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== सामानी युग (सन् 874-999 ई.) == युग फारसी भाषा के साहित्य की वास्तविक उन्नति का समय है। वस्तुत: इसी युग में फारसी के बड़े बड़े साहित्यकार उत्पन्न हुए, जिन्होंने आनेवाली पीढ़ियों के कवियों तथा लेखकों के लिए मार्ग प्रशस्त किया था। अभी तक जो फारसी साहित्य था वह कविता अर्थात् पद्य तक सीमित था। परंतु इस युग में फारसी गद्य ने भी उन्नति की। सामानियों के समय का एक प्रसिद्ध कवि अबू शुकूर बलखी है। इसने रुबाई नामक छंद निकाला, जिसने बाद में विशेष उन्नति की। किंतु इस काल का सर्वश्रेष्ठ कवि रूदकी या रूदगी है, जो ईरान का प्रथम महाकवि है। इसका नाम अबू अब्दुल्ला जाफर बिन मुहम्मद है। इसका उपनाम रूदकी है, जो उसके ग्राम के नाम से लिया गया है। कहा जाता है कि वह अंधा था परंतु इस दोष के रहते पर भी वह सामानी बादशाह नसर बिन अहमद को पसंद था। उसकी शैली सरल तथा सुगम है, फिर भी कुछ सीमा तक उसमें "तकल्लुफ" (संकोच, आडंबर) पाया जाता है, जो बाद की फारसी कविता का विशिष्ट गुण हो गया। रूदकी गायन कला में भी प्रवीणता रखता था। इसने गजलें तथा कसीदे लिखे हैं और वामिक़ एवं एज़रा नामक एक आख्यानक काव्य भी लिखा है, जिसका मूल पहलवी का है। रूदकी की मृत्य सन् 954 ई. में हुई। सामानी युग का एक अन्य उल्लेखनीय कवि "दक़ीक़ी" है जिसके बारे में कहा जाता है कि उसने पहले शाहनामा कविताबद्ध करना आरंभ किया था किंतु उसे पूरा करने के पहले ही अपने दास के हाथों मारा गया। धर्म की दृष्ट से दकीकी ज़रायुस्त्री अर्थात् अग्निपूजक था। मदिरा तथा जरयुस्त्री धर्म की प्रशंसा में उसकी कविता प्रसिद्ध है। गद्य में लिखित पुस्तकों में से कुछ का विवरण इस प्रकार है : किताब अजायबुल अल् बर्रो अल् बहर या अजायबुल् बुल्दान में ईरान् के विभिन्न प्रांतों का मूल्यवान् विवरण प्राप्त है। किताब हुदूदुल् आल्सरमिन अल्मशरिक् व अल्मगरिब के रचयिता का नाम ज्ञात नहीं, जैसा उसकी भूमिका से प्रकट है। यह सन् 372 हि. की रचना है। किताबुल्अबिनिया अन हकायकुल् अदविया पुस्तक ओषधियों पर है। यह अबू मंसूर मुवफ्फिक हरवी की रचना कही जाती है। तर्जुमा तारीख तबरी के मूल अरबी ग्रंथ का लेखक मुहम्मद बिन जरीर तबरी है, जिसका अनुवाद फारसी में कई विद्वानों ने मंसूर बिन नूह के आदेश से किया था। तर्जुमा तक़सीर तबरी का भी मूल लेखक मुहम्मद बिन जरीर तबरी है और इसका भी फारसी अनुवाद मंसूर बिन नूह के आदेश से कई विद्वानों ने मिलकर किया था।
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