सामग्री पर जाएँ
मुख्य मेन्यू
मुख्य मेन्यू
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
मार्गदर्शन
मुखपृष्ठ
हाल में हुए बदलाव
बेतरतीब पृष्ठ
मीडियाविकि के बारे में सहायता
भारतपीडिया
खोजें
खोजें
दिखावट
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
व्यक्तिगत उपकरण
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
लॉग-आउट किए गए संपादकों के लिए पृष्ठ
अधिक जानें
योगदान
वार्ता
"
नैनो विज्ञान
" (अनुभाग) सम्पादित करें
पृष्ठ
चर्चा
हिन्दी
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
उपकरण
उपकरण
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
क्रियाएँ
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
सामान्य
कड़ियाँ
पृष्ठ से जुड़े बदलाव
विशेष पृष्ठ
पृष्ठ की जानकारी
दिखावट
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
चेतावनी:
आपने लॉग-इन नहीं किया हुआ है। अगर आप सम्पादन करते हैं तो इस पृष्ठ के सम्पादन इतिहास में आपका IP पता दृश्य होगा। अगर आप
लॉग-इन
करते हैं या
खाता बनाते हैं
तो दूसरी सुविधाओं के साथ-साथ आपके सम्पादनों का श्रेय आपके सदस्यनाम पर दिया जाएगा।
ऐन्टी-स्पैम जाँच। इसे
नहीं
भरें!
== नैनो के कुछ अनुप्रयोग == नैनो विज्ञान के सिद्धांत के प्रथम अनुप्रयोग का श्रेय रोम को जाता है। रोम में चौथी शताब्दी में बने शीशे के रंग बिरंगे प्याले अब भी बहुत आकर्षित दिखते हैं। रगंहीन शीशे को विविध रंगो से सुसज्जित करने के लिए सोने और चांदी के नैनो कणों का प्रयोग किया जाता था।<br /> नैनो विज्ञान के एक अन्य प्राचीन अनुप्रयोग के रूप में काजल का नाम लिया जा सकता है। सौंदर्य और स्वास्थ्य कारणों से बहुत पहले से काजल का प्रयोग किया जाता रहा है। सामान्यतः काजल बनाने के लिए एक पारंपरिक विधि का प्रयोग करते हैं। इसमें सरसो के तेल या घी के दीपक के ऊपर किसी धातु के पात्र (कजरौटा) को रख कर बनाते हैं। तेल के अपूर्ण दहन से से उत्पन्न होने वाली कार्बन में नैनो ट्यूब्स की प्रचुर मात्रा होती है। इस प्रकार कुल उत्पन्न कार्बन का लगभग एक प्रतिशत भाग कार्बन नैनो कणों द्वारा मिल कर बना होता है। <br /> एक अन्य उदाहरण जापान की प्रसिद्ध मध्यकालीन समुराई तलवारों का दिया जा सकता है। जापान की अति प्राचीन युद्ध विद्या में समुराई तलवारों का एक विशिष्ट स्थान है। यह तलवारें अपनी तेज धार और मजबूती के लिए जानी जाती हैं। इन तलवारों को बनाने में Forge and Fold तकनीकी का प्रयोग करते थे। इस तकनीकी में पहले धातु को गर्म करके पीटते हैं और फिर पतला करके मोड़ते हैं। ऐसा बार बार (लगभग50-100 बार) दोहराने से बने धातु की सतह बहुत पतली (लगभग 50 नैनो मीटर) और मजबूत हो जाती है। एक दूसरा उदाहरण बनारसी साड़ियों में प्रयोग होने वाले सोने के पतले रेशों का दिया जा सकता है। यह रेशे 10 माइक्रॉन (नैनो मीटर स्तर) तक मोटाई के हो सकते हैं। सोने के इन रेशों की वजह से बनारसी साड़ी की आभा में कई गुना वृद्धि हो जाती है। <br /> नैनो के इन प्राचीन अनुप्रयोगों को देखने से यह ज्ञात होता है कि तकनीकी विकास के लिए गहन वैज्ञानिक ज्ञान का होना आवश्यक नहीं है। इसे आवश्यकताओं, अनुभवों और अनुकूलन से भी सीखा जा सकता है। यह कहा जा सकता है कि हमने नैनो को वैज्ञानिक रूप से अभी जानना आरंभ किया है लेकिन यह भी सत्य है कि हम कहीं बहुत पहले से इसका प्रयोग करते आ रहे हैं। हाल के वर्षों में हुए शोधों और वैज्ञानिक विकास से हमें इसके वैज्ञानिक कारणों का पता मात्र चला है। अब यहां प्रश्न यह उठता है कि नैनो विज्ञान आज इतना चर्चित क्यों है? यहां तक की हॉलीवुड के निर्माता भी नैनो की चर्चा कर रहे हैं और दूसरी ओर उद्योगपति भी नैनो कार की बोत कर रहे हैं। इससे सिद्ध होता है कि नैनो विज्ञान और इसके अनुप्रयोगों को लेकर हम काफी उत्साहित हैं। <br />
सारांश:
भारतपीडिया पर किया कोई भी योगदान अन्य सदस्यों द्वारा बदला जा सकता है और हटाया भी जा सकता है। अगर आपको अपने लिखे हुए पाठ में संपादन होना नामंजूर है तो यहाँ पर न लिखें।
आप हमें यह भी वचन देतें हैं कि यह आपने स्वयं लिखा है अथवा सार्वजनिक क्षेत्र या किसी समान मुक्त स्रोत से प्रतिलिपित किया है (अधिक जानकारी के लिये
भारतपीडिया:कॉपीराइट
देखें)।
कॉपीराइट सुरक्षित कार्यों को बिना अनुमति के यहाँ न डालें!
रद्द करें
सम्पादन सहायता
(नए विंडो में खुलता है)