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=== शल्यक्रिया === [[Image:Lung cancer.jpg|thumb|[[न्यूमोनेक्टॉमी]] नमूना जिसमें एक [[स्क्वामस-कोशिका कार्सिनोमा]] शामिल है और जो श्वासनलियों के पास में सफेद क्षेत्र के रूप में दिख रहा है]] यदि जांच एनएससीएलसी की पुष्टि करते हैं तो [[cancer staging|चरण]] का आंकलन किया जाता है जिससे पता चलता है कि रोग स्थानीय है और शल्यक्रिया के प्रति संवेदी है या यह ऐसे बिंदु तक फैल गया है जहां से इसे शल्यक्रिया द्वारा ठीक नहीं किया जा सकता है। सीटी स्कैन तथा [[पोजीट्रान उत्सर्जन टोमोग्राफी]] को इस निर्धारण के लिए उपयोग किया जाता है।<ref name="Harrison" /> यदि मेडिएस्टाइनम लिम्फ नोड का शामिल होने की शंका हो तो, [[मेडिएस्टिनोस्कोपी]] के उपयोग से नोड्स के नमूने लेकर चरण पता करने में सहायता मिलती है।<ref name="Fishman1853">{{Cite book |author=Kaiser LR | title=Fishman's Pulmonary Diseases and Disorders | publisher=McGraw-Hill | year=2008 | pages=1853–1854| edition=4th | isbn=0-07-145739-9 }}</ref> [[रक्त परीक्षणों]] तथा [[फेफड़े की क्रियाशीलता का परीक्षण]] करके यह पता किया जाता है कि क्या व्यक्ति शल्यक्रिया के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम है।<ref name="Collins" /> यदि फेफड़े की क्रियाशीलता के परीक्षण खराब श्वसन संचय बताएं तो शल्यक्रिया संभव नहीं भी हो सकती है।<ref name="Harrison" /> आरंभिक चरण वाले एनएससीएलसी के अधिकांश मामलों में फेफड़े की पालि को निकाल दिया जाना ([[लोबेक्टॉमी]]) शल्यक्रिया उपचार का एक विकल्प है। वे लोग जो पूर्ण लेबोक्टॉमी के लिए अनुपयुक्त हैं, उन पर छोटी उपपालि कांट-छांट ([[वेज उपच्छेदन]]) की जा सकती है। हालांकि लोबेक्टॉमी की तुलना में वेज उपच्छेदन में रोग के फिर होने की संभावना अधिक होती है।<ref name="Fishman1855">{{Cite book | author=Kaiser LR |title=Fishman's Pulmonary Diseases and Disorders | publisher=McGraw-Hill | year=2008 | pages=1855–1856 | edition=4th |isbn=0-07-145739-9 }}</ref> वेज उपच्छेदन के किनारो पर रेडियोसक्रिय [[आयोडीन]] [[ब्रेकीथेरेपी]] रोग के फिर से होने के जोखिम को कम करती है।<ref>{{cite journal | last=Odell | first=DD |author2=Kent MS, Fernando HC | title=Sublobar resection with brachytherapy mesh for stage I non-small cell lung cancer | journal=Seminars in Thoracic and Cardiovascular Surgery |volume=22 | issue=1 | pages=32–37 | year=2010 | month=Spring | pmid=20813314 | doi=10.1053/j.semtcvs.2010.04.003}}</ref> पूरे फेफड़े को निकालने की प्रक्रिया ([[न्यूमोनेक्टॉमी]]) बेहद कम मामलों में की जाती है।<ref name="Fishman1855" /> [[वीडियो की सहायता से की जाने वाली थेरोस्कोपिक शल्यक्रिया]] तथा [[वीएटीएस लोबेक्टॉमी]] में फेफड़े के कैंसर की शल्य क्रिया के प्रति एक बेहद कम आक्रामक दृष्टिकोण रखा जाता है।<ref>{{cite journal | last=Alam| first=N |author2=Flores RM | title=Video-assisted thoracic surgery (VATS) lobectomy: the evidence base |journal=Journal of the Society of Laparoendoscopic Surgeons | volume=11 | issue=3 | pages=368–374 | year=2007 |month=July–September | pmid=17931521 | pmc=3015831}}</ref> वीएटीएस लोबेक्टॉमी, परंपरागत खुली लोबेक्टॉमी की तुलना में समान रूप से प्रभावी है और इसमें शल्यक्रिया पश्चात कम बीमारी की स्थिति होती है।<ref>{{cite journal | last=Rueth | first=NM |author2=Andrade RS |title=Is VATS lobectomy better: perioperatively, biologically and oncologically? | journal=Annals of Thoracic Surgery |volume=89 | issue=6 | pages=S2107–S2111 | year=2010 | month=June | pmid=20493991 | doi=10.1016/j.athoracsur.2010.03.020}}</ref> एससीएलसी में आम तौर पर, कीमोथेरेपी और/या रेडियोग्राफी उपयोग की जाती है।<ref name='SimonTurrisi'>{{cite journal |author=Simon GR, Turrisi A |title=Management of small cell lung cancer: ACCP evidence-based clinical practice guidelines (2nd edition)|journal=Chest |volume=132 |issue=3 Suppl |pages=324S–339S |year=2007 |month=September |pmid=17873178|doi=10.1378/chest.07-1385 |url=http://chestjournal.chestpubs.org/content/132/3_suppl/324S.long}}</ref> हालांकि एससीएलसी में शल्यक्रिया की भूमिका पर पुनः विचार किया जाता है। जब एससीएलसी के आरंभिक चरण में कीमोथेरेपी तथा विकिरण को जोड़ा जाता है तो शल्यक्रिया परिणामों को बेहतर कर सकती है।<ref>{{cite journal | last=Goldstein | first=SD |author2=Yang SC | title=Role of surgery in small cell lung cancer | journal=Surgical Oncology Clinics of North America | volume=20 | issue=4 | pages=769–777 | year=2011 |month=October | pmid=21986271 | doi=10.1016/j.soc.2011.08.001}}</ref>
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