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== कार्य == सिख संगत के कार्यों का आधार है "श्रीगुरुग्रन्थ साहिब"। उल्लेखनीय है कि यह ग्रन्थ सामाजिक समरसता और एकता का सन्देश देता है और इसमें पूरे भारत का प्रतिनिधित्व भी हुआ है। इसमें 6 गुरुओं, 15 भक्तों और 15 भट्टों की वाणियां हैं। ये गुरु, भक्त और भट्ट अनेक जातियों, अनेक पंथों और भारत के अनेक स्थानों से जुड़े हैं। श्रीगुरुग्रंथ साहिब के सन्देशों को सर-माथे पर लेकर संगत के कार्यकर्ता पूरे देश में सामाजिक समरसता का वातावरण तैयार कर रहे हैं और देश की एकता को मजबूती दे रहे हैं। संगत का मानना है कि सिख समाज के अधिकांश लोग देश-धर्म पर मर मिटने वाले, सेवाभावी और इनसानियत के मसीहा हैं। इसी विचार और भावना के साथ संगत के कार्यकर्ता सिख समाज से सम्पर्क और संवाद स्थापित करते हैं। राष्ट्रीय सिख संगत ने अपने 25 वर्ष के इतिहास में अनेक बड़े आयोजन किए हैं, जिनसे समाज को एक नई दिशा और सोच मिली है। कुछ वर्ष पूर्व नई दिल्ली में संगत ने उन भक्तों और भट्टों के वंशजों को सम्मानित किया था, जिनकी वाणी श्री गुरुग्रंथ साहिब में हैं। 300 साला गुरुता गद्दी वर्ष के अवसर पर श्री हजूर साहिब ([[नांदेड़]]) में संगत द्वारा लंगर का आयोजन किया गया। इसके अलावा शहीदी प्रदर्शनी, शस्त्र प्रदर्शनी आदि भी आयोजित हुर्इं। इससे पूर्व मुम्बई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने पथसंचलन किया और दादर स्थित गुरुद्वारे में मत्था टेका। सिख संगत के प्रयास से ही दो साल पूर्व श्री गुरु गोविन्द सिंह द्वारा [[औरंगजेब]] को लिखे गये पत्र "[[जफरनामा]]" पर [[नई दिल्ली]] में संगोष्ठी हुई और उसका [[हिन्दी]] [[अनुवाद]] भी पुस्तकाकार में प्रकाशित किया गया। उल्लेखनीय है कि श्री [[गुरु गोविन्द सिंह]] जी ने "जफरनामा" के माध्यम से औरंगजेब को उसकी कमियां गिनाई थीं और उसे चेताया भी था। गुरुओं की वाणी को लोगों तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय सिख संगत की एक मासिक पत्रिका "संगत संसार" भी है।
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