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== प्रमुख प्रादेश == इन प्रादेशों का नामकरण आंग्ल विधि पर आधारित है। === बंदी प्रत्यक्षीकरण प्रादेश === '''{{मुख्य|बन्दी प्रत्यक्षीकरण}}''' उक्त प्रादेशों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है बंदी प्रत्यक्षीकरण प्रादेश (Writ of Habeas Corpus)। इसका वास्तविक अर्थ है "बंदी को सशरीर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए"। यह प्रादेश किसी व्यक्तिविशेष अथवा कारागार की हिरासत में निरुद्ध (detained) बंदी के व्यक्तिस्वातंत्र्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण अस्त्र है। इस प्रादेश द्वारा न्यायालय बंदी व्यक्ति को अपने समक्ष उपस्थित किए जाने का आदेश देता है और उसके निरोध (detention) के कारणों की छानबीन करता है। यदि न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि बंदी का निरोध (detention) अवैध तथा अनौचित्यपूर्ण (unproper) है, तो उस दशा में उसे निर्मुक्त (free) कर दिया जाता है। इस प्रादेश का उपयोग अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण (imternational extradition) की वैधता की जाँच, सशस्त्र सेना अथवा नौसेना द्वारा बंदी बनाए गए व्यक्तियों की निर्मुक्ति, विदेशियों के देश से निष्कासन या निर्वासन को रोकने, तथा कारागार अथवा व्यक्ति विशेष की हिरासत में अवैध रूप से निरुद्ध (detained) व्यक्ति की निर्मुक्ति के लिए होता है। यह प्रादेश न्यायालय द्वारा आधिकारिक (as of right) रूप से जारी किया जाता है किंतु वह इसे प्रकृत्या जारी नहीं करता (not as of course)। प्रादेश के जारी किए जाने की स्वीकृति तभी प्रदान की जाती है जब कि प्रार्थी हलफनामे (affidevit) द्वारा संबलित याचिका में यह प्रदर्शित करे कि उसका निरोध अवैध तथा अनुचित है। याचिका स्वयं प्रार्थी द्वारा अथवा उससे संबंधित किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत की जा सकती है। निरोध की वैधता की छानबीन बंदी के निरोधक (person detaining) द्वारा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की तिथि को की जाती है। === परमादेश === {{मुख्य|परमादेश}} परमादेश (mandamus) का अर्थ है "हमारा आदेश है।" [[इंग्लैण्ड|आंग्लदेश]] में परमादेश न्यायालय के क्वींस बेंच डिवीजन द्वारा किसी अधिकारी, निगम अथवा नीचे की अदालतों के नाम जारी किया जाता है। इसमें इस बात की स्पष्ट आज्ञा होती है कि "प्रादेश में निर्दिष्ट कार्य का यथोचित संपादन किया जाए क्योंकि वही उसका (अधिकारी, निगम का, न्यायालय का) नियतकर्म अथवा कर्तव्य है।" प्रादेश में निर्दिष्ट आज्ञा किसी कार्य के लिए जाने अथवा उससे विरत होने से संबद्ध होती है। यह प्रादेश एक सामान्य वैधिक कर्तव्य के प्रवर्तन (enforcement) के लिए जारी किया जाता है और इसका प्रयोग प्रसंविदाजन्य कर्तव्यों (contractual obligations) के प्रवर्तन के लिए नहीं होता। इसका प्रयोग वहाँ भी नहीं किया जाता जहाँ इष्ट कार्य किसी अधिकारी के विवेक (discretion) पर निर्भर होता है। किंतु उस अवस्था में जब विवेकाधिकार किसी कर्तव्य के साथ संलग्न हो, न्यायालय उसके संपादन के लिए आदेश दे सकता है। किंबहुना, यदि अधिकारीविशेष अपने विवेकाधिकार का प्रयोग करते समय किन्हीं अनावश्यक विषयों पर ध्यान देता है अथव आवश्यक वस्तुओं पर ध्यान नहीं देता तो इन दशाओं में न्यायालय उक्त अधिकारी के आदेश को रद्द करते हुए उस विषय पर पुनर्विचार करने का आदेश दे सकता है। परमादेश उस अवस्था में भी जारी किया जाता है जब कोई अधिकारी अपनी कार्यसीमा का अतिक्रमण अथवा अपने अधिकारों का दुरुपयोग करता है। === निषेधादेश === निषेधादेश (Prohibition) निम्नतर न्यायालयों, न्यायाधिकरणों अथवा न्यायिक कल्प अधिकारियों (quasi judicial authorities) के नाम जारी कर उन्हें अपनी अधिकारसीमा के उल्लंघन से विरत होने अथवा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (rules of natural justice) की अवहेलना न करने का आदेश दिया जाता है। उदाहरणस्वरूप, इस प्रादेश द्वारा किसी न्यायाधीश को उस वाद विशेष की सुनवाई से विरत रहने का आदेश दिया जा सकता है जिसमें न्यायाधीश का व्यक्तिगत स्वार्थ संलग्न हो। निषेधादेश उस अवस्था में भी जारी किया जा सकता है जब याचिकादाता के समक्ष वैकल्पिक मार्ग होते हुए भी न्यायाधीश द्वारा किया गया सीमोल्लंघन स्पष्ट हो। === अधिकारपृच्छा प्रादेश === अधिकारपृच्छा प्रादेश (writ of quo warrants), सार्वजनिक अधिकारी के पद पर आसीन व्यक्ति के नाम जारी कर उससे यह प्रश्न किया जाता है कि किन प्रमाणों के द्वारा वह उक्त पद पर आसीन रहने के अधिकार का समर्थन करता है और किन प्रमाणों के आधार पर यह निश्चित किया जाए कि उस पद पर आसीन रहने का वास्तविक अधिकार उसे प्राप्त है। यह प्रादेश प्रकृत्या जारी नहीं किया जाता। इसे जारी करने के पूर्व न्यायालय याचिकादाता के चरित्र और लक्ष्य की जाँच भी कर सकता है। === उत्प्रेषणादेश === '''{{मुख्य|उत्प्रेषण}}''' उत्प्रेषणादेश (Certiorari) निषेधादेश की ही भाँति एक अत्यंत प्राचीन प्रादेश है जिसके द्वारा आंग्ल न्यायालय का "क्वींस बेंच डिवीजन" न्यायाधिकरणों तथा कल्प न्यायधिकरणों की कार्यवाहियों को नियंत्रित किया करता था। इस विचित्र नामकरण का रहस्य यह है कि इसके [[लातिन भाषा|लैटिन]] प्रारूप के लिए यह आवश्यक था कि अन्वेषणीय कार्यवाहियों को सम्राज्ञी के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के पूर्व उनका "क्वींस बेंच डिवीजन" द्वारा प्रमाणीकरण हो जाए। उत्प्रेषणादेश तभी जारी किए जाते हैं जब कि न्यायाधिकरण, अथवा कल्प न्यायाधिकारण के आदेश उनकी शक्तिसीमा का अतिक्रमण करते हों, [[प्राकृतिक न्याय]] के सिद्धांतों की अवहेलना करते हों अथवा विधान के किसी ऐसे भ्रम से दूषित हों जो उनमें (आदेशों में) स्पष्ट दिखाई पड़ते हों (apparent on the face of the rceord)।
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