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== मुहम्मद की हिजरत (प्रवास) == नगर मक्का था, 620 ई तीर्थयात्रा का मौसम था, मदीना से आये "बनू खज़्रज" के छ्ः लोगों से मुलाक़ात की, उन्हे इस्लाम के बारे में बताय और क़ुरान के चंद आयात पढ कर सुनाया<ref>{{cite book |last=Sell |first=Edward |authorlink=Edward Sell (priest) |title=The Life of Muhammad |url=http://www.muhammadanism.org/Canon_Sell/muhammad/life_muhammad.pdf |accessdate=19 January 2013 |year=1913 |publisher=The Christian Literary Society for India. |location=[[Madras]] |page=70 |archive-url=https://web.archive.org/web/20131031202846/http://www.muhammadanism.org/Canon_Sell/muhammad/life_muhammad.pdf |archive-date=31 अक्तूबर 2013 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite book |last=Holt |first=P. M. |author1link=P. M. Holt |last2=Lambton |first2=Ann K. S. |last3=Lewis |first3=Bernard |author3link=Bernard Lewis |title=The Cambridge History of Islam |url=https://archive.org/details/cambridgehistory00holt_798 |year=2000 | publisher=[[Cambridge University Press]] | isbn=978-0-521-21946-4 |page=[https://archive.org/details/cambridgehistory00holt_798/page/n57 39]}}</ref> इन बातों से खुश होकर उन्होंने इस्लाम क़बूल किया।<ref name="Shibli1">[[Shibli Nomani]]. [[Sirat-un-Nabi]]. Vol 1. [[Lahore]].</ref> और 621 ई मे, उन में से पांच लोग अपने साथ सात लोगों को लाये। यह बारह ने हज़रत मुहम्मद को बताया कि शहर मदीना में इसलाम फैल रहा है, और प्रतिग्या की कि वह मुहम्मद को प्रेशित मानते हैं, तोहीद पर विश्वास लाते है, और बुराइयां जैसे चोरी, व्यभिचार और क़त्ल से दूर रहेंगे। इस प्रतिग्या को "अक़बा का पहला प्रतिग्या" कहते हैं।<ref>Khan (1980), p.70.</ref><ref>Holt, Lambton, and Lewis (2000), p. 40.</ref><ref>Sell (1913), p. 71.</ref> इन की दरख्वास्त पर हजरत मुहम्मद ने "मुसाब इब्न उमैर" को मदीना भेजा कि मदीने वालों को इसलाम का पाठ पढायें। मदीना में लोग इसलाम के छाते तले आये। अगली साल 622 ई के तीर्थयात्रा में, मदीना से बनू आस और खजरज जाती के 75 मुसलमान मक्का आए और हजरत मुहम्मद को अपना साथ दिया, और मदीना आने पर संपूरण सहयोग का आश्वासन दिया। मदीना के विभिन्न जातियों के दरमियान झगडों को दूर करने के लिये दूत के रूप आने का निमंत्रण भी दिया। <ref>{{cite book |last=Hitti |first=Philip Khuri |authorlink=Philip Khuri Hitti |title=[[History of the Arabs (book)|History of the Arabs]] |year=1946 |publisher=Macmillan and Co. |location=[[लंदन|London]] |isbn= |page=[https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.13564/page/n138 116]}}</ref> इस को अल-अक़बह का अहद कहते हैं <ref name="Holt, et al 2000, p. 40">Holt, et al (2000), p. 40.</ref><ref>Khan (1980), p. 73.</ref> यह एक राजनीती व धार्मिक कामियाबी थी जो नबी को और उनके अनुयाइयों को मदीना हिजरत करने का मौका मिला। <ref>Sell (1913), p. 76.</ref> इन अहदों के बाद, मुहम्मद ने अपने अनुयायियों को प्रोत्साहित किया कि वह मदीना जाएँ, और दो महीनों के अंतर में सारे मुसलमान मक्का से मदीना जाएँ।
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