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== कहानियाँ == {{main|होली की कहानियाँ}} [[चित्र:Narasimha Disemboweling Hiranyakashipu, Folio from a Bhagavata Purana (Ancient Stories of the Lord) LACMA M.82.42.8 (1 of 5).jpg|thumb|right|भगवान नृसिंह द्वारा हिरण्यकशिपु का वध]]होली के पर्व से अनेक कहानियाँ जुड़ी हुई हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्ध कहानी है प्रह्लाद की। माना जाता है कि प्राचीन काल में [[हिरण्यकशिपु]] नाम का एक अत्यंत बलशाली असुर था। अपने बल के अहंकार में वह स्वयं को ही ईश्वर मानने लगा था। उसने अपने राज्य में ईश्वर का नाम लेने पर ही पाबंदी लगा दी थी। हिरण्यकशिपु का पुत्र [[प्रह्लाद]] ईश्वर भक्त था। प्रह्लाद की ईश्वर भक्ति से क्रुद्ध होकर हिरण्यकशिपु ने उसे अनेक कठोर दंड दिए, परंतु उसने ईश्वर की भक्ति का मार्ग न छोड़ा। हिरण्यकशिपु की बहन [[होलिका]] को वरदान प्राप्त था कि वह आग में भस्म नहीं हो सकती। हिरण्यकशिपु ने आदेश दिया कि होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठे। आग में बैठने पर होलिका तो जल गई, पर प्रह्लाद बच गया। ईश्वर भक्त प्रह्लाद की याद में इस दिन होली जलाई जाती है।<ref name="what">{{cite web|url=http://www.essortment.com/all/whatishinduho_rksm.htm|title=What is the Hindu Holi festival|access-date=3 मार्च 2008|format=एचटीएम|publisher=एसोर्टमेंट|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20080319004331/http://www.essortment.com/all/whatishinduho_rksm.htm|archive-date=19 मार्च 2008|url-status=live}}</ref> प्रतीक रूप से यह भी माना जाता है कि प्रह्लाद का अर्थ आनन्द होता है। वैर और उत्पीड़न की प्रतीक होलिका (जलाने की लकड़ी) जलती है और प्रेम तथा उल्लास का प्रतीक प्रह्लाद (आनंद) अक्षुण्ण रहता है।<ref name="holika">{{cite web|url= http://vishwahindusamaj.com/holi.htm86,652|title= होली या होलिका या होलाका|access-date= 3 मार्च 2008|format= एचटीएम|publisher= विश्व हिंदू समाज|language= }}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> '''होलिका दहन की मुख्य कथा''' होली से सम्बन्धित मुख्य कथा के अनुसार एक नगर में हिरण्यकश्यप नाम का दानव राजा रहता था। वह सभी को अपनी पूजा करने को कहता था, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद [[विष्णु|भगवान विष्णु]] का उपासक भक्त था। हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रहलाद को बुलाकर राम का नाम न जपने को कहा तो प्रहलाद ने स्पष्ट रूप से कहा, पिताजी! परमात्मा ही समर्थ है। प्रत्येक कष्ट से परमात्मा ही बचा सकता है। मानव समर्थ नहीं है। यदि कोई भक्त साधना करके कुछ शक्ति परमात्मा से प्राप्त कर लेता है तो वह सामान्य व्यक्तियों में तो उत्तम हो जाता है, परंतु [[परमात्मा]] से उत्तम नहीं हो सकता।<ref>{{Cite web|url=https://news.jagatgururampalji.org/holi-festival-2020-hindi-story/|title=होलिका दहन की वास्तविक कहानी (कथा)|last=|first=|date=|website=SA News|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref> यह बात सुनकर अहंकारी हिरण्यकश्यप क्रोध से लाल पीला हो गया और नौकरों सिपाहियों से बोला कि इसको ले जाओ मेरी आँखों के सामने से और जंगल में सर्पों में डाल आओ। सर्प के डसने से यह मर जाएगा। ऐसा ही किया गया। परंतु प्रहलाद मरा नहीं, क्योंकि सर्पों ने डसा नहीं।<ref>{{Cite web|url=https://news.jagatgururampalji.org/holi-festival-2020-hindi-story/|title=Holi Festival 2020 Hindi: Holika Dahan Story,Quotes,ऐसे मनाए होली|date=2020-03-08|website=S A NEWS|language=en-US|access-date=2020-03-09}}</ref> प्रह्लाद की कथा के अतिरिक्त यह पर्व राक्षसी [[होली की कहानियाँ|ढुंढी]], [[राधा]] [[कृष्ण]] के [[रास]] और [[कामदेव]] के पुनर्जन्म से भी जुड़ा हुआ है।<ref name="legends">{{cite web|url= http://www.thecolorsofindia.com/holi-legends/index.html|title= Holi - Legends and Myths|access-date= 3 मार्च 2008|format= एचटीएमएल|publisher= द कलर्स ऑफ़ इंडिया। कॉम|language= en|archive-url= https://web.archive.org/web/20080308220817/http://www.thecolorsofindia.com/holi-legends/index.html|archive-date= 8 मार्च 2008|url-status= dead}}</ref> कुछ लोगों का मानना है कि होली में रंग लगाकर, नाच-गाकर लोग [[शिव]] के गणों का वेश धारण करते हैं तथा शिव की बारात का दृश्य बनाते हैं। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि भगवान [[श्रीकृष्ण]] ने इस दिन [[पूतना]] नामक राक्षसी का वध किया था। इसी खु़शी में गोपियों और ग्वालों ने रासलीला की और रंग खेला था।<ref>{{cite web|url=http://www.bawarchi.com/festivals/holi.html|title=Holi|access-date=5 मार्च 2008|format=एचटीएमएल|publisher=बावर्ची.कॉम|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20080210025823/http://www.bawarchi.com/festivals/holi.html|archive-date=10 फ़रवरी 2008|url-status=dead}}</ref>
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