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== स्थापत्य == नियोजित तरीके से बसाये गये इस जयपुर में महाराजा के महल, औहदेदारों की हवेली और बाग बगीचे, ही नहीं बल्कि आम नागरिकों के आवास और राजमार्ग बनाये गये। गलियों का और सडकों का निर्माण [[वास्तु]] के अनुसार और ज्यामितीय तरीके से किया गया,[[नगर]] को सुरक्षित रखने के लिये, इस नगर के चारों ओर एक परकोटा बनवाया गया। पश्चिमी पहाडी पर [[नाहरगढ]] का [[किला]] बनवाया गया। पुराने [[दुर्ग]] [[जयगढ]] में [[हथियार (सुरक्षा उपकरण)|हथियार]] बनाने का [[कारखाना]] बनवाया गया, जिसे देख कर आज भी वैज्ञानिक चकित हो जाते हैं, इस कारखाने और अपने शहर जयपुर के निर्माता [[सवाई जयसिंह]] की स्मॄतियों को संजोये विशालकाय [[जयबाण तोप]] आज भी सीना ताने इस नगर की सुरक्षा करती महसूस होती है। महाराजा [[सवाई जयसिंह]] ने जयपुर को नौ आवासीय खण्डों में बसाया, जिन्हें [[चौकडी]] कहा जाता है, इनमे सबसे बडी [[चौकडी]] [[सरहद]] में [[राजमहल]],[[रानिवास]],[[जंतर मंतर]],[[गोविंददेवजी का मंदिर]], आदि हैं, शेष चौकडियों में नागरिक [[आवास]], हवेलियां और कारखाने आदि बनवाये गये। प्रजा को अपना परिवार समझने वाले [[सवाई जयसिंह]] ने सुन्दर शहर को इस तरह से बसाया कि यहां पर नागरिकों को मूलभूत आवश्यकताओं के साथ अन्य किसी प्रकार की कमी न हो, सुचारु [[पेयजल]] व्यवस्था, बाग-बगीचे, कल कारखाने आदि के साथ [[वर्षाजल]] का संरक्षण और निकासी का प्रबंध भी करवाया.[[सवाई जयसिंह]] ने लम्बे समय तक जयपुर में राज किया, इस शहर में [[हस्तकला]],[[गीत]] [[संगीत]],[[शिक्षा]] और [[रोजगार]] आदि को उन्होने खूब प्रोत्साहित किया। अलग २ समय में [[वास्तु]] के अनुरुप [[ईसरलाट]],[[हवामहल]],[[रामनिवास बाग]]और विभिन्न कलात्मक मंदिर, शिक्षण संस्थानों आदि का निर्माण करवाया गया। '''बाजार'''- जयपुर प्रेमी कहते हैं कि जयपुर के सौन्दर्य को को देखने के लिये कुछ खास नजर चाहिये, बाजारों से गुजरते हुए, जयपुर की बनावट की कल्पना को आत्मसात कर इसे निहारें तो पल भर में इसका सौन्दर्य आंखों के सामने प्रकट होने लगता है। लम्बी चौडी और ऊंची [[प्राचीर]] तीन ओर फ़ैली [[पर्वतमाला]] सीधे सपाट [[राजमार्ग]] गलियां [[चौराहे]] [[चौपड]] भव्य [[राजप्रसाद]], [[मंदिर]] और [[हवेली]], बाग बगीचे,[[जलाशय]] और गुलाबी आभा से सजा यह शहर [[इन्द्रपुरी]] का आभास देने लगता है,[[जलाशय]] तो अब नहीं रहे, किन्तु कल्पना की जा सकती है, कि अब से कुछ दशक पहले ही जयपुर [[परकोटे]] में ही सिमटा हुआ था, तब इसका भव्य एवं कलात्मक रूप हर किसी को मन्त्र-मुग्ध कर देता होगा। आज भी जयपुर यहां आने वाले सैलानियों को बरसों बरस सहेज कर रखने वाले [[रोमांचकारी]] अनुभव देता है। === जयपुर का बदलाव === जयपुर की रंगत अब बदल रही है। हाल ही में जयपुर को विश्व के दस सबसे खूबसूरत शहरों में शामिल किया गया है।{{citation needed|date=जून 2011}} [[महानगर]] बनने की ओर अग्रसर जयपुर में [[भारतीय स्वतंत्रता संग्राम|स्वतन्त्रता]] के बाद कई महत्वाकांक्षी निर्माण हुए। [[एशिया]] की सबसे बडी [[आवासीय बस्ती]] मानसरोवर, राज्य का सबसे बड़ा [[सवाई मानसिंह चिकित्सालय]], [[राजस्थान विधानसभा|विधानसभा भवन]], [[अमर जवान ज्योति]], एम.आई.रोड, सेन्ट्रल पार्क और विश्व के प्रसिद्ध बैंक इसी कड़ी में शामिल हैं। पिछले कुछ सालों से जयपुर में [[मेट्रो संस्कॄति]] के दर्शन होने लगे हैं। चमचमाती सडकें, बहुमंजिला शापिंग माल, आधुनिकता को छूती आवासीय कालोनियां, आदि महानगरों की होड करती दिखती हैं। पुराने जयपुर और नये जयपुर में नई और पुरानी संस्कॄति के दर्शन जैसे इस शहर के विकास और [[इतिहास]] दोनों को स्पष्ट करते हैं। जयपुर कितना भी बदले पर इसके व्यंजनों का जायका बदस्तूर कायम है। [[जयपुर के व्यंजन]] में प्रसिद्ध दाल बाटी चूरमा, केर सांगरिया की सब्जी, मालपुआ इत्यादि है।
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