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==क़ुरआन में इद्दत का उल्लेख== <blockquote> जब तुम लोग त़लाक़ दो अपनी पत्नियों को, तो उन्हें तलाक़ दो उनकी 'इद्दत' के लिए, और गणना करो 'इद्दत' की तथा डरो अपने पालनहार अल्लाह से और '''न निकालो''' उन्हें उनके घरों से और न वह स्वयं निकलें,(क़ुरआन, 65:1)<ref>Translation of the meanings Surah At-Talāq - Hindi translation - The Noble Qur'an Encyclopedia https://quranenc.com/en/browse/hindi_omari/65/1</ref> </blockquote> <blockquote> हे ईमान वालो! जब तुम निकाह करो ईमान वालियों से, फिर तलाक़ दो उन्हें, इससे पूर्व कि हाथ लगाओ उनको, तो नहीं है तुम्हारे लिए उनपर '''कोई इद्दत''',[1] जिसकी तुम गणना करो। तो तुम उन्हें कुछ लाभ पहुँचाओ और उन्हें विदा करो भलाई के साथ। (क़ुरआन, 33:49) </blockquote> <blockquote>जिन स्त्रियों को तलाक़ दी गयी हो, वे तीन बार रजवती होने तक अपने आपको '''विवाह''' से रोके रखें। उनके लिए ह़लाल (वैध) नहीं है कि अल्लाह ने जो उनके गर्भाशयों में पैदा किया[1] है, उसे छुपायें, यदि वे अल्लाह तथा आख़िरत (परलोक) पर ईमान रखती हों,(क़ुरआन, 65:4) </blockquote> <blockquote> तथा जो निराश[1] हो जाती हैं मासिक धर्म से तुम्हारी स्त्रियों में से, यदि तुम्हें संदेह हो तो उनकी निर्धारित अवधि तीन मास है तथा उनकी, जिन्हें '''मासिक धर्म''' न आता हो और गर्भवती स्त्रियों की निर्धारित अवधि ये है कि प्रसव हो जाये </blockquote> <blockquote> और तुममें से जो मर जायें और अपने पीछे पत्नियाँ छोड़ जायें, तो वे स्वयं को '''चार महीने दस दिन''' रोके रखें।,(क़ुरआन, 2:234)</blockquote>
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