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== नाम घोषणा == === शिक्षण एवं प्रेरणा === यह एक मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि मनुष्य को जिस तरह के नाम से पुकारा जाता है, उसे उसी प्रकार की छोटी सी अनुभूति होती रहती है। यदि किसी को कूड़ेमल, घूरेमल, नकछिद्दा, नत्थो, घसीटा आदि नामों से पुकारा जायेगा, तो उसमें हीनता के भाव ही जायेंगे। नाम सार्थक बनाने की कई हलकी, अभिलाषाएँ मन में जगती रहती है। पुकारने वाले भी किसी के नाम के अनुरूप उसके व्यक्तित्व की हल्की या भारी कल्पना करते हैं। इसलिए नाम का अपना महत्त्व है। उसे सुन्दर ही चुना और रखा जाए। बालक का नाम रखते समय निम्न बातों का ध्यान रखें। # गुणवाचक नाम रखे जाएँ, जैसे- सुन्दरलाल, सत्यप्रकाश, धर्मवीर, मृत्युंजय, विजयकुमार, तेजसिंह, शूरसिंह, विद्याभूषण, ज्ञानप्रकाश, विद्याराम आदि। इसी प्रकार बालिकाओं के नाम-दया, क्षमा, प्रभा, करुणा, प्रेमवती, सुशीला, माया, शान्ति, सत्यवती, प्रतिभा, विद्या आदि। # महापुरुषों एवं देवताओं के नाम भी बच्चों के नाम रखे जा सकते हैं। जैसे-रामअवतार, कृष्णचन्द्र, शिवकुमार, गणेश, सवितानन्दन, विष्णुप्रसाद, लक्ष्मण, भरत, याज्ञवल्क्य, पाराशर, सुभाष, रवीन्द्र, बुद्ध, महावीर, हरिश्चन्द्र, दधीच्ा आदि। लड़कियों के नाम- कौशल्या, सुमित्रा, देवकी, पार्वती, दमयन्ती, पद्मावती, लक्ष्मी, कमला, सरस्वती, सावित्री, गायत्री, मदालसा, सीता, उर्मिला, अनसूया आदि। # प्राकृतिक विभूतियों के नाम पर भी बच्चों के नाम रखे जा सकते हैं। जैसे- रजनीकान्त, अरुणकुमार, रतनाकर, हिमाचल, घनश्याम, वसन्त, हेमन्त, कमल, गुलाब, चन्दन, पराग आदि। लड़कियों के नाम-उषा, रजनी, सरिता, मधु, गंगा, यमुना, त्रिवेणी, वसुन्धरा, सुषमा आदि। लड़की और लड़कों के नामों की एक बड़ी लिस्ट बनाई जा सकती है। उसी में से छाँटकर लड़के और लड़कियों के उत्साहवर्धक, सौम्य एवं प्रेरणाप्रद नाम रखने चाहिए। समय-समय पर बालकों को यह बोध भी कराते रहना चाहिए कि उनका यह नाम है, इसलिए गुण भी अपने में वैसे ही पैदा करने चाहिए। === क्रिया और भावन === मन्त्रोच्चार के साथ नाम से सज्जित थाली या तख्ती पर से वस्त्र हटाया जाए। सबको दिखाया जाए। यह कार्य आचार्य या कोई सम्माननीय व्यक्ति करें। भावना की जाए कि यह घोषित नाम ऐसे व्यक्तित्व का प्रतीक बनेगा, जो सबका गौरव बढ़ाने वाला होगा। ॐ मेधां ते देवः सविता, मेधां देवी सरस्वती। मेधां ते अश्विनौ देवौ, आधत्तां पुष्करस्रजौ॥ -आश्व०गृ० १.१५.२ मन्त्र पूरा होने पर सबको नाम दिखाएँ और तीन नारे लगवाएँ (प्रमुख कहें)(सब कहें) १. शिशु .............चिरंजीवी हो। (तीन बार कहें।) २. शिशु .............धर्मशील हो। (तीन बार कहें।) ३. शिशु .............प्रगतिशील हो। (तीन बार कहें)
सारांश:
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