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== '''[[भाषाविज्ञान]]''' में योगदान == '''चाम्सकीय''' भाषाविज्ञान की शुरुआत उनकी पुस्तक ''[[सिंटैक्टिक स्ट्रक्चर्स (पुस्तक|सिंटैक्टिक स्ट्रक्चर्स]]'' से हुई मानी जा सकती है जो उनके पीएचडी के शोध, '' लाजिकल स्ट्रक्चर ऑफ लिंग्विस्टिक थीयरी'' (1955, 75) का परिमार्जित रूप था। इस पुस्तक के द्वारा चाम्सकी ने पूर्व स्थापित [[संरचनावादी भाषाविज्ञान|संरचनावादी भाषावैज्ञानिकों]] की मान्यताओं को चुनौती देकर [[ट्रांसफार्मेशनल ग्रामर]] की बुनियाद रखी। इस व्याकरण ने स्थापित किया कि शब्दों के समुच्य का अपना व्याकरण होता है, जिसे औपचारिक व्याकरण द्वारा निरुपित किया जा सकता है और खासकर [[सन्दर्भमुक्त व्याकरण]] द्वारा जिसे ''ट्रांसफार्मेशन'' के नियमों द्वारा व्याख्यित किया जा सकता है। उन्होंने माना कि प्रत्येक [[मानव]] [[शिशु]] में [[व्याकरण]] की संरचनाओं का एक अंतर्निहित एवं जन्मजात (आनुवांशिक रूप से) खाका होता है जिसे [[सार्वभौम व्याकरण]] की संज्ञा दी गयी। ऐसा तर्क दिया जाता है कि [[भाषा]] के ज्ञान का [[औपचारिक व्याकरण]] के द्वारा माडलिंग करने पर [[भाषा उत्पादकता]] के बारें में काफी जानकारी इकट्ठा की जा सकती है, जिसके अनुसार [[व्याकरण]] के सीमित नियमों द्वारा कैसे असीमित वाक्य निर्माण कैसे संभव हो पाता है। चामस्की ने प्राचीन [[भारत|भारतीय]] वैय्याकरण [[पाणिनी]] के प्राचीन [[प्रजनक व्याकरण|जेनेरेटिव ग्रामर]] के नियमों के महत्व भी स्वीकृत करते हैं। ] चाम्सकी ने अपने '''प्रिंसिपल्स ऐंड पैरामीटरस''' का माड्ल अपने [[पीसा]] के व्याख्यान के बाद 1979 में विकसित की थी जो बाद में ''लेक्चर्स आन गवर्नमेंट ऐंड बाइंडिंग'' के नाम से प्रकाशित हुई। इसमें चाम्सकी ने सार्वभौम व्याकरण के बारे में काफी अकाट्य दावे एवं तर्क पेश किये। === जेनेरेटिव ग्रामर === === चाम्स्कियन हाइरेरकी === [[स्वनविज्ञान|ध्वनि विज्ञान]] में उनका सबसे अच्छा काम ''[[द साउंड पैटर्न ऑफ इंग्लिश]]'' है, जो उन्होंने [[मारिस हाले]] के साथ मिलकर किया था। (जिसे अक्सर ''SPE'' के नाम से जाना जाता है).
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