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=== भूतपूर्व अभियान === {| class="wikitable" style="float: right; margin-right: 0; margin-left: 1em;" |+ मंगल अभियान के प्रयास |- ! दशक ! |- | १९६० वां | [[१९६० के दशक में मंगल अभियान|—————————————]] १३ |- | १९७० वां | [[१९७० के दशक में मंगल अभियान|———————————]] ११ |- | १९८० वां | [[१९८० के दशक में मंगल अभियान|——]] २ |- | १९९० वां | [[१९९० के दशक में मंगल अभियान|————————]] ८ |- | २००० वां | [[२००० के दशक में मंगल अभियान|————————]] ८ |- | २०१० वां | [[२०१० के दशक में मंगल अभियान|——]] २ |} [[चित्र:1972 CPA 4114.jpg|thumb|left|सोवियत डाक टिकट पर मार्स ३ लैंडर .]] मंगल ग्रह की पहली सफल उड़ान १४-१५ जुलाई १९६५ को नासा द्वारा भेजी गई [[मेरिनर ४]] थी। १४ नवम्बर १९७१ को [[मेरिनर ९]], पहला अंतरिक्ष यान बना जिसने किसी अन्य ग्रह की परिक्रमा के लिए मंगल के चारों ओर की कक्षा में प्रवेश किया।<ref name=nasa_mariner9/> दो [[सोवियत संघ|सोवियत]] यान, २७ नवम्बर १९७१ को [[मार्स २]] और ३ दिसम्बर को [[मार्स ३]], सतह पर सफलतापूर्वक कदम रखने वाली पहली वस्तुएं थी, परन्तु उतरने के चंद सेकंडों के भीतर ही दोनों का संचार बंद हो गया। १९७५ में नासा ने [[वाइकिंग कार्यक्रम]] की शुरूआत की, जिसमें दो कक्षीय यान शामिल थे, प्रत्येक में एक एक लैंडर थे और दोनों लैंडर १९७६ में सफलतापूर्वक नीचे उतरे थे। [[वाइकिंग १]] छः वर्ष के लिए और [[वाइकिंग २]] तीन वर्ष के लिए परिचालक बने रहे। वाइकिंग लैंडरों ने मंगल के जीवंत परिदृश्य प्रसारित किये,<ref name=other_missions/> और इस यान ने सतह को इतनी अच्छी तरह से प्रतिचित्रित किया है कि यह छवियाँ प्रयोग में बनी रहती है। मंगल और उसके चंद्रमाओं के अध्ययन के लिए १९८८ में सोवियत यान [[फ़ोबस १ और २]] मंगल को भेजे गए। फ़ोबस १ ने मंगल के रास्ते पर ही संपर्क खो दिया। जबकि फ़ोबस २ ने सफलतापूर्वक मंगल और फ़ोबस की तस्वीरें खिंची, विफल होने के ठीक पहले इसे फ़ोबस की धरती पर दो लैंडर छोड़ने के लिए तैयार किया गया था।<ref name=nature341/> मंगल की ओर रवाना सभी अंतरिक्ष यानों के लगभग दो-तिहाई, अभियान पूरा होने या यहाँ तक कि अपने अभियान के शुरुआत के पहले ही किसी ना किसी तरीके से विफल हो गए। अभियान विफलता के लिए आमतौर पर तकनीकी समस्याओं को जिम्मेदार माना जाता है और योजनाकार प्रौद्योगिकी और अभियान लक्ष्यों का संतुलन करते है।<ref name=dinerman04/> १९९५ के बाद से विफलताओं में शामिल है : [[मार्स ९६]] (१९९६), [[मार्स क्लाइमेट ऑर्बिटर]] (१९९९), [[मार्स पोलार लैंडर]] (१९९९), [[डीप स्पेस २]] (१९९९), [[नोजोमी]] (२००३) और [[फोबोस-ग्रंट]] (२०११)। [[मार्स ऑब्सर्वर]] यान की १९९२ की विफलता के बाद, १९९७ में नासा के [[मार्स ग्लोबल सर्वेयर]] ने मंगल ग्रह की कक्षा हासिल की। यह अभियान एक पूर्ण सफलता थी, २००१ के शुरू में इसने अपना प्राथमिक मानचित्रण मिशन समाप्त कर दिया। अपने तीसरे विस्तारित कार्यक्रम के दौरान नवंबर २००६ में इस यान के साथ संपर्क टूट गया, इसने अंतरिक्ष में ठीक १० परिचालन वर्ष खर्च किये। नासा का [[मार्स पाथफाइंडर]], एक रोबोटिक अन्वेषण वाहन सोजौर्नर ले गया, १९९७ की गर्मियों में यह मंगल पर [[एरेस वालिस]] में उतरा और अनेक छवियाँ वापस लाया।<ref name=cnn_mgs/> {{Multiple image|direction=vertical|align=right|image1=MER Spirit Lander Pan Sol16-A18R1 br2.jpg|image2=PhoenixSolarPanelandRoboticArm.png|width=200|caption1=मंगल पर स्पिरिट लैंडर,२००४|caption2= फोनिक्स लैंडर से नजारा,२००८ }} नासा का [[फ़ीनिक्स (अंतरिक्ष यान)|फीनिक्स]] मार्स लैंडर मंगल के उत्तर ध्रुवीय क्षेत्र पर २५ मई २००८ को पहुंचा।<ref name=ua_phoenix/> मंगल की मिटटी में खुदाई के लिए इसकी रोबोटिक भुजा का इस्तेमाल किया गया था और २० जून को जल बर्फ की उपस्थिति की पुष्टि की गई।<ref name=phoenix_water/><ref name=uanews_frozen_water/><ref name=uanews_frozen_water/> संपर्क टूटने के पश्चात १० नवम्बर २००८ को इस अभियान का निष्कर्ष निकाला गया।<ref name="BBC_NASA_Mission_Declared_Dead" /> [[डान अंतरिक्ष यान]] ने अपने पथ पर [[वॅस्टा (क्षुद्रग्रह)|वेस्टा]] और फिर [[सीरीस (बौना ग्रह)|सेरेस]] की छानबीन के लिए, गुरुत्वाकर्षण की सहायता से फरवरी २००९ में मंगल के लिए उड़ान भरी।<ref name=agle090212/>
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