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== सीखने के नियम == ई॰एल॰ थार्नडाइक अमेरिका का प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक हुआ है जिसने सीखने के कुछ नियमों की खोज की जिन्हें निम्नलिखित दो भागों में विभाजित किया गया है<ref>{{cite book|url=http://books.google.co.in/books?id=03qXWzODZY4C|title=सीखने की विधियाँ|author=बद्रीलाल गुप्ता|publisher=कॉन्सेप्ट पब्लिशिंग कम्पनी|year=2012|isbn=8180697479|access-date=18 अप्रैल 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140419013805/http://books.google.co.in/books?id=03qXWzODZY4C|archive-date=19 अप्रैल 2014|url-status=live}}</ref>– *(क) '''मुख्य नियम''' (Primary Laws) ::*1. तत्परता का नियम ::*2. अभ्यास का नियम :::* उपयोग का नियम :::* अनुप्रयोग का नियम ::*3. प्रभाव का नियम *(ब) '''गौण नियम''' (Secondary Laws) ::*1. बहु-अनुक्रिया का नियम ::*2.मानसिक स्थिति का नियम ::*3. आंशिक क्रिया का नियम ::*4. समानता का नियम ::*5. साहचर्य-परिर्वतन का नियम === मुख्य नियम === सीखने के मुख्य नियम तीन है जो इस प्रकार हैं - '''1. तत्परता का नियम ''' - इस नियम के अनुसार जब व्यक्ति किसी कार्य को करने के लिए पहले से तैयार रहता है तो वह कार्य उसे आनन्द देता है एवं शीघ्र ही सीख लेता है। इसके विपरीत जब व्यक्ति कार्य को करने के लिए तैयार नहीं रहता या सीखने की इच्छा नहीं होती हैतो वह झुंझला जाता है या क्रोधित होता है व सीखने की गति धीमी होती है। '''2. अभ्यास का नियम''' - इस नियम के अनुसार व्यक्ति जिस क्रिया को बार-बार करता है उस शीघ्र ही सीख जाता है तथा जिस क्रिया को छोड़ देता है या बहुत समय तक नहीं करता उसे वह भूलने लगताहै। जैसे‘- गणित के प्रष्न हल करना, टाइप करना, साइकिल चलाना आदि। इसे उपयोग तथा अनुपयोग का नियम भी कहते हैं। '''3. प्रभाव का नियम''' - इस नियम के अनुसार जीवन में जिस कार्य को करने पर व्यक्ति पर अच्छा प्रभाव पड़ता है या सुख का या संतोष मिलता है उन्हें वह सीखने का प्रयत्न करता है एवं जिन कार्यों को करने पर व्यक्ति पर बुरा प्रभाव पडता है उन्हें वह करना छोड़ देता है। इस नियम को सुख तथा दुःख या पुरस्कार तथा दण्ड का नियम भी कहा जाता है। === गौण नियम === '''1. बहु अनुक्रिया नियम''' - इस नियम के अनुसार व्यक्ति के सामने किसी नई समस्या के आने पर उसे सुलझाने के लिए वह विभिन्न प्रतिक्रियाओं के हल ढूढने का प्रयत्न करता है। वह प्रतिक्रियायें तब तक करता रहता है जब तक समस्या का सही हल न खोज ले और उसकी समस्यासुलझ नहीं जाती। इससे उसे संतोष मिलता है थार्नडाइक का प्रयत्न एवं भूल द्वारा सीखने का सिद्धान्त इसी नियम पर आधारित है। '''2. मानसिक स्थिति या मनोवृत्ति का नियम''' - इस नियम के अनुसार जब आदमी सीखने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहता है तो वह शीघ्र ही सीख लेता है। इसके विपरीत यदि व्यक्ति मानसिक रूप से किसी कार्य को सीखने के लिए तैयार नहीं रहता तो उस कार्य को वह सीख नहीं सकेगा। '''3. आंशिक क्रिया का नियम''' - इस नियम के अनुसार व्यक्ति किसी समस्या को सुलझाने के लिए अनेक क्रियायें प्रयत्न एवं भूल के आधार पर करता है। वह अपनी अंतर्दृष्टि का उपयोग कर आंशिक क्रियाओं की सहायता से समस्या का हल ढूढ़ लेता है। '''4. समानता का नियम''' - इस नियम के अनुसार किसी समस्या के प्रस्तुत होने पर व्यक्ति पूर्व अनुभव या परिस्थितियों में समानता पाये जाने पर उसके अनुभव स्वतः ही स्थानांतरित होकर सीखने में मदद करते हैं। '''5. साहचर्य परिवर्तन का नियम''' - इस नियम के अनुसार व्यक्ति प्राप्त ज्ञान का उपयोग अन्य परिस्थिति में या सहचारी उद्दीपक वस्तु के प्रति भी करने लगता है। जैसे-कुत्ते के मुह से भोजन सामग्री को देख कर लार टपकरने लगती है। परन्तु कुछ समय के बाद भोजन के बर्तनको ही देख कर लार टपकने लगती है।
सारांश:
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