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== चुंबकीय ध्वनिआलेखन और पुनरुत्पादन == उपर्युक्त छायांकन की विधि में ध्वनि का पुनरुत्पादन बहुत उच्च कोटि का नहीं होता। यद्यपि इस विधि से जो आलेखन, चलचित्र स्टूडियो में होता हैं, वह तब भी अधिक उच्च कोटि का हो सकता है, तथापि चलचित्र प्रदर्शनगृहों में ध्वनि का पुनरुत्पादन उतनी उच्च कोटि का नहीं हो सकता। पुनरुत्पादित ध्वनि में आवृत्ति की उच्चतम सीमा प्राय: 7,000 ही हो पाती थी। परंतु इस विधि का एक बड़ा लाभ यह था कि प्रकाशिक छायांकन होने के कारण इसे फिल्म की पट्टी पर चित्र छापने के साथ ही छापा जा सकता था। प्रकाशविधि की कठिनाइयाँ दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने चुंबकीय ध्वनि आलेख एवं पुनरुत्पादन विधि का सहारा लिया। इस विधि का सिद्धांत टेप रेकार्डर के सिद्धांत जैसा ही है। जिस ध्वनि का आलेखन करना होता है उसको सर्वप्रथम एक माइक्रोफोन की सहायता से विद्युच्चुंबकीय तरंगों में परिवर्तित करके एक प्रवर्धक द्वारा प्रवर्धित करते हैं। तत्पश्चात् इन प्रवर्धित संकेतों को एक विद्युच्चुंबक के कुंडल में भेजते हैं। इस कुंडल में धारा का मान प्राप्त संकेतों के अनुसार परिवर्तित होता है तथा इस धारा के मान के अनुसार विद्युच्चुंबक की चुंबकीय तीव्रता में भी परिवर्तन होता है। इस विद्युच्चुंबक के दोनों ध्रुवों के बीच की दूरी अत्यंत कम होती है, अत: उनके बीच चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता बहुत अधिक होती है और इसके कुंडलों में प्रवाहित होनेवाली धारा में परिवर्तन से क्षेत्र की तीव्रता में अधिक परिवर्तन भी होता है। इस विद्युत् चुंबक के अत्यंत निकट से एक टेप गुजरता है, जिसपर किसी चुंबकीय पदार्थ, जैसे लौह ऑक्साइड (iron oxide), का लेप चढ़ा रहता है। विद्युत् चुंबक के सम्मुख से गुजरते समय इस टेप पर लेपित चुंबकीय पदार्थ के चुंबकीय गुणों में परिवर्तन होता है, जो विद्युच्चुंबक के चुंबकत्व में परिवर्तन के अनुरूप होता है और चूँकि विद्युच्चुंबक के चुंबकत्व में परिवर्तन माइक्रोफोन पर पड़नेवाली ध्वनि के अनुरूप होता है, अत: टेप के चुंबकीय गुणों में परिवर्तन भी माइक्रोफोन पर पड़नेवाली ध्वनि के अनुरूप होता है। इस विधि से टेप पर ध्वनि का चुंबकीय आलेखन हो जाता है। पुरुत्पादन के लिए जब यही टेप किसी विद्युच्चुंबक के सम्मुख चलाया जाता है, तब उसके कुडलों में प्रवाहित होनेवाली धारा में तदनुरूप परिवर्तन होता है। धारा का यह परिवर्तन एक प्रवर्धक द्वारा प्रवर्धित करके लाउडस्पीकर पर देने से ध्वनि का पुनरुत्पादन होता है। फिल्म पर इस विधि से आलेखन के लिए आवश्यक है कि फिल्म के एक किनारे पर किसी चुंबकीय पदार्थ का लेप हो। साथ ही प्रदर्शन गृह में पुनरुत्पादन के लिए प्रकाशस्त्रोत एवं फोटोसेल के स्थान पर चुंबकीय हेड की आवश्यकता होगी।
सारांश:
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