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== करियर == [[चित्र:Waheeda ji in Pyaasa.jpg|left|250px|thumb|वहीदा, [[प्यासा]] में (१९५७)]] हिन्दी फिल्म में उनकी पहली उपस्थिति ''[[सी आई डी (1956 फ़िल्म)|सी आई डी]]'' (1956) में हुई थी।<ref>{{cite news |title=Bdy Spcl: इस फिल्म के बाद कभी गुरु दत्त से नहीं मिली थीं वहीदा रहमान, एक्टर ने कर ली थी सुसाइड |url=https://www.amarujala.com/photo-gallery/entertainment/bollywood/veteran-actress-waheeda-rehman-81th-birthday-today?pageId=4 |accessdate=24 मार्च 2019 |work=[[अमर उजाला]] }}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> बाद में, उन्हें ''[[प्यासा (1957 फ़िल्म)|प्यासा]]'' (1957), ''12 ओ'क्लॉक'' (1958), ''[[कागज़ के फूल (1959 फ़िल्म)|कागज़ के फूल]]'' (1959), ''[[साहिब बीबी और ग़ुलाम (1962 फ़िल्म)|साहिब बीबी और ग़ुलाम]]'' और ''[[चौदहवीं का चाँद]]'' (1961) सहित कई सफल फिल्मों में देखा गया। उनकी अन्य उल्लेखनीय फिल्मों में ''[[सोलवाँ साल (1958 फ़िल्म)|सोलवाँ साल]]'' (1958), ''[[बात एक रात की]]'' (1962), ''[[कोहरा (1964 फ़िल्म)|कोहरा]]'' (1964), ''[[बीस साल बाद (1962 फ़िल्म)|बीस साल बाद]]'' (1962), ''[[गाइड (1965 फ़िल्म)|गाइड]]'' (1965), ''[[मुझे जीने दो (1963 फ़िल्म)|मुझे जीने दो]]'' (1963), ''[[तीसरी कसम]]'' (1966), ''[[नील कमल (1968 फ़िल्म)|नील कमल]]'' (1968) और ''[[ख़ामोशी]]'' (1969) शामिल हैं। उनका करियर 1960, 1970 और 1980 के दशक तक जारी रहा। उन्होंने ''गाइड'' (1965) में अपनी भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता। यहाँ वह अपने करियर के शिखर पर पहुँची। उन्होंने ''नील कमल'' (1968) के लिये भी ये पुरस्कार जीता।<ref>{{cite news |title=81 साल की उम्र में भी बेहद चार्मिंग दिखती हैं वहीदा रहमान, देखें लेटेस्ट तस्वीरें |url=https://www.jagran.com/entertainment/bollywood-vishesh-waheeda-rehman-special-and-her-latest-look-in-now-and-then-with-life-journey-as-celebrate-her-81st-birthday-on-3rd-birthday-18880935.html |accessdate=24 मार्च 2019 |work=[[दैनिक जागरण]] |language=hi |archive-url=https://web.archive.org/web/20190324155624/https://www.jagran.com/entertainment/bollywood-vishesh-waheeda-rehman-special-and-her-latest-look-in-now-and-then-with-life-journey-as-celebrate-her-81st-birthday-on-3rd-birthday-18880935.html |archive-date=24 मार्च 2019 |url-status=live }}</ref> लेकिन बाद की फिल्मों में उत्कृष्ट अभिनय के बावजूद जिसमें ''[[रेशमा और शेरा (1971 फ़िल्म)|रेशमा और शेरा]]'' (1971) के लिये राष्ट्रीय पुरस्कार जीतना शामिल रहा, उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं। सत्तर के दशक के मध्य से, मुख्य हीरोइन के रूप में वहीदा का करियर समाप्त हो गया और चरित्र अभिनेत्री के रूप में उनका करियर शुरू हुआ। ''[[लम्हे]]'' (1991) में अपनी उपस्थिति के बाद, उन्होंने 12 साल के लिए फिल्म उद्योग से संन्यास ले लिया।
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