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=== उत्तर भारतीय भाषाओं में === * [[हिन्दी]] में श्री/श्रीमान (पुरुषों के लिए), श्रीमती (विवाहित स्त्रियों के लिए) व कुमारी (अविवाहित महिलाओं और लड़कियों के लिए) नाम के आगे लगाये जाते हैं। इसके अलावा 'जान' ('अम्मी जान'), 'पंडित' ('पंडित नेहरु'), 'महाशय', 'जनाब', 'हुज़ूर' और 'जजमान' जैसे कई अन्य आदरसूचक भी हिन्दी-उर्दू में प्रयोग होते हैं। * [[उर्दू भाषा|उर्दू]] व कुछ अन्य उत्तर भारतीय भाषाओं में में स्त्रियों को [[ख़ातून]] कहा जाता है, मसलन 'हब्बा ख़ातून' एक प्रसिद्ध [[कश्मीर|कश्मीरी]] कवयित्री थीं। [[कश्मीरी भाषा|कश्मीरी]] में 'महाराजा' को छोटा करके 'माहरा' और 'हज़रत' को छोटा करके 'हज़' के रूपों में भी प्रथापूर्वक पुरुषों के लिए प्रयोग किया जाता था हालांकि यह परंपरा अब कमज़ोर हो रही है।<ref name="ref95qiqoj">[http://books.google.com/books?id=QpjKpK7ywPIC Kashmir and Its People: Studies in the Evolution of Kashmiri Society] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130602211005/http://books.google.com/books?id=QpjKpK7ywPIC |date=2 जून 2013 }}, M. K. Kaw, pp. 315, APH Publishing, 2004, ISBN 978-81-7648-537-1, ''... The honorific terms maahraa. haz, jinaab, and sAA are very frequently used as terms of address ...''</ref> * उर्दू में 'आदर' को 'एहतराम' भी कहते हैं और पुरुषों को आदर दिखने के लिए उनके नाम के आगे 'मोहतरम' शब्द लगाया जाता है। इसी तरह स्त्रियों के लिए 'मोहतरमा' होता है, मसलन 'मोहतरमा बेनज़ीर भुट्टो'। * [[गुजराती भाषा|गुजराती]] में 'भाई' (पुरुषों के लिए) और 'बेन' ('बहन' का एक रूप, स्त्रियों के लिए) लगाने की प्रथा है, मसलन 'सकीना बेन' और 'गोपाल भाई'। * [[मराठी भाषा|मराठी]] में स्त्रियों के नाम के पीछे 'बाई' लगाने की प्रथा है, मसलन [[रानी लक्ष्मीबाई|झांसी की रानी]] मराठा-मूल की थीं और उन्हें 'लक्ष्मीबाई' कहते थे। दक्षिणी हिन्दी क्षेत्रों में भी यह प्रथा है। पुरुषों के नाम के पीछे 'राव' (उच्चारण 'राओ' जैसा) लगाया जाता है, उदहारण के लिए 'माधव राव'। * [[बाङ्ला भाषा|बंगाली]] व पूर्वी हिन्दी क्षेत्रों में पुरुषों के नाम के पीछे 'बाबू' लगते हैं, मसलन 'सुभाष बाबू'। और भी आदर जतलाने के लिए 'मोहाशोय' ('महाशय' का रूप) या उसका छोटा शब्द 'मोशाय' लगाया जाता है जिस से किसी आदरणीय पुरुष को 'बाबू मोशाय' कहा जाता है।
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