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==नामकरण और आरंभिक जीवन== मक्खलि गोसाल चित्रकथाओं के जरिए धार्मिक-नैतिक उपदेश देकर आजीविका चलाने वाले मंख के पुत्र थे। भद्रा उनकी माता का नाम था। कहते हैं उनका जन्म श्रावस्ती के सरवण यानी सरकंडों वाले गांव के एक गोशाला में हुआ था। इसी कारण वे गोशालक कहलाए। वहीं, जैन श्रुतियों के अनुसार ‘मक्खलि’ शब्द की उत्पत्ति ‘मंख’ से हुई है। मंख एक ऐसा समुदाय था जिसके सदस्य गा-बजा और नाच कर अपना जीवन यापन करते थे। जैन ग्रंथों के अनुसार मक्खलि हाथ में मूर्ति लेकर भटका करते थे। इसीलिए जैनों और बौद्धों ने उन्हें ‘मक्खलिपुत्त गोशाल’ कहा है। संस्कृत के प्राचीन ग्रंथों में उन्हें ‘मस्करी गोशाल’ (दिव्यावदान पृ. १४३) भी कहा गया है क्योंकि आजीवक लोग हाथ में ‘मस्करी’ (दंड अथवा डंडा) लेकर चला करते थे। मंखलि नाम उसका क्यों पड़ा, इस संबंध में एक विचित्र-सी कथा बौद्ध परम्परा में प्रचलित है; जिसके अनुसार गोशालक दास था। एक बार वह तेल का घड़ा उठाये आगे-आगे चल रहा था और उसका मालिक पीछे-पीछे। आगे फिसलन की भूमि आई। उसके स्वामी ने कहा-‘तात! मा खलि, तात! मा खलि' "अरे! स्खलित मत होना, स्खलित मत होना", पर गोशालक स्खलित हुआ और तेल भूमि पर बह चला। वह स्वामी के डर से भागने लगा। स्वामी ने उसका वस्त्र पकड़ लिया। वह वस्त्र छोड़ कर नंगा ही भाग चला। इस प्रकार वह नग्न साधु हो गया और लोग उसे ‘मंखलि' कहने लगे।<ref>भगवई : विआहपण्णत्ती : खण्ड-4: शतक (12-16) (मूल पाठ, संस्कृत छाया, हिन्दी अनुवाद, भाष्य तथा अभय देव सूरिकृत वृत्ति एवं परिशिष्ट-शब्दानुक्रम आदि सहित), सम्पादक और भाष्यकार, आचार्य महाप्रज्ञ, जैन विश्व भारती, लाडनूं, राजस्थान, प्रथम संस्करण, अक्टूबर, 2007, पृ. 241</ref> मक्खलि गोसाल उम्र में निगंठ नाथपुत्त महावीर से बड़े थे और उनसे दो वर्ष पहले प्रवज्या ली थी। दोनों की मुलाकात नालंदा के तंतुवायशाला में हुई थी। 6 साल तक साथ रहने के पश्चात् दोनों में मतभेद हुआ और वे हमेशा के लिए एक दूसरे से अलग हो गए। इनके समकालीनों में अन्य प्रमुख दार्शनिक थे: पूरण कस्सप, पकुध कच्चान, अजीत केसकम्बली, संजय वेलट्ठिपुत्त और गौतम बुद्ध। आलार कालाम एक अन्य प्रमुख आजीवक थे जिनके पास बुद्ध सबसे पहले प्रवज्या लेने पहुंचे थे। परंतु जैन-बौद्ध ग्रंथों में इन सबके पहले भी कई आजीविकों का उल्लेख हुआ है। किस्स संकिच्च और नन्दवच्छ नामक दो प्रमुख आजीवक हैं जो मक्खलि से पूर्व हुए बताए गए हैं।
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