सामग्री पर जाएँ
मुख्य मेन्यू
मुख्य मेन्यू
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
मार्गदर्शन
मुखपृष्ठ
हाल में हुए बदलाव
बेतरतीब पृष्ठ
मीडियाविकि के बारे में सहायता
भारतपीडिया
खोजें
खोजें
दिखावट
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
व्यक्तिगत उपकरण
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
लॉग-आउट किए गए संपादकों के लिए पृष्ठ
अधिक जानें
योगदान
वार्ता
"
होम रूल आन्दोलन
" (अनुभाग) सम्पादित करें
पृष्ठ
चर्चा
हिन्दी
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
उपकरण
उपकरण
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
क्रियाएँ
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
सामान्य
कड़ियाँ
पृष्ठ से जुड़े बदलाव
विशेष पृष्ठ
पृष्ठ की जानकारी
दिखावट
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
चेतावनी:
आपने लॉग-इन नहीं किया हुआ है। अगर आप सम्पादन करते हैं तो इस पृष्ठ के सम्पादन इतिहास में आपका IP पता दृश्य होगा। अगर आप
लॉग-इन
करते हैं या
खाता बनाते हैं
तो दूसरी सुविधाओं के साथ-साथ आपके सम्पादनों का श्रेय आपके सदस्यनाम पर दिया जाएगा।
ऐन्टी-स्पैम जाँच। इसे
नहीं
भरें!
== होमरूल आन्दोलन के उद्देश्य == होमरूल आन्दोलन एक वैधानिक आन्दोलन था। इस आन्दोलन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित थे- *(१) इसका सर्वप्रथम उद्देश्य भारत के लिए स्वशासन प्राप्त करना था। ऐनी बेसेन्ट भारत को उसी तरह का स्वराज्य दिलाना चाहती थी जैसा कि ब्रिटिश साम्राज्य के दूसरे उपनिवेशों में था। श्रीमती ऐनी बेसेन्ट ने होमरूल आन्दोलन का आशय स्पष्ट करते हुए अपने साप्ताहिक पत्र ‘कामन वील’ के प्रथम अंक में लिखा था कि, ‘‘राजनीतिक सुधारों से हमारा अभिप्राय ग्राम पंचायतों से लेकर जिला बोर्डों और नगरपालिकाओं, प्रान्तीय विधान सभाओं, राष्ट्रीय संसद के रूप में स्वशासन की स्थापना करना है। इस राष्ट्रीय संसद के अधिकार स्वशासित उपनिवेशों की धारा सभाओं में समान ही होंगे। उन्हें नाम चाहे जो भी दिया जाए और जब ब्रिटिश साम्राज्य की संसद में स्वशासित राज्यों के प्रतिनिधि लिए जाएँ तो भारत का प्रतिनिधि भी उस संसद में पहुँचे।’’ *(२) इस आन्दोलन का उद्देश्य न तो अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालना था और न ही उनके युद्ध के प्रयत्नों में बाधा डालना था। इसके विपरीत उनका कहना था कि स्वशासित भारत अंग्रेजों के लिए युद्ध से अधिक सहायक सिद्ध होगा। भारतीय युद्ध में अंग्रेजों को इसलिए सहायता दे रहे थे क्योंकि उन्हें यह उम्मीद थी कि युद्ध की समाप्ति के बाद अंग्रेज उन्हें स्वशासन देंगे। ऐनी बेसेन्ट का मानना था कि यदि ब्रिटिश सरकार युद्ध के दौरान ही स्वशासन देकर उसे संतुष्ट कर दे तो भारतीय अधिक तन्मयता तथा साधन से अंग्रेजों की युद्ध में सहायता करेंगे। <br>ऐनी बेसेन्ट का विचार था कि एक पराधीन भारत ब्रिटिश साम्राज्य के लिए उतना सहायक नहीं हो सकता जितना कि स्वतन्त्र भारत। इस प्रकार इस आन्दोलन का उद्देश्य युद्ध में परोक्ष रूप से ब्रिटेन को सहायता देना था। *(३) होमरूल का एक उद्देश्य भारतीय राजनीति को उग्रधारा की ओर जाने से रोकना था। श्रीमती ऐनी बेसेन्ट ने भारतीय राजनीतिक प्रवृत्ति का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया वे इस निष्कर्ष पर पहुंची थी कि यदि शांतिपूर्वक तथा वैधानिक तरीकों से आन्दोलन नहीं चलाया गया तो भारतीय राजनीति पर क्रांतिकारियों तथा आतंकवादियों का आधिपत्य हो जाएगा। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु उन्होंने शांतिपूर्ण तथा वैधानिक आन्दोलन का प्रारम्भ श्रेयकर समझा। डॉ0 जकारिया के अनुसार, ‘‘उनकी योजना उग्र राष्ट्रीय व्यक्तियों को क्रांतिकारियों के साथ इकट्ठा होने से रोकने की थी। वे भारतीयों को ब्रिटिश साम्राज्य के अन्तर्गत स्वराज्य दिलवाकर संतुष्ट रखना चाहती थी।’’ इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने होमरूल आन्दोलन चलाया जिससे कि भारतीय राजनीति में क्रांतिकारियों के प्रभाव को रोका जा सके। *(४) युद्ध काल में भारतीय राजनीति शिथिल पड़ गई थी और सक्रिय कार्यक्रम तथा प्रभावशाली नेतृत्व के अभाव में राष्ट्रीय आन्दोलन की प्रगति का मार्ग अवरुद्ध हो गया था। अतः भारतीय जनता की सुषुप्तावस्था से जागना आवश्यक था। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु ऐनी बेसेन्ट ने होमरूल आन्दोलन प्रारम्भ किया। श्रीमती ऐनी बेसेन्ट का कहना था, ‘‘मैं एक भारतीय टॉम-टॉम हूं जिसका कार्य सोए हुए भारतीयों को जगाना है, ताकि वे उठें और अपनी मातृभूमि के लिए कुछ कार्य करें। होमरूल आन्दोलन उदारवादी आन्दोलन से भिन्न था। वह भारत के लिए स्वशासन की याचना नहीं, अपितु अधिकारपूर्ण माँग की अभिव्यक्ति था अर्थात् स्वशासन की प्राप्ति भारतीयों का जन्मसिद्ध अधिकार था। तिलक ने कहा था कि, ‘‘होमरूल मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, मैं इसे लेकर ही रहूँगा।’’ श्रीमती ऐनी बेसेन्ट का कहना था कि- होमरूल भारत का अधिकार है और राजभक्ति के पुरस्कार के रूप में उसे प्राप्त करने की बात कहना मूर्खतापूर्ण है। भारत राष्ट्र के रूप में अपना न्यायिक अधिकार ब्रिटिश साम्राज्य से माँगता है। भारत इसे युद्ध से पूर्व माँगता था, भारत इसे युद्ध के बीच माँग रहा है और युद्ध के बाद माँगेगा। परन्तु यह इस न्याय को पुरस्कार के रूप में नहीं वरन् अधिकार के रूप में माँगता है, इस बारे में किसी को कोई गलत धारणा नहीं होनी चाहिए।
सारांश:
भारतपीडिया पर किया कोई भी योगदान अन्य सदस्यों द्वारा बदला जा सकता है और हटाया भी जा सकता है। अगर आपको अपने लिखे हुए पाठ में संपादन होना नामंजूर है तो यहाँ पर न लिखें।
आप हमें यह भी वचन देतें हैं कि यह आपने स्वयं लिखा है अथवा सार्वजनिक क्षेत्र या किसी समान मुक्त स्रोत से प्रतिलिपित किया है (अधिक जानकारी के लिये
भारतपीडिया:कॉपीराइट
देखें)।
कॉपीराइट सुरक्षित कार्यों को बिना अनुमति के यहाँ न डालें!
रद्द करें
सम्पादन सहायता
(नए विंडो में खुलता है)