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== महात्म्य == पंचामृत देते समय देवपूजक अर्थात पुजारी जिस मंत्र का उच्चारण करता है, उसका अर्थ है- ''अकाल मृत्यु का हरण करने वाले और समस्त रोगों के विनाशक, श्रीविष्णु का चरणोदक पीकर पुनर्जन्म नहीं होता। दूसरे शब्दों में, श्रद्धापूर्वक पंचामृत का पान करने वाला मनुष्य संसार में समस्त ऐश्वर्यों को प्राप्त करता हुआ शरीरपात के बाद जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।''' यह पंचामृत का माहात्म्य है। गोदुग्ध, गोदधि, गोघृत, शर्करा और मधु के सम्मिश्रण में रोग निवारण गुण विद्यमान होते हैं, यह पुष्टिकारक है, चिकित्सा शास्त्र की मान्यता है यह। लेकिन जब यह देवमूर्ति का स्पर्श करता है तो मुक्ति प्रदाता हो जाता है-यह आध्यात्मिक सत्य है।
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