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== भारतीय दर्शन के प्रमुख ग्रन्थ == === [[न्याय दर्शन|न्यायदर्शन]] === : न्यायसूत्र - गौतम : न्यायभाष्य - वात्स्यायन : न्यायवार्तिक - [[उद्योतकर]] द्वारा न्यायभाष्य पर टीका : न्यायवार्तिकतात्पर्यटीका - [[वाचस्पति मिश्र]] द्वारा न्यायवार्तिक के ऊपर टीका : न्यायसूचीनिबन्ध - वाचस्पति मिश्र : न्यायसूत्रधार - वाचस्पति मिश्र : न्यायतात्पर्यपरिशुद्धि - [[उदयन]] द्वारा न्यायवार्तिकतात्पर्यटीका की टीका (984 ई) : न्यायकुसुमांजलि - 'आस्तिक' न्याय का प्रथम व्यवस्थित ग्रन्थ : आत्मतत्त्वविवेक, किरणावली, न्यायपरिशिष्ट - उदयन : न्यायमंजरी - जयन्त भट्ट (१०वीं शताब्दी) : तार्किकरक्षा - वरदराज (१२वीं शताब्दी) : तर्कभाषा - केशव मिश्र (१३वीं शताब्दी) ====[[नव्य न्याय|नव्यन्याय]]==== :: [[तत्त्वचिन्तामणि|तत्त्वचिंतामणि]] - [[गंगेश उपाध्याय|गंगेशोपाध्याय]] (12वीं शताब्दी) - नव्यन्याय का प्रथम प्रमुख ग्रन्थ है। :: न्यायनिबन्धप्रकाश - गंगेश उपाध्याय के पुत्र वर्धमान उपाध्याय द्वारा रचित (१२२५ ई)। यद्यपि यह न्यायतात्पर्यपरिशुद्धि की टीका है, किन्तु इसमें उनके पिता गंगेश उपाध्याय के विचारों का समावेश है। :: आलोक - जयदेव (१३वीं शताब्दी, तत्त्वचिन्तामणि की टीका) :: तत्त्वचिन्तामणिव्याख्या - वासुदेव सार्वभौम (१६वीं शताब्दी , नवद्वीप के नव्यन्याय सम्प्रदाय की प्रथम श्रेष्ठ कृति) :: तत्त्वचिन्तामणिदीधिति, पदार्थखण्डन - रघुनाथ शिरोमणि (नवद्वीप के नव्यन्याय सम्प्रदाय की दूसरी महत्वपूर्ण कृतियाँ) :: न्यायसूत्रवृत्ति - विश्वनाथ (१७वीं शताब्दी) :: तर्कसंग्रह दीपिका - अन्नंभट्ट (१७वीं शताब्दी, इनमें प्राचीन न्याय एवं [[नव्य न्याय|नव्यन्याय]] तथा वैशेषिक दर्शनों का समिश्रण है।) === [[वैशेषिक दर्शन]] === : वैशेषिकसूत्र - [[कणाद]] -- वैशेषिक दर्शन का प्राचीनतम ग्रन्थ : रावणभाष्य और भारद्वाजवृत्ति - वैशेषिकसूत्र की दो टीकाएं, अनुपलब्ध : पदार्थधर्मसंग्रह - प्रशस्तपाद (४थी शताब्दी ; यद्यपि इसे प्रायः वैशेषिकसूत्र का भाष्य समझा जाता है किन्तु यह एक स्वतन्त्र ग्रन्थ है।) : दशपदार्थशास्त्र - चन्द्र (६४८ ई ; पदार्थधर्मसंग्रह पर आधारित, सम्प्रति इसका केवल चीनी अनुवाद ही उपलब्ध है।) : व्योमवती - व्योमशिव (८वीं शताब्दी ; पदार्थधर्मसंग्रह की सबसे प्राचीन उपलब्ध टीका) : न्यायकन्दली - श्रीधर (९९१ ई) -- पदार्थधर्मसंग्रह की टीका : किरणावली - उदयन (१०वीं शताब्दी) -- पदार्थधर्मसंग्रह की टीका : लीलावती - श्रीवत्स (११वीं शताब्दी) -- पदार्थधर्मसंग्रह की टीका : सप्तपदार्थी - शिवादित्य (११वीं शताब्दी) -- इसमें न्याय और वैशेषिक को एक ही सिद्धान्त के अंग के रूप में प्रस्तुत किया गया है। === [[सांख्य दर्शन]] === : सांख्य-प्रवचन-सूत्र या सांख्यसूत्र ( १३वीं-१४वीं शताब्दी ; अपने वर्तमान रूप में यह कपिल का मूल ग्रन्थ नहीं है) : सांख्यकारिका - ईश्वरकृष्ण (ई. तृतीय शताब्दी) : तत्व समास - : तत्वकौमुदी - वाचस्पति मिश्र (भाष्यग्रन्थ) : सांख्यप्रवचनभाष्य - विज्ञानभिक्षु (१६वीं शताब्दी ; भाष्यग्रन्थ) : मठरावृत्ति - मठराचार्य (भाष्यग्रन्थ) === [[योग दर्शन|योगदर्शन]] === : [[पतञ्जलि योगसूत्र|योगसूत्र]] - [[पतञ्जलि|पतंजलि]] ::योगभाष्य - परम्परानुसार [[वेद व्यास]] इसके रचयिता माने जाते हैं। इसका रचना-काल 200-400 ईसा पूर्व का माना जाता है। ::विवरण - इसके रचयिता कोई 'शंकर' हैं। यह सम्भवतः आदि शंकर से अलग हैं। :: तत्त्ववैशारदी - योगसूत्र के योगभाष्य के प्रामाणिक व्याख्याकार के रूप में [[वाचस्पति मिश्र]] का 'तत्त्ववैशारदी' प्रमुख ग्रंथ माना जाता है। वाचस्पति मिश्र ने योगसूत्र एवं व्यास भाष्य दोनों पर ही अपनी व्याख्या दी है। तत्त्ववैशारदी का रचना काल 841 ईसा पश्चात माना जाता है। :: भोजवृत्ति - '[[परमार भोज|धारेश्वर भोज]]' के नाम से प्रसिद्ध व्यक्ति ने योगसूत्र पर जो 'भोजवृत्ति' नामक ग्रंथ लिखा है वह योगविद्वजनों के बीच समादरणीय एवं प्रसिद्ध माना जाता है। भोज के राज्य का समय 1075-1110 विक्रम संवत माना जाता है। कुछ इतिहासकार इसे 16वीं सदी का ग्रंथ मानते हैं। :: योगवार्तिक - योगसूत्र पर महत्वपूर्ण व्याख्या [[विज्ञानभिक्षु]] की प्राप्त होती है जिसका नाम ‘योगवार्तिक’ है। विज्ञानभिक्षु का समय विद्वानों के द्वारा 16वीं शताब्दी के मध्य में माना जाता है। :: योगमणिप्रभा - रमानन्द सरस्वती (१६वीं शताब्दी) === मीमांसा दर्शन === : [[मीमांसासूत्र]] - महर्षि जैमिनि :: शाबरभाष्य - शबर स्वामी :: कातंत्रवार्तिक - [[कुमारिल भट्ट]] :: श्लोकवार्तिक - कुमारिल भट्ट :: जैमिनीयन्यायमालाविस्तार -माधवाचार्य === वेदान्त दर्शन === : ब्रह्मसूत्र - [[वेदव्यास|महर्षि व्यास]] द्वारा रचित इस दर्शन का मूल ग्रन्थ है। === जैन दर्शन === : [[आगम (जैन)|जैनागम]] - [[महावीर|महावीर स्वामी]] के उपदेश 45 सूत्रों में संकलित हैं, जो जैनागमों में मिलते हैं। : तत्वार्थाधिगम सूत्र - उमास्वाति (300 ई. ; जैन दर्शन का प्राचीन और प्रामाणिक शास्त्र है।) === बौद्ध दर्शन === : [[त्रिपिटक]] (सुत्त पिटक, विनय पिटक और अभिधम्म पिटक) - [[गौतम बुद्ध|बुद्ध]] के [[उपदेश]] तीन पिटकों में संकलित हैं। ये पिटक [[बौद्ध धर्म]] के आगम हैं। : [[अभिधर्मकोश]] - [[वसुबन्धु|बसुबन्धु]] : [[अष्टसाहस्रिका प्रज्ञापारमिता|प्रज्ञापारमितासूत्र]] - : लंकावतारसूत्र -
सारांश:
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