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=== भारत === ''द ऑक्सफोर्ड इलस्ट्रेटेड कम्पेनियन टू मेडिसिन (The Oxford Illustrated Companion to Medicine)'' का मत है कि कुष्ठरोग का उल्लेख और साथ ही इसका उपचार, हिंदुओं की धार्मिक पुस्तक ''अथर्व-वेद'' में पहले से ही वर्णित है।<ref>लॉक एट अल; पृष्ठ 420</ref> ''एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटानिका 2008 (Encyclopedia Britannica 2008)'' में लिखते हुए, कीर्न्स (Kearns) व नैश (Nash) कहते हैं कि कुष्ठरोग का प्रथम उल्लेख भारतीय चिकित्सा पुस्तक ''[[सुश्रुत|सुश्रुत संहिता]]'' (6वीं सदी ईसा पूर्व) में मिलता है।<ref name="k&n08">कार्नस और नैश (2008)</ref> ''द कैम्ब्रिज एन्साइक्लोपीडिया ऑफ ह्युमन पैलियोपैथोलॉजी (The Cambridge Encyclopedia of Human Paleopathology)'' (1998) के अनुसार: "भारत की ''सुश्रुत संहिता'' 600 सदी ईसा पूर्व से ही इस स्थिति का काफी अच्छी तरह वर्णन करती है और यहां तक कि इसके लिये उपचारात्मक सुझाव भी प्रदान करती है".<ref name="cambridge-paleopathology">ऑफडरहाइड, ए.सी.; रोड्रिगुएज़-मार्टिन, सी. एण्ड लैंग्सजोएन, ओ. (1998) ''द कैम्ब्रीज इनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ ह्युमन पेलेयोपैथोलॉजी.'' कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस ISBN 0-521-55203-6, पृष्ठ 148.</ref> शल्य-चिकित्सक सुश्रुत 6वीं सदी ईसा पूर्व में भारत के नगर [[वाराणसी|काशी]] में निवास करते थे,<ref name="Dwivedi&Dwivedi07">द्विवेदी एंड द्विवेदी (2007)</ref> और चिकित्सीय पुस्तक ''सुश्रुत संहिता'' —उन्हें समर्पित—ने ईसा पूर्व पहली सहस्राब्दी के दौरान अपनी उपस्थिति दर्ज की.<ref name="k&n08" /> सुश्रुत के कार्य का उत्खनन में प्राप्त सबसे प्राचीन सुरक्षित लिखित सामग्री ''बोवर पाण्डुलिपी'' —चौथी सदी ईस्वी में लिखित, है, जो कि मूल रचना के लगभग एक सहस्राब्दी बाद लिखी गई।<ref>कुटुंबियन, पृष्ठ (2005) ''प्राचीन भारतीय चिकित्सा.'' ओरिएंट लाँगमैन ISBN 81-250-1521-3; पीपी. XXXII-XXXIII</ref> इन प्राचीन कार्यों की उपस्थिति के बावजूद इस बीमारी का पहला सामान्यतः अचूक माना जाना वाला वर्णन 150 ईस्वी में गैलेन ऑफ पेरागमम (Galen of Pergamum) का था। 2009 में, भारत में 4000-वर्षों पुराना एक नर-कंकाल मिला, जिस पर कुष्ठरोग के चिह्न दिखाई दे रहे थे।<ref>रॉबिंस जी, त्रिपाठी वीएम्, मिश्रा वीएन, मोहंती आरके, शिंदे वीएस, एट अल. (2009). [http://www.plosone.org/article/info%3Adoi%2F10.1371%2Fjournal.pone.0005669 प्राचीन भारत में कुष्ठ रोग के लिए स्केलेटल साक्ष्य (2000 ई.पू.)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20101012155828/http://www.plosone.org/article/info:doi/10.1371/journal.pone.0005669 |date=12 अक्तूबर 2010 }} PLoS ONE 4(5): e5669. {{doi|10.1371/journal.pone.0005669}}</ref> यह खोज बालाथाल (Balathal) नामक स्थान पर हुई, जो कि वर्तमान में [[राजस्थान]] का एक भाग है और ऐसा माना जाता है{{किसके द्वारा|date= जनवरी 2010}} कि यह इस बीमारी का अभी तक प्राप्त सबसे पुराना मामला है।<ref name="AP">{{cite web |title=Skeleton shows earliest evidence of leprosy |publisher=[[Associated Press]] |date=2009-05-27 |url=http://www.google.com/hostednews/ap/article/ALeqM5idNIe5ytThacobusirf-k5Bfwl_gD98E87F80 |accessdate=2009-05-29}}</ref> इससे इस बीमारी के पिछले सबसे प्राचीन ज्ञात मामले की तिथि, जो कि छठी-सदी के [[मिस्र]] की थी, 1,500 वर्ष पीछे चली गई।<ref name="Science">{{cite web |title=Skeleton Pushes Back Leprosy's Origins |publisher=Science Now |date=2009-05-27 |url=http://sciencenow.sciencemag.org/cgi/content/full/2009/527/1?rss=1 |accessdate=2009-05-29 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090823003529/http://sciencenow.sciencemag.org/cgi/content/full/2009/527/1?rss=1 |archive-date=23 अगस्त 2009 |url-status=dead }}</ref> ऐसा विश्वास है कि खुदाई में मिला नर-कंकाल किसी पुरुष का है, जो अपनी आयु के तीसरे दशक में था और अहार कैल्कोलिथिक (Ahar Chalcolithic) संस्कृति का सदस्य था।<ref name="Science" /><ref>{{cite web |title=Leprosy belonged to Ahar Chalcolithic era: Expert |publisher=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया ]] |date=2009-05-29 |url=http://timesofindia.indiatimes.com/Pune/Leprosy-belonged-to-Ahar-Chalcolithic-era-Expert/articleshow/4590778.cms |accessdate=2009-05-29 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100301113814/http://timesofindia.indiatimes.com/Pune/Leprosy-belonged-to-Ahar-Chalcolithic-era-Expert/articleshow/4590778.cms |archive-date=1 मार्च 2010 |url-status=live }}</ref> पुरातत्वविदों का कथन है कि यह नर-कंकाल न केवल कुष्ठरोग का अब तक प्राप्त सबसे प्राचीन मामला है, बल्कि यह इस प्रकार का पहला उदाहरण भी है, जो कि प्रागैतिहासिक भारत तक पीछे जाता है।<ref>{{cite web |title=‘Oldest evidence of leprosy found in India’ |publisher=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया ]] |date=2009-05-27 |url=http://timesofindia.indiatimes.com/Health--Science/Oldest-proof-of-leprosy-found-in-India/articleshow/4585654.cms |accessdate=2009-05-29 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090530141523/http://timesofindia.indiatimes.com/Health--Science/Oldest-proof-of-leprosy-found-in-India/articleshow/4585654.cms |archive-date=30 मई 2009 |url-status=live }}</ref> यह खोज इस बीमारी के उदगम से संबंधित एक सिद्धांत का समर्थन करती है, जिसका मानना है कि [[सिकंदर महान]] की सेनाओं के माध्यम से यूरोप में फैलने से पूर्व इसका उदगम भारत या अफ्रीका में हुआ।<ref name="AP" /> 1881 में, भारत में कुष्ठरोग के लगभग 120,000 मरीज थे। केंद्र सरकार ने 1898 का लेपर्स एक्ट (Lepers Act of 1898) पारित किया, जिसने भारत में कुष्ठरोग से ग्रस्त व्यक्तियों के बलपूर्वक परिरोध के लिये कानूनी प्रावधान प्रदान किया।<ref>[http://www.nls.uk/indiapapers/leprosy.html कुष्ठरोग - ब्रिटिश भारत की चिकित्सा का इतिहास] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20070910150758/http://www.nls.uk/indiapapers/leprosy.html |date=10 सितंबर 2007 }}, स्कॉटलैंड के राष्ट्रीय पुस्तकालय</ref>
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