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== उत्सर्जन सिद्धांत के खण्डन == उत्सर्जन सिद्धांतों को परखने के लिए यह व्यवस्था डी सिटर (de Sitter) द्वारा प्रस्तावित की गई<ref name=des>{{Citation|author=De Sitter, Willem|title=[[s:On the constancy of the velocity of light|On the constancy of the velocity of light]]|journal=Proceedings of the Royal Netherlands Academy of Arts and Sciences|volume=16|issue=1|year=1913|pages=395–396}}</ref>: :<math>c'=c\pm kv\,</math> यहाँ ''c'' प्रकाश का वेग, ''v'' स्रोत का वेग, ''c''′ प्रकाश का परिणामी वेग है और ''k'' एक नियतांक है जिसका मान ० से १ के मध्य हो सकता है और यह स्रोत के क्षत्र पर निर्भर करता है। विशिष्ठ आपेक्षिकता सिद्धांत व [[ईथर माध्यम की परिकल्पना#आंशिक ईथर को घसीटने में समस्याएं|स्थिर ईथर]] के अनुसार ''k''=0 होता है जबकि उत्सर्जन सिद्धांत के अनुसार यह मान 1 तक हो सकता है। अनेक भौमिक प्रयोग बहुत लघु दूरियों पर किये गये, जहाँ कोई ईथर घसीटने अथवा कोई अन्य प्रभाव प्रभावी ना हो और पुनः परिणामों में यही प्रदर्शित हुआ कि प्रकाश का वेग स्रोत पर निर्भर नहीं करता, परिणामस्वरूप उत्सर्जन सिद्धान्तों का खण्डन हो गया। === खगोलीय स्रोत === [[चित्र:SitterKonstanz.png|thumbnail|विलियम डी सिटर का उत्सर्जन सिद्धांत के खण्डन के लिए तर्क।]] डेनियल फ्रॉस्ट कॉम्सटोक व विलियम डी सिटर ने १९१० में लिखा कि द्वि-तारा सम्बन्धी सिद्धन्त कुछ सही प्रतीत हो रहा है, निकट आ रहे तारे से उत्सर्जित प्रकाश अपने सहचर से उत्सर्जित प्रकाश से तेज गति से आगे बढना चाहिए और इससे आगे निकल जाना चाहिए। इन परिस्थितियों में तारक तन्त्र का चित्र एकदम एक दूसरे को पार करते हुये होनी चाहिए। डी सिटेर के अपने अध्ययन में पाया कि कोई भी तारा तन्त्र इस चरम प्रभाव जैसा व्यवहार नहीं करता, व्यापक रूप से यह ॠत्जियन सिद्धान्त का अन्त माना गया जहाँ <math>k < 2\times10^{-3}</math>.<ref name="des"/><ref>{{Citation|last=Comstock|first=Daniel Frost|title=[[s:A Neglected Type of Relativity|A Neglected Type of Relativity]]|journal=Physical Review|year=1910|volume=30|issue=2|pages=267}}</ref><ref>{{Citation|author=De Sitter, Willem|title=[[s:A proof of the constancy of the velocity of light|A proof of the constancy of the velocity of light]]|journal=Proceedings of the Royal Netherlands Academy of Arts and Sciences|volume=15|issue=2|year=1913|pages=1297–1298}}</ref> === भौमिक स्रोत === === व्यतिकरणमापी === === अन्य खण्डन ===
सारांश:
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