सामग्री पर जाएँ
मुख्य मेन्यू
मुख्य मेन्यू
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
मार्गदर्शन
मुखपृष्ठ
हाल में हुए बदलाव
बेतरतीब पृष्ठ
मीडियाविकि के बारे में सहायता
भारतपीडिया
खोजें
खोजें
दिखावट
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
व्यक्तिगत उपकरण
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
लॉग-आउट किए गए संपादकों के लिए पृष्ठ
अधिक जानें
योगदान
वार्ता
"
अनुनाद
" (अनुभाग) सम्पादित करें
पृष्ठ
चर्चा
हिन्दी
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
उपकरण
उपकरण
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
क्रियाएँ
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
सामान्य
कड़ियाँ
पृष्ठ से जुड़े बदलाव
विशेष पृष्ठ
पृष्ठ की जानकारी
दिखावट
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
चेतावनी:
आपने लॉग-इन नहीं किया हुआ है। अगर आप सम्पादन करते हैं तो इस पृष्ठ के सम्पादन इतिहास में आपका IP पता दृश्य होगा। अगर आप
लॉग-इन
करते हैं या
खाता बनाते हैं
तो दूसरी सुविधाओं के साथ-साथ आपके सम्पादनों का श्रेय आपके सदस्यनाम पर दिया जाएगा।
ऐन्टी-स्पैम जाँच। इसे
नहीं
भरें!
== अनुनाद के उदाहरण == '''झूला''':यदि झूले को धक्का देते समय इस बात का ध्यान रखें कि धक्का उसी अन्तराल पर दें जो झूले का प्राकृतिक आवर्तकाल है, तो उस झूले का आयाम बढतअ ही चला जाता है। अर्थात हर बार झूला अपनी मध्यमान स्थिति से अधिकाधिक कोण बनाता चला जाता है। इसके विपरीत यदि उपर्युक्त बात का ध्यान न रखते हुए किसी अन्य आवृत्ति पर धक्का दिया जाय तो उसका असर बहुत कम, शून्य या नकारात्मक हो सकता है। '''रेडियो एवं दूरदर्शन''':रेडियो और टीवी के अन्दर एक ट्यून्ड परिपथ (tuned circuit) होता है जिसकी सहायता से किसी एक स्टेशन या चैनेल को चुनकर उसे सुना या देखा है। जब हम रेडियो का 'नाब' घुमाते हैं तो वस्तुतः इस ट्यून्ड परिपथ की अनुनाद आवृत्ति को ही बदल रहे होते हैं। किसी समय इस परिपथ की अनुनाद आवृत्ति जिस किसी स्टेशन या चैनेल की आवृत्ति से मेल खाती है (matches), वह चैनेल हमे प्राप्त होता है। '''लेजर''':[[लेसर किरण|लेजर]] एक [[विद्युतचुंबकीय विकिरण|विद्युतचुम्बकीय तरंग]] है। किन्तु इसकी विशेष बात यह है कि यह अत्यनत समवर्णी होता है। अर्थात इसके सभी फोटानों की आवृत्ति किसी एक आवृत्ति के बराबर या बहुत पास होती है। इसके साथ ही सभी कम्पनों की कलायें (फेज) भी समान होते हैं। लेजर भी किसी प्रकाशीय कैविटी में प्रकाशीय अनुनाद का उपयोग करके उत्पन्न किया जाता है। '''कुछ अन्य उदाहरण हैं''': * संगीत यन्त्रों में ध्वनि अनुनाद के लिये विशेष व्यवस्था रहती है। * यांत्रिक घड़ियों में ''संतुलन चक्र'' (बैलेंस व्हील) का कम्पन * क्रिस्टलीय कांच का गिलास जब किसी सम्यक आवृत्ति (गिलास की प्राकृतिक आवृति) के संगीत के सम्पर्क में आता है तो चूर-चूर हो जाता है। * किसी [[प्रत्यावर्ती विभव]] से यदि श्रेणी-क्रम में जुड़ा L-C-R जोड़ा जाता है (जिसमें प्रतिरोध R का मान (L/C) के वर्गमूल से से बहुत कम हो) और स्रोत विभव का आयाम नियत रखते हुए उसकी आवृत्ति बदली जाय तो इस परिपथ में उस स्थिति में सर्वाधिक धारा बहती है जब स्रोत की आवृत्ति, '''1/(2*Pi*L*C)''' के वर्गमूल के बराबर हो। इस स्थिति को '''श्रेणी अनुनाद''' (series resonance) कहते हैं।
सारांश:
भारतपीडिया पर किया कोई भी योगदान अन्य सदस्यों द्वारा बदला जा सकता है और हटाया भी जा सकता है। अगर आपको अपने लिखे हुए पाठ में संपादन होना नामंजूर है तो यहाँ पर न लिखें।
आप हमें यह भी वचन देतें हैं कि यह आपने स्वयं लिखा है अथवा सार्वजनिक क्षेत्र या किसी समान मुक्त स्रोत से प्रतिलिपित किया है (अधिक जानकारी के लिये
भारतपीडिया:कॉपीराइट
देखें)।
कॉपीराइट सुरक्षित कार्यों को बिना अनुमति के यहाँ न डालें!
रद्द करें
सम्पादन सहायता
(नए विंडो में खुलता है)