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===कोरिया में जापान का स्वार्थ=== जापान ने अपने [[जापानी साम्राज्यवाद|साम्राज्यवाद]] का मुख्य लक्ष्य चीन को बनाया और सर्वप्रथम [[कोरिया]] में उसने चीन के साथ अपनी शक्ति का प्रयोग किया। कोरिया अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से जापान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था। इसलिए कोरिया प्रायद्वीप में जापान की बहुत रूचि थी। चीन के मंचू सम्राटों ने 17वीं शताब्दी में कोरिया पर अधिकार कर लिया था और तभी से कोरिया चीन का अधीन प्रदेश माना जाता था। यद्यपि कोरिया का अपना पृथक राजा होता था, किन्तु कोरिया का स्वतंत्र राजा चीन के सम्राट् को अपना अधिपति स्वीकार करता था। इस तरह कोरिया का राज्य चीन के एक संरक्षित राज्य के समान था। कोरिया प्रायद्वीप में जापान का परंपरागत स्वार्थ था लेकिन, अभी तक जापान को इस स्वार्थ को पूरा करने का मौका नहीं मिला था। किन्तु अब जापान में सैनिकवाद का जन्म हो चुका था। अतः यह आवश्यक हो गया कि वह कोरिया के संबंध में उग्र नीति का अवलंबन करे। इस समय कोरिया यूरोपीय राज्यों की साम्राज्यवादी नीति के भँवरजाल में फँस रहा था, ऐसी स्थिति में कोरिया चीन के हाथ से निकलकर किसी भी यूरोपीय देश के अधिकार में जा सकता था। इसलिए जापान की चिंता बढ़ी और उसने तय किया कि वह कोरिया को उसके भाग्य पर नहीं छोड़ सकता।
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