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==काव्य का प्रयोजन== [[राजशेखर]] ने कविचर्या के प्रकरण में बताया है कि [[कवि]] को विद्याओं और उपविद्याओं की शिक्षा ग्रहण करनी चाहिये। व्याकरण, कोश, छन्द, और अलंकार - ये चार विद्याएँ हैं। [[६४ कलाएँ]] ही उपविद्याएँ हैं। कवित्व के ८ स्रोत हैं- स्वास्थ्य, प्रतिभा, अभ्यास, भक्ति, विद्वत्कथा, बहुश्रुतता, स्मृतिदृढता और राग। : ''स्वास्थ्यं प्रतिभाभ्यासो भक्तिर्विद्वत्कथा बहुश्रुतता। : ''स्मृतिदाढर्यमनिर्वेदश्च मातरोऽष्टौ कवित्वस्य ॥'' ([[काव्यमीमांसा]])<ref>{{Cite web |url=https://sa.wikibooks.org/wiki/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%BE |title=काव्यमीमांसा |access-date=1 मार्च 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160913201956/https://sa.wikibooks.org/wiki/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%BE |archive-date=13 सितंबर 2016 |url-status=dead }}</ref> [[आचार्य मम्मट|मम्मट]] ने काव्य के छः प्रयोजन बताये हैं- : '' काव्यं यशसे अर्थकृते व्यवहारविदे शिवेतरक्षतये। : '' सद्यः परनिर्वृतये कान्तासम्मिततयोपदेशयुजे॥ : (काव्य यश और धन के लिये होता है। इससे लोक-व्यवहार की शिक्षा मिलती है। अमंगल दूर हो जाता है। काव्य से परम शान्ति मिलती है और कविता से कान्ता के समान उपदेश ग्रहण करने का अवसर मिलता है।)<ref>{{Cite web |url=http://www.exoticindiaart.com/book/details/great-sanskrit-poets-and-their-poetry-HAA421/ |title=संस्कृत के महाकवि और काव्य |access-date=1 मार्च 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170301182709/http://www.exoticindiaart.com/book/details/great-sanskrit-poets-and-their-poetry-HAA421/ |archive-date=1 मार्च 2017 |url-status=dead }}</ref>
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