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=== दोहा === : ''गोरी सोये सेज पर, मुख पर डाले केश'' : ''चल खुसरू घर अपने, रैन भई चहूँ देश'' -अमीर खुसरू ---- : ''खुसरो दरिया प्रेम का,सो उलटी वा की धार'' : ''जो उबरो सो डूब गया जो डूबा हुवा पार'' ---- : ''सेज वो सूनी देख के रोवुँ मैं दिन रैन, : ''पिया पिया मैं करत हूँ पहरों, पल भर सुख ना चैन। ---- : ''रैनी चढ़ी रसूल की सो रंग मौला के हाथ, : ''जिसके कपरे रंग दिए सो धन धन वाके भाग। ---- : ''खुसरो बाजी प्रेम की मैं खेलूँ पी के संग, : ''जीत गयी तो पिया मोरे हारी पी के संग। ---- : ''चकवा चकवी दो जने इन मत मारो कोय, : ''ये मारे करतार के रैन बिछोया होय। ---- : ''खुसरो ऐसी पीत कर जैसे हिन्दू जोय, : ''पूत पराए कारने जल जल कोयला होय। ---- : ''खुसरवा दर इश्क बाजी कम जि हिन्दू जन माबाश, : ''कज़ बराए मुर्दा मा सोज़द जान-ए-खेस रा। ---- : ''उज्ज्वल बरन अधीन तन एक चित्त दो ध्यान, : ''देखत में तो साधु है पर निपट पाप की खान। ---- : ''श्याम सेत गोरी लिए जनमत भई अनीत, : ''एक पल में फिर जात है जोगी काके मीत। ---- : ''पंखा होकर मैं डुली साती तेरा चाव, : ''मुझ जलती का जनम गयो तेरे लेखन भाव। ---- : ''नदी किनारे मैं खड़ी सो पानी झिलमिल होय, : ''पी गोरी मैं साँवरी अब किस विध मिलना होय। ---- : ''साजन ये मत जानियो तोहे बिछड़त मोहे को चैन, : ''दिया जलत है रात में और जिया जलत बिन रैन। ---- : ''रैन बिना जग दुखी और दुखी चन्द्र बिन रैन, : ''तुम बिन साजन मैं दुखी और दुखी दरस बिन नैंन। ---- : ''अंगना तो परबत भयो देहरी भई विदेस, : ''जा बाबुल घर आपने, मैं चली पिया के देस। ---- : ''आ साजन मोरे नयनन में सो पलक ढाप तोहे दूँ, : ''न मैं देखूँ और न को न तोहे देखन दूँ। ---- : ''अपनी छवि बनाई के मैं तो पी के पास गई, : ''जब छवि देखी पीहू की सो अपनी भूल गई। ---- : ''खुसरो पाती प्रेम की बिरला बाँचे कोय, : ''वेद, क़ुरान, पोथी पढ़े प्रेम बिना का होय। ---- : ''संतों की निंदा करे, रखे पर नारी से हेत, : ''वे नर ऐसे जाऐंगे जैसे रणरेही का खेत। ---- : ''खुसरो सरीर सराय है क्यों सोवे सुख चैन, : ''कूच नगारा सांस का बाजत है दिन रैन|
सारांश:
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