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=== अप्रामाणिक धार्मिक साहित्य === दूसरी शताब्दी ई. पू. से लेकर दूसरी शताब्दी ई. तक बहुत से ऐसे ग्रंथों की रचना हुई थी जिनका उद्देश्य है बाइबिल में प्रतिपादित विषयों की व्याख्या अथवा उनका विस्तार। इनमें प्राय: बाइबिल के प्रमुख पात्रों की भविष्य संबंधी उक्तियों का समावेश है। उदहारणार्थ, आदम और हौवा की जीवनी। इन रचनाओं को बाइबिल में स्थान नहीं मिला। इन्हें अप्रामाणिक साहित्य कहा जाता है। इस प्रकार के साहित्य की मूल भाषा प्राय: इब्रानी थीं, किंतु आजकल यह केवल आरमीय अथवा परवर्ती अनुवादों में ही मिलता है।
सारांश:
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