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== काव्य प्रतिभा == मिश्र जी बस्तुत: आशु कवि थे और एक घंटे में सौ अनुष्टुप छंदों की रचना कर लेते थे।<ref>हिन्दी साहित्य और बिहार, खंड-३, पृष्ठ: १३७</ref> मिश्र जी की कृतियाँ आज अप्राप्य है। इनकी एक मात्र प्रकाशित पद्यमय रचना ''गूलर गुण बिकास'' उपलब्ध है। वैद्यक पर केन्द्रित यह पुस्तक इनकी काव्य प्रतिभा का साक्ष्य प्रस्तुत करती है। एक उदाहरण देखें : ''लेप कराते हो तुरत गायब दराड़ औ धाह है इसलिए इस सार पर सबकी अमृत सी चाह है। एक पल में धाह बेचैनी बिकलता बंद कर। नींद ल देता है सुख की तुरत ही आनंदकर।।<ref>अर्घ्य (त्रैमासिक), सितंबर १९६१, पृष्ठ:६१-६२, में संकलित हरीशचंद प्रसाद के लेख : एसडबल्यू। पण्डित चन्द्रशेखर धर मिश्र</ref>
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