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== विकास का पहला दौर == वस्तुत: सन 1900 ई॰ से 1915 ई॰ तक हिन्दी कहानी के विकास का पहला दौर था। मन की चंचलता (माधवप्रसाद मिश्र) 1907 ई॰ गुलबहार (किशोरीलाल गोस्वामी) 1902 ई॰, पंडित और पंडितानी (गिरिजादत्त वाजपेयी) 1903 ई॰, ग्यारह वर्ष का समय ([[रामचन्द्र शुक्ल|रामचंद्र शुक्ल]]) 1903 ई॰, दुलाईवाली (बगमहिला) 1907 ई॰, विद्या बहार (विद्यानाथ शर्मा) 1909 ई॰, राखीबंद भाई (वृन्दावनलाल वर्मा) 1909 ई॰, ग्राम ([[जयशंकर 'प्रसाद']]) 1911 ई॰, सुखमय जीवन ([[चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी'|चंद्रधर शर्मा गुलेरी]]) 1911 ई॰, रसिया बालम (जयशंकर प्रसाद) 1912 ई॰, परदेसी (विश्वम्भरनाथ जिज्जा) 1912 ई॰, कानों में कंगना (राजाराधिकारमणप्रसाद सिंह)1913 ई॰, रक्षाबंधन ([[विश्वंभर नाथ शर्मा 'कौशिक'|विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक']]) 1913 ई॰, [[उसने कहा था]] (चंद्रधर शर्मा गुलेरी) 1915 ई॰, आदि के प्रकाशन से सिद्ध होता है कि इस प्रारंभिक काल में हिन्दी कहानियों के विकास के सभी चिन्ह मिल जाते हैं। 1950 ई° तक हिन्दी कहानी का एक विस्तृत दौर समाप्त हो जाता है और हिन्दी कहानी परिपक्वता के दौर में प्रवेश करती है।
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