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== 1857 के संग्राम में बाबू कुंवर सिंह == 1857 में अंग्रेजों को [[भारत]] से भगाने के लिए हिंदू और मुसलमानों ने मिलकर कदम बढ़ाया। [[मंगल पांडे]] की बहादुरी ने सारे देश में विप्लव मचा दिया।<ref>http://www.khabarexpress.com/Vartmaan-Sahitya-Magzine-1-7- {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190423051526/http://www.khabarexpress.com/Vartmaan-Sahitya-Magzine-1-7- |date=23 अप्रैल 2019 }} 177.html</ref> [[बिहार]] की [[दानापुर]] रेजिमेंट, [[बंगाल]] के [[बैरकपुर]] और [[रामगढ़]] के सिपाहियों ने बगावत कर दी। [[मेरठ]], [[कानपुर]], [[लखनऊ]], [[इलाहाबाद]], [[झाँसी|झांसी]] और [[दिल्ली]] में भी आग भड़क उठी। ऐसे हालात में बाबू कुंवर सिंह ने अपने सेनापति मैकु सिंह एवं भारतीय सैनिकों का नेतृत्व किया।<ref>{{Cite web |url=http://m.jagran.com/news/bihar-11254594.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=2 जनवरी 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150102081647/http://m.jagran.com/news/bihar-11254594.html |archive-date=2 जनवरी 2015 |url-status=live }}</ref> 27 अप्रैल 1857 को [[दानापुर]] के सिपाहियों, [[भोजपुरी भाषा|भोजपुरी]] जवानों और अन्य साथियों के साथ [[आरा]] नगर पर बाबू वीर कुंवर सिंह ने कब्जा कर लिया। अंग्रेजों की लाख कोशिशों के बाद भी [[भोजपुर]] लंबे समय तक स्वतंत्र रहा। जब अंग्रेजी फौज ने [[आरा]] पर हमला करने की कोशिश की तो बीबीगंज और [[बिहिया]] के जंगलों में घमासान लड़ाई हुई। बहादुर स्वतंत्रता सेनानी [[जगदीशपुर]] की ओर बढ़ गए। [[आरा]] पर फिर से कब्जा जमाने के बाद अंग्रेजों ने [[जगदीशपुर]] पर आक्रमण कर दिया। बाबू कुंवर सिंह और अमर सिंह को जन्म भूमि छोड़नी पड़ी। अमर सिंह अंग्रेजों से छापामार लड़ाई लड़ते रहे और बाबू कुंवर सिंह [[रामगढ़]] के बहादुर सिपाहियों के साथ [[बांदा, उत्तर प्रदेश|बांदा]], [[रीवां]], [[आज़मगढ़|आजमगढ़]], [[वाराणसी|बनारस]], [[बलिया]], [[ग़ाज़ीपुर|गाजीपुर]] एवं [[गोरखपुर]] में विप्लव के नगाड़े बजाते रहे। [[यूनाइटेड किंगडम|ब्रिटिश]] इतिहासकार होम्स ने उनके बारे में लिखा है, 'उस बूढ़े [[राजपूत]] ने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध अद्भुत वीरता और आन-बान के साथ लड़ाई लड़ी। यह गनीमत थी कि युद्ध के समय कुंवर सिंह की उम्र अस्सी के करीब थी। अगर वह जवान होते तो शायद अंग्रेजों को 1857 में ही भारत छोड़ना पड़ता।'<ref>{{Cite web |url=http://bihar.chauthiduniya.com/2011/05/siyasi-talvarn-chalne-lagi.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=2 जनवरी 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150102081449/http://bihar.chauthiduniya.com/2011/05/siyasi-talvarn-chalne-lagi.html |archive-date=2 जनवरी 2015 |url-status=dead }}</ref>
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