doi= |id= |page=१६७ से १६९ तक |pages= |chapter= |chapterurl= |quote= |ref= |bibcode= |laysummary= |laydate= |separator= |postscript= |lastauthoramp= |archive-url=https://web.archive.org/web/20160404130547/http://www.worldcat.org/title/sarapharosi-ki-tamanna/oclc/222570896%26referer%3Dbrief_results |archive-date=4 अप्रैल 2016 |url-status=live }}</ref> से साभार उद्धृत करके अंग्रेजी विकीस्रोत पर दे दिया गया<ref>{{Cite web |url=https://en.wikisource.org/wiki/Pt._Ram_Prasad_%27Bismil%27-A_warrior_of_Pen_%26_Pistol |title=कलम और पिस्तौल का सिपाही: रामप्रसाद बिस्मिल |access-date=2 मार्च 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140302104625/https://en.wikisource.org/wiki/Pt._Ram_Prasad_%27Bismil%27-A_warrior_of_Pen_%26_Pistol |archive-date=2 मार्च 2014 |url-status=live }}</ref> है ताकि हिन्दी के पाठक भी उन रचनाओं का आनन्द ले सकें। === पुस्तकें === रामप्रसाद 'बिस्मिल' की जिन पुस्तकों का विवरण मिलता है, उनके नाम इस प्रकार हैं:<ref>''स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास (भाग-दो)'' पृष्ठ-५२३ से ५३२</ref> # ''मैनपुरी षड्यन्त्र'', # ''स्वदेशी रंग'', # ''चीनी-षड्यन्त्र (चीन की राजक्रान्ति)'', # ''तपोनिष्ठ अरविन्द घोष की कारावास कहानी''<ref>{{cite book|author=[[मदनलाल वर्मा 'क्रान्त']]|publisher:अनुराग प्रकाशन|place=23, अंसारी रोड, दरियागंज, नई दिल्ली|volume=1|year=[[2014]]|ISBN=978-81-87779-94-0}}</ref> # ''अशफ़ाक की याद में'', # ''सोनाखान के अमर शहीद-'वीरनारायण सिंह''', # ''जनरल जार्ज वाशिंगटन'' # ''अमरीका कैसे स्वाधीन हुआ?'' === आत्मकथा === <!--गैर मुक्त चित्र, कॉपीराइट नहीं। [[चित्र:Bismil's dead body in a Bengla book (1930).jpg|thumb|right|200px|पिता मुरलीधर की गोद में बिस्मिल का शव (सन् १९३० में प्रकाशित पुस्तक से)]]--> बिस्मिल की आत्मकथा को हिन्दी में '''काकोरी षड्यन्त्र''' नामक एक पुस्तक के अन्दर '''निज जीवन की एक छटा''' के नाम से भजनलाल बुकसेलर ने आर्ट प्रेस सिन्ध (अब [[पाकिस्तान]]) से और '''काकोरी के शहीद''' शीर्षक से गणेश शंकर विद्यार्थी ने प्रताप प्रेस, [[कानपुर]] से छापा था। सुपरिंटेंडेंट गवर्नमेंट प्रेस [[इलाहाबाद]] से किन्हीं भीष्म के छद्मनाम नाम से अनूदित होकर यही पुस्तक सन् १९२९ में अंग्रेजी में भी छपी थी। [[ब्रिटिश राज]] के दौरान संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध के खुफिया विभाग ने यह पुस्तक प्रत्येक जिले के पुलिस अधिकारियों को भिजवायी थी।<ref name="Bhishma">{{cite book |url=http://www.worldcat.org/title/kakori-ke-shahid-martyrs-of-the-kakori-conspiracy-case/oclc/863324363&referer=brief_results |title=Kakori-ke-shahid : martyrs of the Kakori conspiracy case |first=(pseud) |last=भीष्म |pages=125 |publisher=सरकारी प्रेस, संयुक्त प्राँत, इलाहाबाद |year=[[1929]] |accessdate=7 मार्च 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140307110221/http://www.worldcat.org/title/kakori-ke-shahid-martyrs-of-the-kakori-conspiracy-case/oclc/863324363%26referer%3Dbrief_results |archive-date=7 मार्च 2014 |url-status=live }}</ref> हिन्दी-अंग्रेजी के अलावा: * '''काकोरी षड्यन्त्र''' शीर्षक से [[बांग्ला]] में<ref name="Perti">{{cite book |url= |title= Patriotic Writings Banned by the Raj| language = en|first= राजेश|last=पेर्ती|page=8-125 |publisher=भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार|place=[[नई दिल्ली]]|year=1984|accessdate=7 मार्च 2014}} </ref> * '''अमर क्रान्तिकारी: रामप्रसाद बिस्मिल''' के नाम से [[संस्कृत]] में<ref name="Śarmā">{{cite book |url=http://www.worldcat.org/title/amarakrantikari-pam-ramaprasada-bismilah/oclc/48619328&referer=brief_results |title=Amarakrāntikārī Paṃ. Rāmaprasāda "Bismilaḥ" |language=sa |first=केशवराम |last=शर्मा |pages=56 |publisher=शक्ति प्रकाशन, दिल्ली |year=2001 |accessdate=7 मार्च 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140307110344/http://www.worldcat.org/title/amarakrantikari-pam-ramaprasada-bismilah/oclc/48619328%26referer%3Dbrief_results |archive-date=7 मार्च 2014 |url-status=live }}</ref> * '''आतमकथा रामप्रसाद बिस्मिल''' के शीर्षक से [[पंजाबी]] में<ref name="Rāhī">{{cite book |url=http://www.worldcat.org/title/atamakatha-ramaprasada-bisamila/oclc/466166417&referer=brief_results |title=Ātamakathā : Rāmaprasāda Bisamila |language=pa |first=प्रीतम सिंह |last=राही |page=104 |publisher=Bishana Canda |place=दिल्ली |year=2009 |accessdate=7 मार्च 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140307110317/http://www.worldcat.org/title/atamakatha-ramaprasada-bisamila/oclc/466166417%26referer%3Dbrief_results |archive-date=7 मार्च 2014 |url-status=live }}</ref> * '''रामप्रसाद बिस्मिल''' के नाम से [[गुजराती]] में<ref name="Śeṭh">{{cite book |url=http://www.worldcat.org/search?q=su%3ABismila%2C+Ra%CC%84maprasa%CC%84da%2C+1897-1927.&dblist=638&fq=ln%3Aguj&qt=facet_ln%3A |title= Rāmaprasāda Bismila|language = gu|first= धरना|last=सेठ|pages=125 |publisher= Āra. Āra. Śeṭhanī Kampanī|place=मुम्बई|year=2006|accessdate=7 मार्च 2014}} </ref> * '''बिस्मिल आत्मकथा''' शीर्षक से [[तेलुगू]] में<ref name="Śarma">{{cite book|url=http://www.worldcat.org/title/bismil-atmakatha/oclc/74683071&referer=brief_results|title=Bismil ātmakatha|language=te|first=मल्लिकार्जुन|last=शर्मा|page=|pages=156|publisher=Mārksisṭu Adhyayana Vēdika|place=हैदराबाद|year=1989|accessdate=7 मार्च 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140307124030/http://www.worldcat.org/title/bismil-atmakatha/oclc/74683071%26referer%3Dbrief_results|archive-date=7 मार्च 2014|url-status=live}}</ref> *'''रामपुर्सादो बिसुमूरा जिदेन''' के नाम से [[जापानी भाषा]]<ref name=" Koga">{{cite book|url=http://www.worldcat.org/title/ramupurasado-bisumiru-jiden/oclc/675857698&referer=brief_results|title=ラームプラサード・ビスミル自伝 / Ramupurasado bisumiru jiden|language=ja|first=कात्सुरो|last=कोगा|page=|pages=94|publisher=कोगा कात्सुरो, 古賀勝郎|year=|accessdate=7 मार्च 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140307111935/http://www.worldcat.org/title/ramupurasado-bisumiru-jiden/oclc/675857698%26referer%3Dbrief_results|archive-date=7 मार्च 2014|url-status=live}}</ref> कुल आठ भाषाओं में इसका [[अनुवाद]] प्रकाशित हो चुका है।<ref>[http://www.worldcat.org/search?q=su%3ABismila%2C+Ra%CC%84maprasa%CC%84da%2C+1897-1927.&fq=&dblist=638&fc=ln:_25&qt=show_more_ln%3A&cookie विश्व पुस्तक सूचीपत्र (वर्ल्डकैट) में राम प्रसाद 'बिस्मिल' की पुस्तकों की सूची], accessdate=7 मार्च 2014</ref> क्रान्तिकारियों के जीवन के ऊपर सर्वाधिक ग्रन्थ लिखने वाले हिन्दी साहित्यकार [[श्रीकृष्ण सरल]] ने अपने ग्रन्थ क्रान्तिकारी कोश में बिस्मिल की आत्मकथा को नवयुवकों के लिये एक आदर्श मार्गनिर्देशिका बतलाया है। इसमें उनके एकादश वर्षीय क्रान्तिकारी जीवन का निचोड़ दिया गया है। इसे आद्योपान्त पढ़ने के बाद कैसा भी नवयुवक हो, व्यवस्था-परिवर्तन अथवा [[क्रांति|क्रान्ति]] के लिये हिंसा का मार्ग अपना ही नहीं सकता।<ref name="श्रीकृष्ण सरल" />
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