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== द्रवों की श्यानता (Viscosity of liquids) == [[चित्र:Schema pour definition viscosite.png|right|thumb|300px|काल्पनिक पट्टियों की आपेक्षिक गति से श्यान बल]] दो ऐसी असीमित समांतर पट्टिकाओं (plates) की कल्पना करें जिनके बीच में एक द्रव पदार्थ रखा हुआ है (देखें चित्र)। मान लीजिए पट्टिका abcd अपने ही समतल (plane) में, दाहिनी दिशा में, एक स्थिर वेग (constant velocity) v से आगे बढ़ रही है, जिसे चित्र में तीर द्वारा दिखाया गया है, तथा पट्टिका a'b'c'd' अपनी स्थिर अवस्था में है। तात्पर्य यह है कि पट्टिका abcd का सापेक्ष वेग व है। ऐसी अवस्था में यह कहा जाता है कि द्रव पदार्थ पूरा का पूरा वेग v से तीर द्वारा प्रदर्शित दिशा में गतिमान है। यदि द्रव का प्रवाह धारारेखी गति (streamline motion) से हो रहे हो, तो द्रव की वह परत जो स्थिर पट्टिका a'b'c'd' के संपर्क में है, अचल अवस्था में रहती है, जबकि अन्य दूसरी परतों का प्रवाह सतह के समांतर होता रहता है। लेकिन इन परतों का वेग, जैसे-जैसे हम ऊपर की ओर आते हैं, धीरे-धीरे बढ़ता चला जाता है। अंतिम परत, जो पट्टिका abcd के संपर्क में होती है, उसका वेग v ही होता है। अब हम द्रव में किसी क्षैतिज समतल (horizontal plane) पर ध्यान देंगे। इस समतल के अणुओं को इसके ठीक ऊपरवाली परत के अणुओं द्वारा त्वरण (acceleration) मिलता है, क्योंकि ऊपरवाली परत के अणुओं का वेग इस समतल के अणुओं के वेग से ज्यादा होतो है, जबकि क्षैतिज समतल के ठीक नीचे की परत के अणुओं द्वारा क्षैतिज समतल के अणुओं की गति में मंदन लाया जाता है। इसी प्रकार द्रव की प्रत्येक परत अपने ठीक ऊपरवाली परत पर एक स्पर्शरेखीय पश्च बल (tangential backward force) डालती है, जिसके कारण इन दोनों परतों के बीच की सापेक्ष गति नष्ट होती है। परिणामस्वरूप यदि हमें द्रव की समांतर परतों के बीच सापेक्ष गति रखनी हो, तो यह अत्यावश्यक है कि एक बाहरी बल (external force) को इस पश्चकर्षण (backward drag) पर हावी (overcome) होना चाहिए। यदि बाहरी बल नहीं होगा, तो कुछ समय के बाद द्रव की विभिन्न परतों के बीच सापेक्ष गति समाप्त हो जाएगी। किसी द्रव का वह गुण जिसके सामर्थ्य की बदौलत, द्रव अपनी विभिन्न परतों के बीच की सापेक्ष गति का विरोध करता है, द्रव की श्यानता, अथवा आंतरिक घर्षण (Internal friction), कहलाता है। यह गुण, जो एक द्रव से दूसरे द्रव में केवल डिग्री या कोटि में ही अंतर रखता है, हर एक तरल का एक अंतर्निहित गुणधर्म है। धारारेखी गति के लिए, न्यूटन के श्यान प्रवाह (Viscous flow) के नियम के अनुसार, द्रव की समानांतर परतों के बीच स्पर्शरेखीय श्यान बल F को नीचे दिए गए संबंध द्वारा दिखलाया जाता है : F = -h. A. dv/dz ...... ...... (1) जहाँ A = समांतार परतों का क्षेत्रफल, dz = परतों के बीच की दूरी, dv = परतों की सापेक्ष गति, dv/dz = वेग प्रवणता (velocity gradient) तथा h एक स्थिरांक (constant) है, जिसे "द्रव की श्यानता का गुणांक" कहा जाता है। यह, अथवा इसका मान, द्रव की प्रकृति तथा भौतिक दशाओं (physical conditions) पर निर्भर करता है। यदि हम ऊपर दर्शाए गए संबंध (1) में A = 1, dv/dz = 1 रखें, तो F = -h होगा। अतएव किसी द्रव की "श्यानता के गुणांक" की परिभाषा इस प्रकार दी जा सकती है : :"किसी द्रव के दो समांतर तलों के बीच इकाई वेग प्रवणता रखने के लिए जो स्पर्शरेखीय बल प्रति इकाई क्षेत्रफल के लिए आवश्यक होता है, उसे उस द्रव की श्यानता का गुणांक कहते हैं।" यद्यपि ऊपर दो पट्टिकाओं तथा उनके बीच द्रव की उपस्थिति जैसी व्यवस्था की कल्पना कर, आसानी से "श्यानता के गुणांक" की परिभाषा की गई है, तथापि प्रयोगात्मक रूप में ऐसी व्यवस्था को पाना संभव नहीं है। पहले पहल पानी जैसी तरल वस्तुओं का "श्यानता के गुणांक" पानी के बहाव को, [[केश नलिका|केशिका नलिकाओं]] से गुजरने के बाद, मापकर निकाला गया और आजकल भी यह तरीका विशद रूप से प्रयोग में लाया जाता है। मान लीजिए कि, कोई द्रव, जैसे पानी, किसी वृत्तीय छेद की संकीर्ण नली से होकर गुजर रहा है। यदि पानी धारारेखी गति से संकीर्ण नली से होकर प्रवाहित हो रहा है तथा नली के किसी अनुप्रस्थ परिच्छेद के ऊपर दबाव एक समान हो और द्रव की वह परत जो नली की गोलीय दीवार के संपर्क में हो एवं प्रयोगात्मक रूप से स्थिर हो, तो पानी का श्यानतागुणांक नीचे दिए हुए संबंध द्वारा निकाला जा सकता है : :<math> Q = \frac{\pi r^4}{8 \eta}\frac{\Delta p}{l} </math> ..... ..... (2) जहाँ Q = पानी का वह आयतन जो प्रति सेकंड नली से होकर गुजरता है, r = सँकरी नली का अर्धव्यास <math>{\Delta p}</math> = दबाव का अंतर जो नली के दोनों सिरों के बीच होता है, l = संकीर्ण नली की लंबाई तथा <math>{\eta}</math> = श्यानता का गुणांक है।
सारांश:
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