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== सामाजिक प्रसंग == [[चित्र:A child ties a rakhi on PM Modi's wrist on the occasion of Raksha Bandhan (14994546821).jpg|thumb|200x200px|भारत के प्रधानमंत्री [[नरेन्द्र मोदी]] को राखी बाँधते बच्चे।]] [[नेपाल]] के पहाड़ी इलाकों में ब्राह्मण एवं क्षेत्रीय समुदाय में रक्षा बन्धन गुरू और भागिनेय के हाथ से बाँधा जाता है। लेकिन दक्षिण सीमा में रहने वाले भारतीय मूल के नेपाली भारतीयों की तरह बहन से राखी बँधवाते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://hindi.news18.com/photogallery/importance-of-rakshabandhan-506983-page-2.html|title=आप रक्षाबंधन नहीं बल्कि मनाते हैं ये त्यौहार, कभी जाना है इस पर्व का यह रहस्य...!|date=2017-07-17|website=News18 इंडिया|access-date=2020-09-12}}</ref> इस दिन बहनें अपने भाई के दायें हाथ पर राखी बाँधकर उसके माथे पर तिलक करती हैं और उसकी दीर्घ आयु की कामना करती हैं। बदले में भाई उनकी रक्षा का वचन देता है। ऐसा माना जाता है कि राखी के रंगबिरंगे धागे भाई-बहन के प्यार के बन्धन को मज़बूत करते है। भाई बहन एक दूसरे को मिठाई खिलाते हैं और सुख-दुख में साथ रहने का विश्वास दिलाते हैं। यह एक ऐसा पावन पर्व है जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को पूरा आदर और सम्मान देता है। सगे भाई बहन के अतिरिक्त अनेक भावनात्मक रिश्ते भी इस पर्व से बँधे होते हैं जो धर्म, जाति और देश की सीमाओं से परे हैं। रक्षाबन्धन का पर्व भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री के निवास पर भी मनाया जाता है। जहाँ छोटे छोटे बच्चे जाकर उन्हें राखी बाँधते हैं।<ref>{{cite web|url= http://pib.nic.in/archieve/phtgalry/pgyr2003/pg082003/pg12aug2003/120820032.html|title= फ़ोटो डाउनलोड 12 अगस्त 2003|access-date= [[16 अगस्त]] [[2007]]|format= एचटीएमएल|publisher= भारत सरकार|language= |archive-url= https://web.archive.org/web/20090903134816/http://pib.nic.in/archieve/phtgalry/pgyr2003/pg082003/pg12aug2003/120820032.html|archive-date= 3 सितंबर 2009|url-status= live}}</ref> रक्षाबन्धन आत्मीयता और स्नेह के बन्धन से रिश्तों को मज़बूती प्रदान करने का पर्व है। यही कारण है कि इस अवसर पर न केवल बहन भाई को ही अपितु अन्य सम्बन्धों में भी रक्षा (या राखी) बाँधने का प्रचलन है। गुरु शिष्य को रक्षासूत्र बाँधता है तो शिष्य गुरु को। भारत में प्राचीन काल में जब [[स्नातक]] अपनी शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात [[गुरुकुल]] से विदा लेता था तो वह आचार्य का [[आशीर्वाद]] प्राप्त करने के लिए उसे रक्षासूत्र बाँधता था जबकि आचार्य अपने विद्यार्थी को इस कामना के साथ रक्षासूत्र बाँधता था कि उसने जो ज्ञान प्राप्त किया है वह अपने भावी जीवन में उसका समुचित ढंग से प्रयोग करे ताकि वह अपने ज्ञान के साथ-साथ आचार्य की गरिमा की रक्षा करने में भी सफल हो। इसी परम्परा के अनुरूप आज भी किसी धार्मिक विधि विधान से पूर्व पुरोहित यजमान को रक्षासूत्र बाँधता है और यजमान पुरोहित को। इस प्रकार दोनों एक दूसरे के सम्मान की रक्षा करने के लिये परस्पर एक दूसरे को अपने बन्धन में बाँधते हैं।<ref>{{cite web|url= http://www.abhivyakti-hindi.org/parva/alekh/2006/rakshabandhan.htm|title= प्यारा सा बंधन : रक्षाबंधन|access-date= [[24 जुलाई]] [[2007]]|format= एचटीएम|publisher= अभिव्यक्ति|language= |archive-url= https://web.archive.org/web/20070808060750/http://www.abhivyakti-hindi.org/parva/alekh/2006/rakshabandhan.htm|archive-date= 8 अगस्त 2007|url-status= dead}}</ref> रक्षाबन्धन पर्व सामाजिक और पारिवारिक एकबद्धता या एकसूत्रता का सांस्कृतिक उपाय रहा है। विवाह के बाद बहन पराये घर में चली जाती है। इस बहाने प्रतिवर्ष अपने सगे ही नहीं अपितु दूरदराज के रिश्तों के भाइयों तक को उनके घर जाकर राखी बाँधती है और इस प्रकार अपने रिश्तों का नवीनीकरण करती रहती है। दो परिवारों का और कुलों का पारस्परिक योग (मिलन) होता है। समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भी एकसूत्रता के रूप में इस पर्व का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार जो कड़ी टूट गयी है उसे फिर से जागृत किया जा सकता है।<ref>{{cite web|url= http://www.amarujala.com/dharam/default1.asp?foldername=20010804&sid=3|title= सामाजिक पारिवारिक एकबद्धता का उपक्रम है रक्षाबंधन|access-date= [[17 अगस्त]] [[2007]]|format= एएसपी|publisher= अमर उजाला|language= |archive-url= https://web.archive.org/web/20070927010025/http://www.amarujala.com/dharam/default1.asp?foldername=20010804&sid=3|archive-date= 27 सितंबर 2007|url-status= dead}}</ref> रक्षाबन्धन के अवसर पर कुछ विशेष पकवान भी बनाये जाते हैं जैसे [[घेवर]], शकरपारे, नमकपारे और घुघनी। घेवर सावन का विशेष मिष्ठान्न है यह केवल हलवाई ही बनाते हैं जबकि शकरपारे और नमकपारे आमतौर पर घर में ही बनाये जाते हैं। घुघनी बनाने के लिये काले चने को उबालकर चटपटा छौंका जाता है। इसको पूरी और दही के साथ खाते हैं। हलवा और खीर भी इस पर्व के लोकप्रिय पकवान हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.prabhasakshi.com/currentaffairs/history-mythological-and-cultural-significance-of-rakshabandhan-festival|title=रक्षाबंधन पर्व का इतिहास, पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व|last=Prabhasakshi|date=2020-08-01|website=Prabhasakshi|language=hi|access-date=2020-09-12}}</ref>
सारांश:
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