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=== पुराणों से === एक कथा के अनुसार राजा [[प्रियवद]] को कोई संतान नहीं थी, तब महर्षि [[कश्यप]] ने [[पुत्रेष्टि यज्ञ]] कराकर उनकी पत्नी [[मालिनी]] को यज्ञाहुति के लिए बनायी गयी खीर दी। इसके प्रभाव से उन्हें पुत्र हुआ परन्तु वह मृत पैदा हुआ। प्रियवद पुत्र को लेकर श्मशान गये और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे। उसी वक्त ब्रह्माजी की मानस कन्या [[देवसेना]] प्रकट हुई और कहा कि सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न होने के कारण मैं षष्ठी कहलाती हूँ। हे! राजन् आप मेरी पूजा करें तथा लोगों को भी पूजा के प्रति प्रेरित करें। राजा ने पुत्र इच्छा से देवी षष्ठी का व्रत किया और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। यह पूजा [[कार्तिक शुक्ल षष्ठी]] को हुई थी।
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